खास रिपोर्ट: CCTV कैमरों के जाल ने सूरत में गिराया क्राइम का ग्राफ़

By: | Last Updated: Sunday, 28 June 2015 5:18 AM

सूरत: हीरे और कपड़े के शहर के तौर पर पूरी दुनिया में मशहूर शहर सूरत सुरक्षा के लिहाज से भी हुए एक बेहतर प्रयोग के लिए अब जाना जा रहा है. सूरत पुलिस ने यहां के लोगों की मदद से यानी पब्लिक-पाइवेट पार्टनरशीप के तहत एक ऐसी खास सीसीटीवी परियोजना को लागू किया है, जिससे न सिर्फ अपराध पर काबू पाने में मदद मिली है, बल्कि शहर ज्यादा सुरक्षित भी हो गया है.

 

गुजरात के दक्षिणी हिस्से में मौजूद शहर सूरत की आबादी 55 लाख से अधिक है. क़रीब 326 वर्गकिलोमीटर में फैले सूरत शहर की आबादी का चालीस फीसदी से भी अधिक हिस्सा गुजरात के बाहर से आये लोगों का है.

 

शहर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि अब ये न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले चार शहरों में से एक हो गया है. शहर की ये बढ़ोतरी और यहां की समृद्धि सुरक्षा के लिहाज से भी चुनौती बढ़ा देती है. इसी के मद्देनजर यहां लागू की गई वो परियोजना, जिसकी निशानी शहर के हर व्यस्त चौराहे और प्रवेश-निकास के रास्ते पर दिखती है अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों की तैनाती के तौर पर.

 

सूरत पुलिस ने सेफ सिटी सूरत की मुहिम के तहत 2012 में सीसीटीवी का अत्याधुनिक नेटवर्क खड़ा करने की सोची, जिसमें मदद के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी और उद्यमी सामने आए. दरअसल उन्हें ये बात समझ में आई कि अगर शहर को आतंकवादी हमलों से बचाना है, तो इस तरह का नेटवर्क काफी जरुरी है. नतीजा ये रहा कि जनवरी 2013 में 23 स्थानों पर तैनात एक सौ चार कैमरों से आगे बढ़कर ये योजना महज ढाई वर्ष में 109 स्थानों पर तैनात किये गये 604 अत्याधुनिक कैमरों की हो चुकी है.

WATCH: CCTV कैमरों ने सूरत में गिराया क्राइम का ग्राफ़ 

सीसीटीवी कैमरों की तैनाती का क्या फायदा है, इसकी झलक मिलती है सूरत पुलिस कमिश्नरेट के अंदर बने इस अत्याधुनिक कमांड और कंट्रोल सेंटर के अंदर. करीब 280 वर्ग फीट की एलईडी स्क्रीन पर इन कैमरों से रियल टाइम पर खीची जा रही तस्वीरें फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिये आ रही हैं, 12 एमबीपीएस की स्पीड के साथ. तस्वीरें इतनी साफ कि इसकी जद में आए हर आदमी या वाहन की पहचान की जा सकती है. ऐसा संभव हो पाया है सर्वश्रेष्ठ तकनीक के इस्तेमाल के कारण.

 

दरअसल सूरत के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की अगुआई में तैयार किये गये इस सीसीटीवी नेटवर्क का इस्तेमाल महज सामान्य किस्म की निगरानी के लिए नहीं है, बल्कि इसके जरिये अपराध को रोकने या फिर अपराधियों को पकड़ने  में मदद मिल रही है. वीडियो मैनेजमेंट सिस्टम के अलावा ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकोग्निशन, फेशियल रिकोग्निशन और ऑटोमेटिक स्पीड डिटेक्शन तकनीक भी इस कमांड और कंट्रोल सेंटर में मुहैया है. साथ में शहर की जीआईएस मैपिंग, यानी हर गली और मकान की लोकेशन.

 

इसकी वजह से कही भी अपराध होने पर नजदीकी कैमरे के जरिये हालात की समीक्षा कर उचित कार्रवाई की जा सकती है. इन सबका नतीजा ये है कि न सिर्फ अपराधी पकड़े जा रहे हैं, बल्कि अपराध का ग्राफ भी उन इलाकों में गिरा है, जहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. सूरत पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी वाले इलाकों में पहले के मुकाबले 27 फीसदी कम अपराध हुए हैं. दरअसल ये कैमरे, दिन हो या रात, चौबीस घंटे आसपास के इलाके की साफ तस्वीरें उतारते रहते हैं, 2 मेगा पिक्सेल हाईडिफिनिशन तकनीक से लैस होकर.

 

अभी तक इस सेफ सिटी सूरत परियोजना पर 33 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, जिसका बड़ा हिस्सा सूरत के लोगों की तरफ से दिया गया है. पीपीपी माडल होने की वजह से सामान्य सरकारी योजनाओं के मुकाबले ये परियोजना तेजी से बढ़ी है. इरादा अगले पांच वर्षों में शहर में कुल पांच हजार कैमरों का जाल बिछाने की है, ताकि पुलिसकर्मी शहर की सड़कों पर खड़ा होने की जगह इस सिस्टम के जरिये अपराध पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं, कुछ वैसा ही जैसा लंदन में है.

 

 

ट्रैफिक के मामले में भी फर्क दिखना शुरु हो गया है. सामान्य तौर पर लोग नियमों का उल्लंघन करने से डरते हैं और अगर किया तो घर पर ई-चालान पहुंच जाता है इस सिस्टम से हासिल हुई तस्वीरों के आधार पर. हालांकि इस परियोजना का इस्तेमाल सिर्फ पुलिसिंग के लिए नहीं है, बल्कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या किसी बड़ी दुर्घटना की हालत में बाकी तमाम विभाग और एजेंसियां भी इसकी मदद ले सकती हैं हालात पर काबू पाने के लिए.

 

इस सिस्टम के सहारे पुलिस अपराधियों को पकड़ रही है, अपराधों को होने से रोक रही है. जाहिर है, इसके लिए चौबीस घंटे ये कमांड सेंटर काम करता है. यहां तैनात पुलिसकर्मी शहर के चप्पे-चप्पे पर इसके जरिये निगाह रखते हैं और जरूरी कदम उठाते हैं. अगर कोई कैमरा खराब हो जाता है, तो उसकी सूचना भी कंट्रोल रुम में खुद एलर्ट के तौर पर आ जाती है.

 

यही नहीं, सिस्टम की खासियत ये है कि अगर किसी व्यस्त चौराहे पर कोई बैग लंबे समय से लावारिस पड़ा हो या फिर किसी संवेदनशील जगह पर बड़े पैमाने पर लोग इकट्ठा हो जाएं, तो उसका भी एलर्ट ये खुद जारी कर देता है. ये सब कुछ संभव हुआ है इस सिस्टम की रिलाएबिलीटी के कारण. जब से ये सेंटर चालू हुआ है, एक मिनट के लिए भी ये खराब नहीं हुआ. इसी वजह से सूरत के इस सेंटर और सीसीटीवी प्रोजेक्ट को देखने और अपने यहाँ लागू करने के लिए कई राज्यों के अधिकारी आ चुके हैं, साथ ही इस प्रोजेक्ट को मिल चुके हैं दर्जनों अवार्ड.

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