सुनंदा मामला: थरूर, वरिष्ठ चिकित्सक से जरूरत पड़ने पर होगी पूछताछ

By: | Last Updated: Thursday, 3 July 2014 2:56 AM

नई दिल्ली: सुनंदा पुष्कर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेरबदल करने के लिए असफलतापूर्वक दबाव डालने का एम्स के एक वरिष्ठ फारेंसिक चिकित्सक द्वारा आरोप लगाये जाने की खबरों के बीच दिल्ली पुलिस ने आज कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह उनसे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर से पूछताछ करेगी.

 

दिल्ली पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी ने कहा, ‘‘भविष्य में इस मामले में क्या होगा मैं अभी आपको नहीं बता सकता लेकिन आपको यह बताना चाहूंगा कि मामले में जांच जारी है. जो भी जरूरी है वह किया जा रहा है. यदि डा. गुप्ता से पूछताछ करने की जरूरत पड़ी तो उनसे की जायेगी.’’ सुनंदा की संदिग्ध मौत मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब कल यह खबरें आयीं कि पोस्टमार्टम करने वाले तीन सदस्यीय दल का नेतृत्व करने वाले गुप्ता ने सेवा मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के समक्ष दाखिल एक हलफनामे में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़छाड़ करने के लिए उन पर दबाव डाला गया था.

 

उन्होंने कहा, ‘‘केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण :कैट: के समक्ष जो उन्होंने कथित तौर पर जो हलफनामा दाखिल किया है. यदि आवश्यकता पड़ी तो उसे रिकार्ड में लिया जायेगा. हम कानूनी स्थिति और सबूत की प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए हम जांच करेंगे.’’ विशेष तौर पर यह पूछे जाने पर कि क्या थरूर से भी पूछताछ की जाएगी, बस्सी ने कहा, ‘‘यदि वह जरूरी हुआ तो वह किया जाएगा.’’ दिल्ली पुलिस आयुक्त ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस निरीक्षक अतुल सूद के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल इस मामले की जांच कर रहा है. सुनंदा 17 जनवरी की रात दक्षिणी दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पायी गयी थी. इससे एक दिन पहले उनकी पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से ट्विटर पर नोंकझोंक हुई थी जिसका कारण था थरूर के साथ महिला पत्रकार के कथित संबंध.

 

अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत सुनंदा मामले में जांच प्रक्रिया शुरू की गयी है. इसके तहत यदि किसी महिला की विवाह के सात साल के भीतर मौत हो जाती है तो मौत की जांच सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट करता है.

 

पुलिस को एक रिपोर्ट में एसडीएम ने कहा था कि परिवार के किसी भी सदस्य ने मौत मामले में कोई साजिश का संदेह नहीं जताया था. यद्यपि उन्होंने दिल्ली पुलिस को इस मामले की जांच करने के लिए कहा था. एसडीएम ने ही सुनंदा के भाई, पुत्र और थरूर तथा उनके कर्मचारियों के बयान दर्ज किये थे.

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्था के डा. सुधीर गुप्ता ने अपने कथित आरोपों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से आज इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वह सक्षम अधिकारियों के समक्ष पहले ही तथ्य बता चुके हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. यह एक कानूनी मामला है. एक गंभीर मुद्दा है. मैं मीडिया के साथ साझा नहीं कर सकता. मैं सरकारी कर्मचारी हूं. मैं जो भी कहना चाहता था उसे मैं सही जगह बता चुका हूं.’’सुनंदा का पोस्टमार्टम करने वाले दल का नेतृत्व कर चुके डा. गुप्ता ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि उन पर इस बात का दबाव डाला गया कि मौत को स्वाभाविक बताया जाये, जिसका उन्होंने विरोध किया. आटोप्सी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि सुनंदा के हाथों पर करीब दर्जन भर चोट के निशान थे तथा उसके गाल पर खरोच का निशान है. इससे ‘‘भोथरे बल’’ के प्रयोग का संकेत मिलता है. साथ ही उसकी बायीं हथेली के किनारे पर ‘‘दांतों से काटने के गहरे निशान’’ थे. एम्स में आटोप्सी के बाद विसरा नमूनों को संरक्षित कर लिया गया और आगे के परीक्षणों के लिए सीएफएसएल (केन्द्रीय फारेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) भेजा गया.

 

पुलिस के अनुसार सीएफएसएल रिपोर्ट में दवा से विषाक्तता का संकेत था लेकिन उसके निष्कर्ष इतने निर्णायक नहीं थे कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा सके.

 

पुलिस रिपोर्ट का हिस्सा रहे तलाशी और जब्ती नोट में दो दवाओं एलप्राजोलम और एक्सेड्रिन का मिश्रण मिलने का उल्लेख है.

 

एसडीएम के जांच के निर्देश के बाद जांच 23 जनवरी को अपराध शाखा को सौंप दी गई थी. यद्यपि दो दिन बाद 25 जनवरी को मामले को दोबारा दक्षिण जिला पुलिस को सौंप दिया गया.

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