सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 627 कालेधन खाताधारकों की लिस्ट

By: | Last Updated: Wednesday, 29 October 2014 1:28 AM

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कालाधन मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उन भारतीयों के नामों की सूची पेश की जिनके विदेशी बैंकों में खाते हैं. केंद्र ने करीब 627 लोगों के नामों की सूची सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी.

लेकिन काले धन पर देश आज जिस बड़े खुलासे का इंतजार कर रहा था वो नहीं हुआ. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को 627 उन लोगों के नाम सुप्रीम कोर्ट को दिए जिनके स्विस बैंक में अकाउंट हैं. अभी तक ये साफ नहीं हैं कि जितने नाम हैं उन सबका काला धन है या नहीं.

 

लिफाफा खोलने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

 

सुप्रीम कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे को खोलने से इंकार करते हुए कहा कि दस्तावेज विशेष जांच दल के समक्ष पेश किए जाएं. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ विशेष जांच दल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ही खाताधारकों के नामों वाला सीलबंद लिफाफा खोल सकते हैं.

 

कोर्ट ने विशेष जांच दल से नवंबर के आखिर तक जांच के संबंध में स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कालाधन मुद्दे पर आगे की जाने वाली कार्रवाई का फैसला विशेष जांच दल करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दूसरे देशों के साथ हुई विभिन्न संधियों के संबंध में अपनी शिकायतें विशेष जांच दल के आगे रखने की अनुमति दी.

 

रकार ने सुप्रीम कोर्ट को 627 उन लोगों के नाम सुप्रीम कोर्ट को दिए जिनके स्विस बैंक में अकाउंट हैं. अभी तक ये साफ नहीं हैं कि जितने नाम हैं उन सबका काला धन है या नहीं.

 

लिफाफा एसआईटी को सौंपा गया है जिसके पास जून से ही नाम हैं. नवंबर में एसआईटी सुप्रीम कोर्ट को नाम देगी तब तक नाम गुप्त रहेंगे. ये भी पता नहीं चलेगा कि इन लोगों का कितना पैसे स्विस बैंक में जमा है.

 

 

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी का जवाब

सरकार को वकील अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि लिस्ट में शामिल लोगों के नाम सरकार नहीं बता सकती है. इस लिस्ट में आधे नाम भारतीय नागरिकों के हैं और आधे NRI हैं.

 

रोहतगी ने कहा, कि फ्रांस की सरकार ने यह लिस्ट 2011 में ही सौंप दी थी. हमने लिस्ट सौंपने को लेकर कोर्ट में संधि का हवाला भी दिया. हालांकि हमारी सरकार 27 जून को ही ये नाम कोर्ट में बता चुकी थी.

 

सरकार के वकील अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने ये बताने से मना कर दिया कि नाम किस-किसके हैं. बड़ा सवाल ये भी था कि किसी नेता का नाम है या नहीं, मुकुल रोहतगी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. ये जरूर कहा कि आधे नाम भारतीय नागरिकों के हैं और आधे एनआरआई के हैं. एनआरआई इनकम टैक्स कानून के दायरे में नहीं आते हैं. इसका मतलब ये हुआ कि 627 में से आधे लोगों की जांच ही नहीं हो पाएगी.

 

केन्द्र सरकार के रूख को अस्वीकार करते हुये सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केन्द्र को निर्देश दिया कि बुधवार तक विदेशों में काला धन रखने वाले सभी खाता धारकों के नाम सीलबंद लिफाफे में पेश किये जायें. न्यायालय ने इस मसले पर सरकार की अनिच्छा को लेकर उसे आड़े हाथ लिया था.

 

कल क्या हुआ था?

नाम बताने में ऐतराज नहीं: जेटली

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि विदेशी बैंक में खाता रखने वाले भारतीय नागरिकों के नाम सर्वोच्च न्यायालय को सौंपने में सरकार को कोई ऐतराज नहीं है. जेटली ने कहा कि सरकार के पास इस मामले में जितने भी नाम हैं, सरकार उन्हें बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय को सौंप देगी.

 

उन्होंने कहा कि सरकार ने 27 जून को विशेष जांच एजेंसी (एसआईटी) को सभी नाम सौंप दिए थे, तो फिर सर्वोच्च न्यायालय को नाम सौंपने में क्या आपत्ति हो सकती है.

 

जेटली ने कहा कि सरकार चाहती है कि इन सभी नामों पर हर तरीके से जांच हो. उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार चाहती है कि ये सब इस तरह से हो कि जिन देशों से हमें मदद मिल रही है, वह मिलती रहे.

 

कोर्ट की फटकार

शीर्ष अदालत ने विदेशों में काला धन जमा करने वालों के सारे नामों के खुलासे संबंधी न्यायालय की पहले के आदेश में संशोधन का अनुरोध करने पर नई सरकार को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि संप्रग सरकार ने इस आदेश को स्वीकार किया था.

