गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने पर जोर दिया सुषमा स्वराज ने

By: | Last Updated: Sunday, 7 December 2014 4:08 PM

नई दिल्ली: भगवत गीता को केंद्र द्वारा राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने पर जोर देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज कहा कि इस संबंध में केवल औपचारिकता रह गयी है जिस पर विवाद खड़ा हो गया और तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि लोकतंत्र में संविधान ‘पवित्र पुस्तक’ है.

 

सुषमा ‘गीता के 5,151 वर्ष पूरे होने के’ मौके पर यहां लाल किला मैदान में आयोजित ‘गीता प्रेम महोत्सव’ को संबोधित कर रहीं थीं जहां विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तत्काल हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करना चाहिए.

 

सुषमा ने कहा कि वह भगवत गीता के उपदेशों के चलते ही विदेश मंत्री के रूप में चुनौतियों का सामना कर पाती हैं.

 

उन्होंने यह भी कहा कि गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ का सम्मान तो तभी मिल गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल सितंबर में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को यह पुस्तक भेंट की थी.

 

सुषमा ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘भगवत गीता में सभी की समस्याओं का समाधान है और इसलिए मैंने संसद में खड़े होकर कहा था कि ‘श्रीमद भगवत गीता’ को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के आने के बाद से इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गयी है लेकिन मुझे यह कहते हुए खुशी है कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘श्रीमद भगवत गीता’ भेंट करते हुए इसे पहले ही राष्ट्रीय ग्रंथ का सम्मान दिला दिया है.’’

 

सुषमा ने कहा, ‘‘सभी को रोज गीता के दो श्लोक पढ़ने चाहिए. यह 700 श्लोकों वाला ग्रंथ है और एक साल में इसे पूरा पढ़ा जा सकता है. इसे फिर पढ़ना शुरू करें और आखिर तक पढ़ें. इसे तीन से चार बार पढ़ने से आपको जीवन जीने का मार्ग मिलेगा, जो मैंने भी खोजा है.’

 

सुषमा ने कहा, ‘‘जब मैंने पहली बार गीता पढ़ी तो मैं इस अवधारणा से सहमत नहीं थी कि जो होता है, अच्छे के लिए होता है और जो होगा, अच्छे के लिए होगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब मैंने इसे तीसरी, चौथी बार पढ़ा तो मैं इसका अर्थ समझी. इससे मुझे मेरे पूरे जीवन में मदद मिली. यहां तक कि अब भी मुझे मदद मिलती है जब मैं विदेश मंत्रालय का काम देखती हूं और इससे संबंधित चुनौतियां आती हैं.’’

 

अवसाद से निपटने के लिए लोगों द्वारा चॉकलेट आदि चीजों के सेवन के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘चॉकलेट खाने या गोलियां खाने से अवसाद कम नहीं होता. इसके बजाय गीता पढ़नी चाहिए. इससे जीवन में तनाव और अवसाद कम करने में मदद मिलेगी.’’

 

सुषमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा, ‘‘हमारा संविधान कहता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. लोकतंत्र में संविधान पवित्र पुस्तक है.’’ पार्टी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘हम सभी पवित्र पुस्तकों का सम्मान करते हैं. कुरान, पुराण, वेद, वेदांत, बाइबिल, त्रिपिटक, जेंदावेस्ता, गुरू ग्रंथ साहिब, गीता सभी हमारे गौरव हैं.’’ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि गीता का सार इसके तत्व में समाहित है न कि इसकी प्रतीकात्मकता में.

 

सिंघल ने कहा, ‘‘दो तरीके हैं. या तो पहले विधेयक पारित किया जाए और इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए. या प्रधानमंत्री तत्काल इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कर दें. आज यहां सुषमा स्वराज उपस्थित हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने के नाते उनसे मेरा अनुरोध है कि प्रधानमंत्री मोदी से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराएं.’’

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Web Title: sushma swaraj_geeta
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