'वायुपुत्र' अर्जन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

'वायुपुत्र' अर्जन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

अर्जन सिंह को 44 साल की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया. साल 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे.

By: | Updated: 18 Sep 2017 02:00 PM
नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना के मार्शल और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक अर्जन सिंह का आज दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अर्जन सिंह वायुसेना के एकमात्र अधिकारी थे, जिन्हें फाइव स्टार रैंक प्रदान किया गया था. उनका 98 साल की उम्र में कल निधन हो गया. अर्जन सिंह का अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर में 15 अप्रैल 1919 को जन्म हुआ था.

दिल्ली में बरार स्कॉयर में अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, देश की पहली महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आ़डवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. इस दौरान अर्जन सिंह को 21 तोपों की सलामी भी दी गई और आसमान से उन्हें सैल्यूट किया गया. 




पाकिस्तान ने 1965 में ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरू किया, जिसमें उसने जम्मू कश्मीर के महत्वपूर्ण शहर अखनूर को निशाना बनाया, तब सिंह ने साहस, प्रतिबद्धता और पेशेवर दक्षता के साथ भारतीय वायु सेना का नेतृत्व किया. लड़ाकू पायलट रहे सिंह ने 1965 की लड़ाई में बाधाओं के बावजूद हवाई युद्ध शक्ति का पूर्ण इस्तेमाल कर भारतीय वायुसेना को प्रेरित किया.

44 साल की आयु में मिली थी वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी

उन्हें 44 साल की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया. साल 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे. अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और विश्व में चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.

1965 में द्म विभूषण से सम्मानित 

बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने वाले सिंह ना केवल निडर लड़ाकू पायलट थे, बल्कि उनको हवाई शक्ति के बारे में गहन ज्ञान था जिसका वह हवाई अभियानों में व्यापक रूप से इस्तेमाल करते थे. उन्हें 1965 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. वह एक अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे.

स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत भी रहे

वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद अर्जन सिंह को 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया. इसके साथ ही उन्होंने वैटिकन में भी राजदूत के रूप में सेवा दी. वह 1974 में केन्या में उच्चायुक्त भी रहे. वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य तथा दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे. उन्हें जनवरी 2002 में वायुसेना का मार्शल बनाया गया था.

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