 

प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, ‘‘विदेशों में बैंक खाते रखने वाले लोगों को वह बचाने का प्रयास क्यों कर रही है? आप ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षा आवरण क्यों प्रदान कर रहे हैं?’’ प्रधान न्यायाधीश ने सरकार के इस रवैये पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘सॉलिसिटर जनरल की उपस्थिति में खुली अदालत में आदेश पारित किया गया था और अब नयी सरकार इसमें संशोधन का अनुरोध नहीं कर सकती. हम अपने आदेश को नहीं छुयेंगे और हम इसमें एक शब्द भी नहीं बदलेंगे.’’ न्यायालय ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी का यह तर्क अस्वीकार कर दिया कि बैंक खातों की अवैधता के मामले की जांच के बाद वह इन नामों का खुलासा करेगी. न्यायालय ने सरकार से कहा कि उसे इस मामले में कुछ करने की नहीं बल्कि सारी जानकारी उसे मुहैया कराने की आवश्यकता है और न्यायालय विशेष जांच दल या सीबीआई सहित दूसरी एजेन्सियों को जांच का निर्देश देगा.

 

इस मामले में आधे घंटे की सुनवाई के अंत में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार को जर्मनी जैसे कई देशों से 500 खाता धारकों के नाम मिले हैं.

 

प्रधान न्यायाधीश ने केन्द्र सरकार से कहा कि उसे खुद किसी भी प्रकार की जांच नहीं करनी है क्योंकि यदि उसने ऐसा किया तो यह उनके जीवनकाल में कभी भी पूरी नहीं होगी. न्यायमूर्ति दत्तू ने कहा, ‘‘आपको कुछ भी नहीं करना है. सिर्फ खाता धारकों की सूचना हमें प्रेषित कीजिये और हम आगे जांच के लिये आदेश देंगे. हम काला धन वापस लाने का मसला सरकार पर नहीं छोड़ सकते हैं. यह हमारे जीवन काल के दौरान नहीं होगा.’’ कोर्ट ने अटार्नी जनरल की इस दलील को दरकिनार कर दिया कि खाता धारकों के नामों के खुलासे से उन लोगों के निजता के अधिकार का हनन होगा जिनके वैध खाते हैं. सरकार का कहना था कि पहली नजर में कर चोरी का मामला बनने के बाद नाम सार्वजनिक किये जा सकते हैं.

 

इस पर न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘आपको इन लोगों (विदेशी बैंकों में खाता रखने वाले) के हित का ध्यान नहीं रखना है. विशेष जांच दल इसे देखेगी.’’ इसके साथ ही कोर्ट ने सारे नाम कल तक पेश करने का निर्देश सरकार को दिया.

 

कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि एक दो या तीन खाते धारकों के नाम नहीं बल्कि दूसरे मूल्कों द्वारा मुहैया करायी गई पूरी सूची पेश की जाये.

 

अटार्नी जनरल ने सभी खाता धारकों के नाम उजागर करने से देश में काला धन वापस लाने के सरकार के प्रयासों पर प्रतिकूल असर पडने के बारे में कोर्ट को संतुष्ट करने का प्रयास किया. उनका कहना था कि हो सकता है कि दूसरे देश अपने यहां ऐसे खातों के बारे में आगे जानकारी नहीं दें. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल सांविधिक संस्था नही है जो खाता धारकों को नोटिस जारी कर सकती हो. उनका कहना था कि यह काम सिर्फ आय कर विभाग ही कर सकता है. उन्होंने कहा कि सारी जानकारी विशेष जांच दल को पहले ही मुहैया करायी जा चुकी है.

 

लेकिन कोर्ट उनकी इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ और कहा, ‘‘हम दूसरे देशों द्वारा आपको मुहैया कराये गये नाम चाहते हैं. यह सूचना हमे दीजिये. आप हमे सूचना दीजिये. हम इस मामले की निगरानी कर रहे हैं. इसलिए हमें जानकारी दीजिये और हम इसे विशेष जांच दल को सौंप देंगे. विशेष जांच दल मामले को अंतिम निष्कर्ष तक ले जायेगा.’’ न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘आप जांच की जहमत क्यों उठाते हैं. सारी जानकारी विशेष जांच दल को दीजिये जो जांच करेगी.’’ साथ ही न्यायालय ने टिप्पणी की कि विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा काले धन को लेकर उसको भी चिंता है.

 

रोहतगी ने कहा कि सरकार ने खाता धारकों के बारे में मिली सूचना की गोपनीयता बनाये रखने का आश्वासन दिया था और यदि इसका खुलासा किया गया तो फिर सरकार को इस मसले पर भविष्य में आंकड़े साझा करने के लिये दूसरे देशों के साथ संधि करने में दिक्कत आ सकती है. इस पर न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘ऐसा आश्वासन मत दीजिये. हम नहीं चाहते थे कि देश का पैसा बाहर जाये. हमने काला धन वापस लाने के लिये विशेष जांच दल गठित किया है तो सरकार को उसके साथ सहयोग करना चाहिए.’’ न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति (संधि करने के बारे में) सामने आयेगी तो हम देखेंगे.

 

शीर्ष अदालत में आठ नये नामों का खुलासा करने के एक दिन बाद केन्द्र ने कहा कि सभी खाता धारकों के नाम उस समय तक उजागर नहीं किये जा सकते जब तक कि कुछ गड़बडी किये जाने के बारे में पहली नजर में साक्ष्य नहीं हों.

 

सरकार ने सोमवार को न्यायालय में डाबर इंडिया प्रवर्तकों में से एक प्रदीप बर्मन, राजकोट स्थिति सर्राफा कारोबारी पंकज चमनलाल लोढ़िया और गोवा की खनिज कंपनी टिंब्लो प्रा लि और उसके पांच निर्देशकों के नामों का खुलासा किया था.क

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