बढ़े बिलों से आजादी के विज्ञापन और पानी का बिल 47 लाख

special story on water bill in delhi

नई दिल्ली: दिल्ली में चारों तरफ केजरीवाल सरकार ने लोगों को बढ़े बिलों से आजादी दिलाने के होर्डिंग लगवाए हुए हैं लेकिन दिल्ली जल बोर्ड ने अपने एक उपभोक्ता को 46 लाख 80 हजार रुपए का बिल भेजा है. हालांकि ये बिल एक साल का है लेकिन उपभोक्ता का दावा है कि साल भर से जल बोर्ड ने कोई बिल भेजा ही नहीं और अब एक साथ लाखों का बिल आया है. जल बोर्ड के चेयरमैन कपिल मिश्रा ने बिल की जाँच करने की बात कही है.

दक्षिण दिल्ली में ईस्ट ऑफ कैलाश के पास सन्त नगर कॉलोनी में रहने वाले सुभाष मल्होत्रा अपने पानी के भारी भरकम बिल से खासे परेशान हैं. जल बोर्ड ने इन्हें पिछले एक साल का बिल इकठ्ठा भेजा है जो करीब 47 लाख रुपए का है. इनका आखिरी बिल दिंसबर 2014 में आया जिसके लिए मल्होत्रा ने करीब 5 हजार रुपए जमा किए थे. हमें जो बिल दिखाया गया वो 15 मार्च को जारी हुआ 2 महीने का बिल है. इसमें 2 महीने का बिल 5 लाख 56 हजार आया है. पिछला बकाया 39 लाख 56 हजार जोड़ कर कुल बिल लगभग 47 लाख रुपए का है.

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और अगर ये राशि 1 अप्रैल तक जमा नहीं हुई तो उसके बाद देनदारी 49 लाख 16 हजार यानि लगभग 50 लाख रुपए की हो जाएगी.
जिस कनेक्शन के लिए ये बिल आया है वो कमर्शियल है. दरअसल सुभाष मल्होत्रा कपड़ो के एक्सपोर्ट का व्यापार करते हैं. घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही उनका ऑफिस है. वहीं उनके 2 दर्जन स्टाफ भी काम करते हैं.

जिस कनेक्शन का ये बिल है उसके पानी का इस्तेमाल महज पीने के लिए होता है. ऐसे ही कमर्शियल उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केजरीवाल सरकार ने वैसे कमर्शियल कनेक्शन जहाँ पानी का कमर्शियल इस्तेमाल नहीं होता उन्हें प्राइवेट में तब्दील करने का फैसला भी किया हुआ है. लेकिन ना तो सुभाष मल्होत्रा को इस फैसले की जानकारी है ना ही जल बोर्ड ने ये जानकारी दी है.जानकारी तो छोड़िए यहाँ तो जल बोर्ड साल-साल भर बिल ही नहीं भेजता.

लोगों को बढ़े बिलों से आजादी दिलाने का दावा करने वाले केजरीवाल सरकार के विज्ञापनों की कलई खुद जल बोर्ड भारी भरकम बिल भेज कर खोल रहा है.
हालाँकि हमने जब ऐसे बिल की जानकारी जल बोर्ड के चेयरमैन मंत्री कपिल मिश्रा को दी तो उन्होंने इसकी जाँच करवाने की बात कही है.

मिश्रा के मुताबिक ऐसे बिलों से आजादी दिलाने के लिए ही जल बोर्ड ने ऐप जारी किया हुआ है ताकि लोग खुद अपने बिल तैयार कर सकें.
लेकिन अगर साफ पानी पहुंचना सरकार का काम है तो उस पानी का सही बिल पहुँचाना भी सरकार की ही जिम्मेदारी है.

एक ऐप बना कर सरकार लोगों को बढ़े बिलों से आजादी नहीं दिला सकती क्योंकि अभी भी काफी लोग पुराने तरीकों पर ही निर्भर हैं. इस मामले में सरकार के लिए एक सबक और है, वो ये कि जनता की सहूलियत के लिए लिए गए उसके फैसलों की जानकारी खुद जनता को ही नहीं है.

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