दिल्ली सरकार के विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका

By: | Last Updated: Tuesday, 14 July 2015 1:53 PM

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है. ये याचिका एनजीओ कॉमन कॉज़ की तरफ से दाखिल की गई है. कॉमन कॉज़ की ही याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी खर्चे पर नेताओं का महिमामंडन न करने का फैसला दिया था.

 

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के विज्ञापनों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस नेता अजय माकन की याचिका को सुप्रीम कोर्ट सुनने से मना कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने अजय माकन को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी.

 

लेकिन ये एक अवमानना याचिका है जो मामले के मूल याचिकाकर्ता की तरफ से दाखिल की गई है. ऐसे में संभव है कि सुप्रीम कोर्ट कॉमन कॉज़ की अर्ज़ी पर सुनवाई करे. वकील प्रशांत भूषण के ज़रिये दाखिल अवमानना याचिका में कॉमन कॉज़ ने सीएम केजरीवाल का गुणगान करने वाले दिल्ली सरकार के विज्ञापनों का हवाला दिया है. याचिका में कहा गया है कि ये विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन करते हैं.

 

अदालत ने साफ़ तौर पर कहा था कि सरकारी खर्चे पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों का मकसद लोगों तक ज़रूरी जानकारी पहुँचाना है. इनका इस्तेमाल किसी नेता की छवि चमकाने के लिए नहीं किया जा सकता.

 

याचिका के मुताबिक दिल्ली सरकार इस तरह से विज्ञापन कर रही है जैसे कोई पार्टी चुनाव अभियान चला रही हो. सरकारी पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक दल के फायदे के लिए न करने के आदेश का भी ये उल्लंघन है.

 

याचिका में तमिलनाडु सरकार के ऊपर भी अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है. याचिका में बताया गया है कि राज्य में एआईडीएमके सरकार के 4 साल पूरे होने पर सरकार ने मुख्यमंत्री जयललिता की तस्वीर के साथ अखबारों में विज्ञापन छपवाए.

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