अंत्येष्टि के लिए देशभर में सीएनजी या बिजली का हो उपयोग : सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Thursday, 4 February 2016 10:02 AM
supreme court said there is need to work on cremation process

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) शवदाह के लिए पर्यावरण के अनुकूल जिस ग्रीन टेक्नॉलजी के इस्तेमाल की तलाश कर रहा है, उसे न सिर्फ ताजमहल के पास के अंत्येष्टि स्थल पर बल्कि पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.

सीपीसीबी के वकील विजय पंजवानी ने अदालत से कहा था कि प्रदूषण नियंत्रण निकाय पहले ही अंत्येष्टि स्थलों पर कार्बन उत्सर्जन घटाने के मकसद से ग्रीन टेक्नॉलजी के लिए दिल्ली, कानपुर और खड़गपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) से संपर्क कर चुका है.

पंजवानी ने शीर्ष अदालत को बताया कि सीपीसीबी अभी ऐसी प्रौद्योगिकी नहीं खोज सका है जो प्रदूषण रहित हो या जो खुले अंत्येष्टि स्थल पर लकड़ी से होने वाले शवदाह के दौरान कार्बन उत्सर्जन को कम कर सके. उन्होंने कहा कि सीपीसीबी के वैज्ञानिक खुले अंत्येष्टि स्थल पर लकड़ी से होने वाले शवदाह का कोई पर्यावरण अनुकूल विकल्प दे पाने के साधनों से संपन्न नहीं हैं.

सीपीसीबी ने यह जवाब अदालत के 14 दिसंबर 2015 के उस निर्देश पर दिया जिसमें उससे कहा गया था कि वह शवदाह के विभिन्न आधुनिक और वैज्ञानिक विकल्पों से अदालत को अवगत कराए.

अदालत ने सीपीसीबी से मामले का परीक्षण कर अपने प्रस्तावों को पेश करने के लिए कहा.

शीर्ष अदालत ने 14 दिसंबर को यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ के उस पत्र पर दिया था जिसमें उन्होंने ताजमहल को कार्बन उत्सर्जन से बचाने के लिए शीर्ष अदालत से दखल देने का आग्रह किया था.

कुरियन ने बीते साल ताजमहल की यात्रा के दौरान पाया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर से महज तीन सौ मीटर दूर अंत्येष्टि स्थल से निकलने वाले धुएं ने इसको नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने इस सिलसिले में शीर्ष अदालत को पहली अक्टूबर 2015 को पत्र लिखा था.

शुरू में शीर्ष अदालत ने यह विचार रखा कि या तो अंत्येष्टि स्थल को यहां से हटा दिया जाए या फिर लकड़ी से शवदाह के बजाए बिजली से शवदाह कराया जाए. लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन दोनों ही विकल्पों को अपनाने में असमर्थता जताई थी. अदालत को बताया गया कि लोग आस्था की वजह से परंपरागत लकड़ी से शवदाह को तरजीह देते हैं.

इस पर अदालत ने सीपीसीबी और उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि ऐसी ग्रीन टेक्नॉलजी के बारे में सोचें जो कार्बन उत्सर्जन को अगर खत्म न कर सके तो कम से कम इसे घटा ही सके. अदालत ने अधिकारियों से कहा था कि वे बिजली से शवदाह के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें और इसके लिए उनसे शुल्क न लें.

इसी बीच, शीर्ष अदालत ने ताजमहल के लिए ग्रेनाइट के बजाए लाल बलुआ पत्थर से तीन रास्ते बनाने पर सहमति दी है.

 

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Web Title: supreme court said there is need to work on cremation process
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