अब तक बेदाग रहे सुषमा के सियासी सफर में पहली बार लगा 'ललित' दाग

By: | Last Updated: Tuesday, 16 June 2015 2:41 AM

नई दिल्ली: ललित मोदी की मदद के बाद अब सवाल उठ रहा है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की गद्दी बचेगी या जायेगी? वैसे सुषमा स्वराज का अब तक राजनीतिक सफर बेदाग रहा है और वो बीजेपी की कद्दावर नेताओं में एक हैं.

 

सियासत संभावनाओं का खेल है और इस खेल में कब कौन किस मुकाम पर पहुंच जाए, इसकी जीती जागती मिसाल हैं सुषमा स्वराज. एक समय कहा जाता था कि अटल और आडवाणी के बाद सुषमा स्वराज बीजेपी की कमान संभाल सकती हैं वहीं अब सवाल उठ रहा है कि विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा की गद्दी बचेगी या नहीं?

 

1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरूआत करने वाली सुषमा स्वराज नब्बे के दशक में बीजेपी का जाना पहचाना चेहरा बन चुकी थीं. 1990 में वो पहली बार राज्यसभा सांसद बनीं और उसके बाद 1996 में दक्षिण दिल्ली से लोकसभा सांसद. एनडीए की पहली सरकार बनी तो सुषमा स्वराज को सूचना और प्रसारण मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार मिला.

 

साल 1998 में बीजेपी ने उनको दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनाया ताकि वो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित कर सकें. प्याज की बढ़ती कीमतों की वजह से सुषमा स्वराज दिल्ली में बीजेपी को तो जीत नहीं दिला पाई लेकिन इससे उनके राजनीतिक कद पर कोई खास असर नहीं पड़ा.

 

1999 के लोकसभा चुनाव में जब सवाल उठा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कौन लड़ेगा तो बीजेपी ने सुषमा स्वराज को आगे कर दिया. कर्नाटक के बेल्लारी में सुषमा स्वराज सोनिया गांधी से हार गईं थी लेकिन तब तक वो बीजेपी की सबसे ब़ड़ी महिला चेहरा बन चुकी थीं.

 

एनडीए सरकार में सुषमा स्वराज को स्वास्थ्य और ससंदीय कार्यमंत्री जैसे अहम पद दिये गये. 2009 के लोकसभा चुनाव में सुषमा स्वराज ने मध्य प्रदेश के विदिशा से जीत हासिल की और लोकसभा में नेता विपक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने मनमोहन सरकार पर धारदार हमले किये.

 

2014 के चुनाव में भी सुषमा स्वराज विदिशा से चुनी गईं और मोदी सरकार में वो विदेश मंत्री बनीं. इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज पहली महिला विदेश मंत्री बनीं हैं और ललित मोदी प्रकरण से पहले उनके कामकाज की हर किसी ने तारीफ की.

 

शांत, सौम्य और मृदुभाषी छवि की सुषमा स्वराज मतदाताओं में खासी लोकप्रिय हैं. बीजेपी में मोदी युग से पहले वो प्रधानमंत्री पद तक की दावेदार मानी जाती थीं.. लेकिन ललित मोदी प्रकरण की वजह से सुषमा अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े संकट में फंस गई हैं.

 

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