शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी बनीं लेफ्टिनेंट, कहा- मेरे खून की हर बूंद देश के नाम

शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी बनीं लेफ्टिनेंट, कहा- मेरे खून की हर बूंद देश के नाम

39 साल के कर्नल महादिक महाराष्ट्र के रहने वाले थे. साल 2015 में 13 नवंबर को कुपवाड़ा के जंगलों में लश्कर-ए-तय्यबा के आतंकियों से लड़ाई के दौरान वह शहीद हो गए थे.

By: | Updated: 09 Sep 2017 03:12 PM
चेन्नई: जम्मू-कश्मीर में पिछले साल नवंबर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए सेना के जाबांज कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गईं हैं. उन्हें आर्मी आर्डिनेंस कॉर्प्स (AOC) में नियुक्त किया गया है.

स्वाति ने कहा है, "मेरे पति का पहला प्यार उनकी वर्दी थी, इसलिए मुझे एक दिन तो इसे पहनना ही था. पति की शहादत के बाद से मैं सदमे में थी. जब इससे बाहर निकली तो मैंने खुद को पहले से ज्यादा मजबूत महसूस किया.’’ उन्होंने कहा, ‘’वे भी फौज में शामिल होकर अपने पति की जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहती हैं. मेरे खून की हर बूंद आज से देश के नाम है.’’




स्वाति महादिक ने अक्टूबर 2016 में चेन्नई स्थिति ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकैडमी (ओटीए) में प्रशिक्षण के लिए दाखिला लिया था और 11 महीने का कठोर प्रशिक्षण पूरा किया था. अब उन्हें आधिकारिक तौर पर सेना में नियुक्ति कर लिया गया है. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने एओसी में जाने का विकल्प चुना था.

शहीद कर्नल की पत्नी ने पति की शहादत के बाद सेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी. लेकिन उनकी उम्र अधिक थी, इस वजह से सेना में शामिल होने में बाधा आ रही थी. हालांकि रक्षा मंत्रालय की तरफ से इस मामले को मंजूरी दे दी गई थी.

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तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सेना प्रमुख दलवीर सिंह से स्वाति को सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षा में आयु सीमा में छूट देने की सिफारिश की थी. बता दें कि एसएसबी  का एग्जाम देने की उम्र 27 साल होती है, जबकि उनकी उम्र इससे ज्यादा थी. दुश्मनों से बदला लेने के लिए स्वाति महादिक ने अपने आंसू पोछकर हौसले बुलंद कर लिए हैं.

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कौन थे शहीद कर्नल संतोष महादिक?

बता दें कि 39 साल के कर्नल महादिक महाराष्ट्र के रहने वाले थे. साल 2015 में 13 नवंबर को कुपवाड़ा के जंगलों में लश्कर-ए-तय्यबा के आतंकियों से लड़ाई के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी. कर्नल महादिक को साल 2003 में पूर्वोत्तर में आपरेशन राइनो के दौरान बहादुरी के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था.

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