श्वेता ने मीडिया को लिखा खुला खत: निष्कर्ष निकालने से पहले अपने तथ्य ठीक कर लें!

By: | Last Updated: Tuesday, 9 December 2014 7:20 AM
swetha basu prasad writes an open letter to media

नई दिल्ली: फिल्म ‘मकड़ी’ से मशहूर हुई श्वेता बासु प्रसाद ने मीडिया पर वेश्यावृति मामले में गलत तरीके से उनका नाम घसीटने का आरोप लगाया है. सेक्स रैकेट में नाम आऩे के बाद श्वेता को 59 दिनों के लिए सुधार गृह में भेज दिया गया था. हालांकि पांच दिसंबर को हैदराबाद के नामपल्ली की मेट्रोपॉलिटन सत्र अदालत ने इस मामले में श्वेता को ‘क्लीन चिट’ दे दी है.

 

अदालत ने श्वेता के खिलाफ लगे आरोपों को वापस ले लिया है और निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है.

 

सेक्स रैकेट मामले में श्वेता को हाई कोर्ट से मिली क्लीनचिट 

 

अपने ट्विटर हैंडल @SugarrTales पर डाले गए खुले खत में 23 साल की श्वेता ने कहा कि प्रेस में जिस तरीके से मामले को पेश किया गया, उससे उन्हें दुख की जगह हैरानी हुई है. उन्होंने खत में लिखा है कि वह इस पूरे मामले को भूलकर जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती हैं.

 

 

ये है मीडिया के लिए लिखा गया श्वेता बासु प्रसाद का खुला खत-

 

प्रिय मीडिया के लोगों

बचपन से ही कुछ महान पत्रकारों के प्रति मेरे मन में आदर का भाव रहा है, ये वो पत्रकार है जिन्होंने युद्ध के मैदान, आतंकी हमले और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में डटे रहकर, अपनी जान की बाजी लगाकर सीधे सच हम तक पहुंचाया है. ऐसे ही लोगों से प्रभावित होकर मैनें बिना किसी हिचकिचाहट के मास कॉम (जनसंचार) और पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. मुझे हमेशा इस बात से (मास कॉम और पत्रकारिता की डिग्री हासिल करने से) खुशी मिलती थी! (मैं सोचती थी कि) मीडिया के लोग अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर लोगों तक सच पहुंचाते हैं. पर ये क्या! एक दिन अचानक इसी मीडिया ने मेरी जिंदगी में भूचाल ला दिया. बहुत-बहुत शुक्रिया!

 

OMG: प्रॉस्टिट्यूशन में बॉलीवुड की अभिनेत्री गिरफ्तार 

 

मुझे यह पता है कि सबकुछ प्रतिक्रियाओं पर आधारित था और इसी दरम्यान कई सारी गलत ख़बर बना दी गईं. साथ में मेरा………..इंतजार, पर मेरे बयान का इंतजार नहीं किया गया.

 

पता नहीं मेरा यह बयान कहां से आया:

“मैंने अपने करियर में गलत फैसले किए हैं और मेरे पास पैसे नहीं है. मुझे अपने परिवार को चलाना पड़ता है और कई अच्छे काम भी करने पड़ते हैं. सभी दरवाजे बंद हो गए थे और कुछ लोगों ने मुझे वेश्याव़ति अपनाने की सलाह दी. मेरे पास कोई चारा नहीं था और कोई और विकल्प नहीं होने के कारण, मैं इस काम में शामिल हो गई. मैं अकेली नहीं हूं, जिसे इस दिक्कत का सामना करना पड़ा है और कई सारे एसी हिरोईनें हैं जो इस दौर से गुजरी हैं.”

