जब पत्नी मुसीबत में हो तो तलाक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 4 December 2015 7:50 AM
Supreme Court refuses divorce when wife ill

नई दिल्ली: जब पत्नी मुसीबत में हो तो उसकी मदद पति का फ़र्ज़ है. ऐसे मौके पर पति को तलाक की इजाज़त नहीं दी जा सकती. ये कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में तलाक की इजाज़त देने से मना कर दिया है.

 

अपनी तरह के इस अनोखे मामले में पति और पत्नी दोनों ही तलाक के लिए सहमत थे. दोनों के बीच पत्नी को गुज़ारे के लिए 12 लाख 50 हज़ार की रकम दिए जाने पर सहमति बनी थी. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली की पत्नी को स्तन कैंसर है, उसने तलाक की इजाज़त देने से मना कर दिया.

 

आमतौर पर तलाक का फैसला सुप्रीम कोर्ट में नहीं होता. इस मामले में भी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा इसलिए खटखटाया था क्योंकि वो पति की तरफ से मुंबई में दाखिल तलाक के मुकदमे को हैदराबाद ट्रांसफर कराना चाहती थी. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने समझौते की मंशा जताई.

 

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को मध्यस्थता केंद्र भेज दिया. यहां, 12 लाख 50 हज़ार रूपये के एवज़ में पत्नी ने भी तलाक पर सहमति जता दी. सहमति का ये फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया. सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में इस पर सहमति जताई. लेकिन, जैसे ही अदालत को इस बात की जानकारी मिली कि पत्नी को स्तन कैंसर है, सारी कार्रवाई ही उलट गई.

 

दो जजों की बेंच की अध्यक्ष जस्टिस एम वाई इकबाल ने तलाक की इजाज़त देने से मना करते हुए कहा है, “हिन्दू धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना जाता है. पत्नी अपना सब कुछ छोड़ कर पति के घर को अपना लेती है. उसके लिए पति का दर्जा भगवान का होता है.”

 

जस्टिस इकबाल ने अपने फैसले में आगे लिखा है, “हिन्दू विवाह से जुड़े कानूनों में पति का भी ये दायित्व बताया गया है कि वो न सिर्फ अपनी पत्नी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करे बल्कि उसकी हर मुसीबत से रक्षा करे.”

 

फैसले के मुताबिक, “पत्नी ने तलाक के लिए सहमति जताई है. लेकिन इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि अपने इलाज के लिए भारी रकम की ज़रूरत को देखते हुए उसने ऐसा किया हो. पत्नी का इलाज करवाना पति का दायित्व है. ऐसा काम जो उसे करना ही चाहिए, उसे कर देना तलाक का आधार नहीं हो सकता.”

 

कोर्ट ने मामले को हैदराबाद फैमिली कोर्ट में ट्रांसफर करते हुए साफ़ किया है कि पहले पत्नी का इलाज करवाया जाए और इसके लिए पति 5 लाख रुपये की रकम दे. पत्नी के स्वस्थ होने के बाद ही तलाक के मामले की सुनवाई हो.

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Web Title: Supreme Court refuses divorce when wife ill
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