भारत-पाकिस्तान वार्ता पर सरकार का फैसला ‘बचकानी हरकत’: कांग्रेस

By: | Last Updated: Tuesday, 19 August 2014 4:04 AM

नयी दिल्ली: पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द करने के सरकार के फैसले को कांग्रेस ने ‘भावावेश में किया गया निर्णय’ बताते हुए खारिज कर दिया जबकि बीजेपी ने इसे ‘साहसी’ कदम करार दिया. कश्मीरी अलगाववादियों और पीडीपी ने इस फैसले पर हताशा जाहिर की.

 

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर ‘अस्पष्ट और असंगत विदेश नीति’ अपनाने का आरोप लगाते हुए फैसले को महज नाटकीय करार दिया और कहा कि सरकार पाकिस्तान के साथ निपटने की भारत की नीति के संबंध में भ्रामक संदेश दे रही है.

 

पार्टी के नेता मनीष तिवारी ने कहा, ‘‘भावावेश में किया गया यह निर्णय जाहिर करता है कि पाकिस्तान को लेकिन उनकी कोई स्पष्ट नीति नहीं है.’’ कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री द्वारा (रिपीट) द्वारा पाकिस्तान की ओर से लगातार उकसावे की कार्रवाई के बावजूद बातचीत को पहले स्थान पर रखने की सहमति जताने पर सवाल खड़ा किया.

 

शर्मा ने कहा, ‘‘जब पाकिस्तान की ओर से लगातार संघर्ष विराम उल्लंघन के द्वारा उकसावे की कार्रवाई हो रही है तो नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत करने का फैसला किस आधार पर किया.’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सरकार के कदम को सिर्फ एक नाटक करार दिया.

 

उन्होंने कहा, ‘‘बातचीत बहुत पहले रोकी जा चुकी है. इसे फिर बहाल क्यों किया गया? भारत क्यों बातचीत की तैयारी कर रहा था? सरकार विदेश संबंधी मामलों में भावावेश में फैसला कर रही है.’’

 

कांग्रेस के एक अन्य नेता मणिशंकर अय्यर ने सरकार के फैसले को ‘बचकाना’ करार देते हुए कहा कि अब भारत पाक वार्ता बहाल करने में मुश्किल होगी. हालांकि बीजेपी ने सरकार के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है लेकिन अपने आंतरिक मामलों में वह कोई दखलंदाजी नहीं होने देगा.

 

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘‘बीजेपी वार्ता रद्द होने के फैसले का स्वागत करती है. भारत अपने पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते चाहता है लेकिन वह किसी के भी द्वारा अपने आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा.’’

 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि एक निर्णय एक अत्यंत नकारात्मक घटनाक्रम है जिसका असर, 26 मई को मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किए जाने के कारण पैदा हुए सुलह सहमति के माहौल पर पड़ेगा.

 

कश्मीर के अलगाववादियों ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह निर्णय ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है और इससे दोनों देशों के बीच गतिरोध ही सुनिश्चित होगा. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने बताया कि निर्णय ‘बहुत-बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि हमें उम्मीद थी कि वार्ता की प्रक्रिया शुरू हो गई है और भारत तथा पाकिस्तान की सरकारें कश्मीर मुद्दे के हल के लिए मिलजुलकर काम करेंगी.’

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Web Title: Suspension of dialogue with Pakistan not a good decision says Congress
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