 

सच में?? आप जो कोई भी हैं, किसने इस बयान की कल्पना कि और इसे लिखा, क्या आप काम करते वक्त सिगरेट के नशे में थे? कौन ऐसी बातें करता है? ये बयान 80 के दशक में बनी किसी बॉलीबुड फिल्म का लगता है. साथ ही इस बयान में इतने सारे ‘और’ जोड़ने की क्या जरूरत थी, स्कूल जाकर अपनी भाषा पर मेहनम करो वेबकूफ! शुक्र है कि मेरे परिवार, मेरे दोस्तों और जो लोग मुझे जानते हैं उन्होंने इस बयान पर भरोसा नहीं किया. उन्हें पता है कि मैं ऐसे बात नहीं करती हूं. पर भारत और बाकी लोगों के लिए, चाहे पूरी दुनिया में वे कहीं भी हो, आखिरी बार: ये मेरा बयान नहीं है (जो मीडिया ने लोगों तक पहुंचाया).

 

हमारे समाज के साथ जो दिक्कत है वो यह है कि जब तक मुझे सहानुभूति मिल रही थी सब मेरा साथ दे रहे थे. जैसी ही लोगों को लगा कि वो (मीडिया में आई ख़बरों से) बहक गए थे और 23 साल की एक लड़की बिना किसी सहानुभूति के अपने कदमों पर खड़ी हो सकती है, समाज को लगा कि वो झूठ बोल रही है? इसमें मेरी क्या गलती है कि मीडिया के काम करने का यही तरीका है. मैं किसी पर इस बात का दबाव नहीं डाल सकती कि वे मुझे पसंद या मेरी इज्जत करें. जो हुआ, खुद-ब-खुद हुआ. जो हुआ वो मेरी नियंत्रन से बाहर था.

 

श्वेता पर कोई कमेंट नहीं करना चाहती: एकता 

 

मेरी गिरफ्तारी के बाद मुझे सुधार गृह भेज दिया गया जहां मुझे साढ़े 59 दिन बिताने पड़े. (60वें दिन मैं घर लौटी), इस बीच मैंने मीडिया को कब और कैसे बयान दे दिया? मेरा फोन जब्त कर लिया गया था, मैंने कुछ आखिरी कॉल्स मेरी मां और मेरे करीबी दोस्तों को किया. ये दो महीने मैं अख़बार, टीवी, इंटरनेट और रेडियो जैसे किसी माध्यम से महरूम थी. प्रज्वला सुधार गृह के बाहर क्या चल रहा था इसका मुझे कोई पता नहीं था. हां, वहां मेरा वक्त बड़ा अच्छा गुजरा. मैंने वहां बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सिखाया. मैं हमेशा उन बच्चों के लिए प्रर्थना करुंगी. मैंने उन दो महिनों में 12 किताबें खत्म की. मैंने इस दौरान बहुत कुछ सीखा.

 

30 अक्टूबर 2014 को जब दो महिने बाद मैं बाहर आई तो पिछले दो महिनों में मेरे बारे में फैलाई गई ख़बरों का मुझे पता चला, मुझे दुख की जगह हैरानी हुई! एक ख़बर में लिखा गया था कि पुलिस वालों ने (मीडिया को) यह बताया कि मैंने ऐसा बयान दिया है पर जब मैंने हैदराबाद संपर्क किया तो पुलिस ने ऐसी किसी बात से इंकार कर दिया. एक बात और कि ऐसे मामलों में पुलिस के पास आरोपी की पहचान बताने का अधिकार नहीं होता है, जिससे ये बात साफ होती है कि पुलिस ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया. ऐसा करना कानून के खिलाफ है. पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है जब ऐसा कोई बयान मौजूद ही नहीं है. मेरी गैरमौजूदगी, मेरे बयान गढ़ने वालों के लिए एक मौका बन गई.

 

मेरी जिंदगी में ये बिजनेस मैन कौन हैं, कोई बताएगा? मैं भी उतनी ही हैरान हूं जितना बाकी लोग! तो पहेली यहां सुलझती है: मेरे साथ पकड़े गए व्यापारी का नाम क्यों सार्वजनिक नहीं किया गया? एक क्लू: जब मेरी गिरफ्तारी हुई थी तब क्या वहां कोई बिजनेस मैन मौजूद भी था? जरा सोचिए. इस बात को सच साबित कर के दिखाइए!

