गुजरात: रेप के बाद 25 हफ्ते की प्रेग्नेंट बालिका का शुरु हुआ गर्भपात

By: | Last Updated: Friday, 31 July 2015 8:27 AM

नई दिल्ली: बीस हफ्ते से भी अधिक के गर्भ के बावजूद रेप पीड़ित नाबालिग लड़की के गर्भपात की प्रक्रिया अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में शुरु हुई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में इसी मंगलवार को इस बात की इजाजत लड़की के परिवार वालों को दी.

 

आपको बता दें कि सामान्य परिस्थितियों में गर्भ धारण के बीस हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं दी जाती है. अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में बुधवार से ही नाबालिग लड़की की जांच की प्रक्रिया चल रही है.

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार के अपने आदेश में कहा था कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम इस बात की जांच करे कि गर्भ धारण किये हुए पचीस हफ्ते बीत जाने के बाद अगर लड़की का गर्भपात किया गया, तो इससे उसकी जान पर तो नहीं बन आएगी.

 

ऐसे में सिविल हॉस्पिटल के पांच डॉक्टरों की टीम ने बुधवार की शाम से जांच की प्रक्रिया शुरु की. इस दौरान लड़की के स्वास्थ्य की सामान्य जांच करने के साथ ही उसकी सोनोग्राफी भी की गई.

 

इसके बाद डॉक्टरों ने ये राय दी कि लड़की का गर्भपात किया जा सकता है, हालांकि लड़की रेप और उसके कारण हुए गर्भाधान से मानसिक तौर पर काफी परेशान है.

 

गर्भपात की प्रक्रिया के बाद डॉक्टर किशोरी के भ्रूण का डीएनए नमूना भी हासिल करेंगे, ताकि  इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ पुख्ता मामला बनाया जा सके. गर्भपात की प्रक्रिया के तहत पहले इंजेक्शन के इस्तेमाल से ही गर्भ गिराने की कोशिश की जा रही है, अगर इसमें कामयाबी नहीं मिली तो डॉक्टर ऑपरेशन का रास्ता अख्तियार करेंगे.

 

लड़की के परिवार वालों को गर्भपात की इजाजत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा. दरअसल जिला अदालत और गुजरात हाईकोर्ट ने ये इजाजत देने से ये कहते हुए इंकार कर दिया था कि बीस हफ्ते से उपर के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं दी जा सकती, क्योंकि ये नियमों के खिलाफ होगा. ऐसे में पीड़ित लड़की के परिवार वालों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा ये कहकर खटखटाया कि अगर लड़की का गर्भ बना रहा, तो उसकी जान जा सकती है, क्योंकि एक तो उम्र कम है और दूसरा ये कि उसकी सेहत ठीक नहीं.

 

गुजरात के साबरकांठा जिले के घ़ड़ी गांव की निवासी चौदह साल की मासूम पर राणासर गांव में ही प्रैक्टिस करने वाले जतिन मेहता नामक चिकित्सक ने बलात्कार किया. लड़की टायफायड की दवा लेने डॉक्टर के पास गई थी, इसी दौरान इलाज की जगह डॉक्टर ने दुष्कर्म कर डाला. रेप के कारण ही लड़की गर्भवती हो गई और ऐसे में लड़की के परिवार वालों ने 29 जून को साबरकांठा जिले के तलोद थाने में चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसके बाद आरोपी की गिफ्तारी हुई.

 

गुजरात में अपनी तरह का ये पहला मामला है, जहां पर पचीस हफ्ते से भी अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत मिली है. नियमों के मुताबिक, असाध्य स्वास्थ्य परिस्थितियों में ही बीस हफ्ते से उपर के गर्भ को गिराने की इजाजत दी जाती है. ऐसे में सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पहले तो बारीकी से लड़की की जांच की है और उसके बाद सबसे सुरक्षित तरीका अख्तियार करते हुए उसके गर्भपात की प्रक्रिया शुरु की है.

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Web Title: Supreme Court
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