क्या अब बहुमत का फैसला सदन की बजाय सुप्रीम कोर्ट में होगा?

By: | Last Updated: Tuesday, 28 October 2014 10:45 AM

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. जब उपराज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति ने सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने के मुद्दे पर हरी झंडी दे दी है तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि मौजूदा हालत में बीजेपी अपनी सरकार कैसे बना सकती है ? सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल के बाद एक बड़ा संवैधानिक सवाल उठ खड़ा हुआ है.

 

क्या अब बहुमत का फैसला सदन की बजाय सुप्रीम कोर्ट में होगा ?

 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-एलजी से पूछा, सरकार कैसे बनेगी? वेंकैया नायडू ने कहा- बीजेपी चुनाव के लिए तैयार 

इस सवाल के तमाम पहलुओं की पड़ताल से पहले आपको बताते हैं कि दिल्ली में नये सिरे से चनाव कराने की मांग करने वाली अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में क्या कुछ हुआ ?

 

केंद्र की तरफ से अदालत में पेश अटॉर्नी सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि राष्ट्रपति ने उपराज्यपाल को इस बात की मंजूरी दे दी है कि वह सरकार बनाने के लिए सबसे बड़ी पार्टी को निमंत्रण दें.

 

इसके जवाब में आप के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि बीजेपी के 28 विधायक हैं और अगर वो तीनों उपचनाव जीत भी लेती है तब भी उसके पास 31 विधायक ही होंगे. ऐसे में सरकार नहीं बन सकती है.

 

इसके बाद चीफ जस्टिस एच एल दत्तू की अध्यक्षता पांच पांच जजों की पीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि मौजूदा हालत में आखिर दिल्ली में सरकार कैसे बनेगी ? सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पिछले 8 महीने से लंबित है लेकिन सरकार ने अबतक फैसला नहीं लिया. किसी . दिल्ली में सरकार के गठन या चुनाव को लेकर सरकार ने अबतक फैसला क्यों नहीं लिया ? लोकतंत्र में राष्ट्रपति शासन विकल्प नहीं हो सकता है.

 

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े तेवर के जवाब में अटॉर्नी सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि अदालत को ये सोचना होगा कि क्या वो उपराज्यपाल को निर्देश दे सकती है या नहीं ? सुनवाई के दौरान आगे सरकार के वकील के के वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार गठन का फैसला राष्ट्रपति या उपराज्यपाल का विशेषाधिकार होता है. वो फैसला कितने दिन मे ले या क्या ले, इसपर अदालत कोई आदेश नहीं दे सकती है.

 

चीफ जस्टिस एच एल दत्तू की पीठ ने इस पर कुछ नहीं कहा लेकिन आप के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार चुनना लोगों का संवैधानिक हक जबकि सरकार जानबूझकर मामले को खींच रही. लिहाजा अदालत को इसमें जरुर दखल देना चाहिए.

 

चीफ जस्टिस एच एल दत्तू की पीठ ने इस टिप्पणी पर भी कुछ नहीं कहा और मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को करने का फैसला ले लिया .

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Web Title: supreme court
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