सुप्रीम कोर्ट ने महिला, उसके प्रेमी की मौत की सजा बरकरार रखी

By: | Last Updated: Saturday, 16 May 2015 3:02 AM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक युवती और उसके प्रेमी की युवती के परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में सुनायी गयी मौत की सजा को यह कहते हुए बरकरार रखा कि कई हत्याओं का ‘चौंकाने वाला’ कृत्य ‘दीवानगी’ से प्रभावित था.

 

प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति अरूण मिश्र की पीठ ने परिवार के 10 महीने के बच्चे सहित सात सदस्यों की धारदार हथियार से हत्या करने की घटना को ‘दुर्लभतम’ करार देते हुए कहा कि दोषियों ने ‘किसी पछतावे का प्रदर्शन नहीं किया है’ और इसकी ‘कम संभावना है’ कि उनमें सुधार होगा और वे भविष्य में किसी अपराध में लिप्त नहीं होंगे.

 

न्यायालय ने दोषियों सलीम और शबनम की याचिका को खारिज कर दिया था जो उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 2013 में सुनायी गयी सजा के खिलाफ दायर की थी. न्यायालय ने आज औपचारिक रूप से फैसला सुना दिया.

 

पीठ ने कहा, ‘‘..एक शिक्षित और सभ्य समाज में एक पुत्री परिवार में बहुमुखी एवं जरूरी भूमिका निभाती है, विशेष तौर पर अपने अभिभावकों के प्रति. वह देखभाल करने वाली, एक सहायक, एक सौम्य हाथ और एक जिम्मेदार आवाज होती है. वह हमारे समाज के पोषित मूल्यों की प्रतीक होती है जिस पर अभिभावक आंख मूंदकर भरोसा और विश्वास करते हैं.’’

 

15 अप्रैल 2008 को शबनम के पूरे परिवार की हत्या कर दी गयी थी और उसने शुरू मे बहाना किया था कि अमरोहा जिले में स्थित उसके घर पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था.

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Web Title: supreme court upholds the death sentence judgement on woman and lover
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