औरत के शरीर के अलावा भी कुछ देखा करो 'बाबा जी'!

sunny temple, women prohabited to worship

मुझे आज तक समझ नहीं आया कि मजहब इतना जल्दी खतरे में कैसे पड़ जाता है? इश्क से, अभिव्यक्ति से, कपड़े से, संगीत से, यहां तक की आजादी से भी धर्म इतना कमजोर है कि खतरे में पड़ जाता है. और इसे बचाने की जिम्मेदारी उठाने के लिए ‘सौदागर’ आ जाते हैं.

 

अब आप सोच रहे होंगे कि धर्म के ठेकेदारों को सौदागर क्यों कह रही हूं. अब इसे समझने के लिए ओह माई गॉड देखिए.. एक बात और … खैर.. छोड़िए फिलहाल खबर पढ़िए और सोचिएगा जरूर..

shingnapur

महाराष्ट्र के शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को 21वीं सदीं में भी 400 साल पुरानी परंपरा का पालन करना होगा. ”क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो बाबाओं की भावनाएं आहत होंगी’ . यहां महिलाओं को शनि मंदिर में शिला को तेल चढ़ाने का हक नहीं है. पिछले दिनों एक महिला ने शनिदेव की शिला पर तेल चढ़ा दिया जिससे इलाके में बवाल मच गया. मंदिर का शुद्धिकरण कराया गया. महिला पुलिस कर्मचारियों को मंदिर की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया.

 

पढ़ लिया आपने.. अब इसमें दो बातों पर ध्यान दीजिए. 1. मंदिर का शुद्धिकरण कराया गया. 2. महिलाओं पर पाबंदी

 

भैया शुद्धिकरण क्यों. क्या वह शरीर अपवित्र है जिससे तुम पैदा हुए हो? जिसके दूध का कर्ज इस जन्म नहीं उतार सकते. बताओ जिसके साथ आने वाले वंशज का ख्वाब देखते हो वह शरीर अपवित्र है कैसे? बताओ ना कि पवित्रता की पहचान तुम कैसे करते हो? बताओ भई.. मुझे समझ नहीं आता कि मैं अपवित्र क्यों हूं? मुझे पता है कि तुम्हें औरत के शरीर के भूगोल के अलावा कुछ नहीं दिखता है बाबा जी? कभी दिखेगा भी नहीं क्योंकि तुम दिवालिए हो.. ना..ना. आर्थिक नहीं मानसिक कमजोर हो तुम. धर्म का धंधा तो तुम्हारा चंगा चल ही रहा है.. दिखता है.. खैर.. दुआ करूंगी चलता रहे लेकिन अपनी ठेकेदारी हमारी स्वंतत्रता में बाधक ना बनाओ. वक्त बदल रहा है अपनी बीमार आंखों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा लो.. बहुत जरूरी है बाबा जी.. बहुत जरूरी..

अब जरा ये बताओ कि पाबंदी लगाने का फैसला कौन करेगा? क्या इस देश में दो संविधान चलेंगे?

 

घोड़ी हो गयी है, कबड्डी खेल रही है! कल से निकलो तुम घर से बाहर तो पैर तोड़कर हाथ में दे दूंगी. ऐसी डांट हमारे पूर्वांचल में हर घर में दादी लड़कियों को देती हैं. बेटों को बाहर खेलने की आजादी और हमें ये डांट. हमें बहुत प्यार से इसकी आदत हो चुकी है. इज्जत की ठेकेदारी सिर्फ हमारे कंधे पर है, हमें पता होता है. भ्रूण हत्या, छेड़छाड़, कार्य स्थल पर यौन शोषण, घरेलू उत्पीड़न, बलात्कार, आर्थिक परनिर्भरता, इन सारी समस्याओं से जूझ रही आधी आबादी को इनका समाधान खुद निकालना होगा.

 

इसलिए उन 400 महिलाओं का हौसला बढ़ाएं जो इस जर-जर 400 साल पुरानी सड़ी परंपरा को खुलेआम चुनौती दे रही हैं जो कल इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश करेंगी. ये वक्त है ना सिर्फ महिलाओं के लिए बल्कि किसी भी समुदाय को समाज में बराबरी का दर्जा देने का.

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Web Title: sunny temple, women prohabited to worship
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