ऐसी योजनायें नहीं बनायें जिन्हें आप लागू नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 30 January 2015 4:45 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को अवासीय सुविधा प्रदान करने के लिये ‘बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना’ पर धीमी रफ्तार से अमल के लिये आज केन्द्र सरकार को आड़े हाथ लिया.

 

कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार को ऐसी योजनायें नहीं बनानी चाहिए जिन्हें लागू नहीं किया जा सकता हो. इस योजना का उद्देश्य माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जाति के छात्र छात्राआं को आवासीय सुविधा मुहैया कराना है. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की खंडपीठ ने एबीवीपी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार को आड़े हाथ लिया.

 

कोर्ट ने देश में शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रावासों की दयनीय स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि इनमें से अधिकतर में न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यह योजना आपने :केन्द्र: तैयार की थी. हमने इसे तैयार नहीं किया था. अगर आप अमल नहीं कर सकते तो फिर ऐसी योजना नहीं बतायें.’

 

जनहित याचिका में अनुसूचित जाति और जनजातियों के छात्रों के लिये छत्रावास की कमी की ओर कोर्ट का ध्यान आकषिर्त किया गया है. कोर्ट ने 2008 की इस योजना को लेकर उत्पन्न समस्या के लिये केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये केन्द्र को इस योजना के तहत निर्माणाधीन छात्रावासों की स्थिति के बारे में राज्य सरकारों के साथ मिलकर सर्वेक्षण करने और प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

 

कोर्ट ने इस योजना के तहत छात्रावासों के निर्माण का काम तेज करने का निर्देश देते हुये जनहित याचिका पर सुनवाई 20 जुलाई के लिये स्थगित कर दी.

 

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी एस नरसिम्हा ने तर्क दिया कि इस मामले में केन्द्र की भूमिका सिर्फ निगरानी करने तक सीमित है. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकता है.

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