हजार करोड़ का मालिक मुंह छुपा रहा है?

By: | Last Updated: Thursday, 4 February 2016 5:55 PM
Suspended UP chief engineer Yadav Singh arrested

नई दिल्ली: यूपी के सबसे अमीर विभाग नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह सीबीआई की गिरफ्त में हैं. यादव सिंह पर करोड़ों की घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटने का आरोप है. हजार करोड़ की संपत्ति के मालिक यादव सिंह गाजियाबाद कोर्ट में पेश किया गया तो उसने तौलिये से मुंह छिपा लिया. हालांकि बाद में यादव सिंह की शक्ल भी दिखी. कोर्ट ने यादव सिंह को 6 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है.

किसी चीफ इंजीनियर की गिरफ्तारी ने शायद ही कभी इतनी सुर्खियां बटोरी हों जितनी यादव सिंह बटोर रहे हैं लेकिन यादव सिंह का मामला ही कुछ ऐसा है.. गिरफ्तारी से पहले यादव का रसूख चर्चा में था और अब उनके आरोपों के पीछे छिपे तमाम किस्से जिन्हें सामने लाने की कोशिश कर रही है सीबीआई. अब तक आपने यादव सिंह की कुछ तस्वीरें देखी होंगी लेकिन गिरफ्तारी के बाद पेशी के दौरान पहली बार दिखा यादव सिंह.

कार की पिछली सीट पर बैठकर अगली सीट पर सिर टिकाकर और तौलिये से चेहरा ढककर बैठे हुआ ये शख्स यूपी के सबसे अमीर विभाग का चीफ इंजीनियर हुआ करता था. यादव सिंह को सीबीआई ने लंबी पूछताछ के बाद बुधवार को भ्रष्ट्राचार औऱ धोखाधडी जैसे आरोपो में गिरफ्तार किया है.

किसी जांच एजेंसी की गिरफ्त में पहली बार आए यादव सिंह सीबीआई के सवालों का जवाब देने में कतरा रहे हैं. वजह सीबीआई भ्रष्टाचार से जुड़े वो सवाल पूछ रही है जिसके गवाह यादव सिंह के अपने ही लोग हैं.

Yadav-Singhभ्रष्टाचार के इस मामले में यादव सिंह के अपने ही उनके गले की हड्डी बनते नजर आ रहे है ये यादव सिंह के वो अपने है जिन्होने कभी यादव सिंह के लिए रकम इकट्री की औऱ यादव सिंह की बदौलत ही करोडपति बन गए औऱ अब ये अपने ही जांच एजेसियो के सामने पोल खोल रहे है कि यादव सिंह रिश्वत लेते थे औऱ इऩ्ही अपनो के बयान के आधार पर ही सीबीआई ने यादव सिंह के सामने सवालो की झडी लगा दी है.

यादव सिंह के अपनों की इस फौज में एक नाम है प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह जिन्होंने रिश्वत के पूरे बंटवारे का खुलासा किया. इस दस्तावेज को ध्यान से देख लीजिए जिसमें प्राधिकरण के एंकाउंटेट प्रदीप शर्मा कह रहे है कि साल 2007 से 2012 के बीच वो खुद भी टेंडर की फाइलों में हर एक फाइल पर एक से दो हजार रुपये लेते थे औऱ इससे कहीं ज्यादा पैसा यादव सिंह औऱ दूसरे इंजीनियरो के पास जाती थी.

यादव सिंह के इस जाल में कुछ बडी मछलियां फंसती नजर आ रही हैं सीबीआई अब हर टेंडर की फाइल यादव सिंह के सामने रख कर पूछताछ कर रही है कि ये टेंडर किसके कहने पर दिए गए औऱ रिश्वत की रकम आगे कहां कहा जाती थी.

सीबीआई सूत्रो के मुताबिक अब तक की जांच औऱ लिए गए बयानो के दौरान यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि यादव सिंह औऱ उसके गिरोह को पूरा संरक्षण मिल रहा था चाहे साल 2007 से 2012 का समय रहा हो जब मायावती की सरकार थी या फिर 2014 का जब समाजवादी पार्टी की सरकार रही. इसीलिए उस पर कोई कार्रवाई नही हो पाती थी. यादव सिंह की कस्टडी के दौरान कई औऱ बडी हस्तियो के नाम सामने आ सकते है.

यादव सिंह की गिरफ्तारी के बाद उत्तरप्रदेश के सियासी गलियारो में भी हलचल मच गई है क्योकि यादव सिंह बसपा औऱ सपा दोनों के शासनकाल मे मलाईदार पदों पर तैनात रहे है सीबीआई इस मामले में उत्तर प्रदेश के कुछ नौकरशाहो से भी पूछताछ कर सकती है.

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Web Title: Suspended UP chief engineer Yadav Singh arrested
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