 

30 अगस्त को होने वाले संतोषम अवॉर्डस के सिलसिले में मैं हैदराबाद में थी. मुझे कभी किसी ने वेश्याव़ति में आने की सलाह नहीं दी और मेरे टिकट किसी ने बुक नहीं किया न ही वहां कोई मौजूद था! मेरा टिकट और रहने की व्यवस्था समारोह के आयोजकों ने की थी. जिस होटल में मैं बाकी गेसट्स के साथ ठहरी थी वो अवॉर्ड समारोह के आयोजकों का पार्टनर था. मेरे ई-मेल में अब भी इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं.

 

मेरा परिवार इकबाल (2005 में आई श्वेता की फिल्म) के बाद से नहीं चाहता कि मैं फिल्मों में काम करुं. मेरे परिवार को इस बात की ज्यादा परवाह थी कि मैं 10वीं और 12वीं की परिक्षांए अच्छे से पास कर लूं न कि 16 की उम्र में फिल्में करने लग जाउं! मेरे घर वालों ने मेरी परवरिश के लिए बड़ी मेहनत की है. मुझे बहुत अच्छी शिक्षा दिलाई, जन्मदिन पर अच्छे तोहफे दिए, अच्छी जगहों पर घूमने ले गए, यहां तक कि खेल से लेकर संगीत तक सीखने की सुविधाएं दिलावाईं (मैंने मुंबई स्थित जुहू के संगीतमहाभारती से सितार बजाना सीखा है), मेरे परिवार ने वो सबकुछ किया जो एक मिडिल क्लास परिवार करता है.

 

सेक्स रैकेट में शामिल श्वेता के बचाव में आईं दीपिका पादुकोण  

 

जब मैं 18 की थी तो मैंने कुछ साउथ की फिल्में (तमिल और तेलगू) की फिर पिछले साढ़े तीन सालों से मैं एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने में व्यस्त थी. फिल्म का नाम ‘रूट्स’ है और यह फिल्म भारतीय शास्त्रीय संगीत पर आधारित है, इसमें उस्दात अमजद अली खान, पंड़ित शिवकुमार शर्मा, शुभा मुगदल, ए आर रहमान, विशाल भारद्वाज, डॉ. एल अधिरजा बोस के इंटरव्यू शामिल हैं.

 

प्रॉस्टीट्यूशन के आरोप में गिरफ्तार अभिनेत्री श्वेता के साथ फिल्म बनाएंगे हंसल मेहता

 

जून 2014 में मैंने अपने एक दोस्त अधिराज बोस के साथ मिल कर 12 मिनट की एक फिल्म बनाई. फिल्म का नाम ‘INT. cafe night’ है. फिल्म में मेरे साथ शेरनाज पटेल, नसीरुद्दीन शाह और नवीन कस्तूरिया भी हैं. इसे कई फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया जा रहा है. मैंने कई फिल्मों के ऑडिशन्स भी दिए हैं. तो कौन से दरवाजे मेरे लिए बंद थे? क़पा करके कोई निष्कर्ष निकालने के पहले एक बार अपने तथ्य ठीक कर लें!

 

हालांकि, 5 दिस्मबर 2014 को हैदराबाद स्थित नामपल्ली के मेट्रोपॉलिटन सेशन कोर्ट ने मुझे इस मामले में क्लीन चिट दे दिया है और मुझ पर से सभी आरोप हटा लिए साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा मुझ पर लगाया गया स्टे ऑर्डर भी हटा लिया.

 

सेक्स रैकेट में पकड़ी गई श्वेता को मिला बॉलीवुड में एंट्री 

 

उन सबको जिन्होंने इस दौरान मेरा साथ दिया, बहुत-बहुत शुक्रिया. चलिए, बहुत कुछ कह दिया और सुन लिया. मैं पूरी तरह से इस घटना से उबर चुकी हूं और उन सबको भी याद नहीं करना चाहती जिन्होंने गलत बयान(बयानों) पर आधारित ख़बरें बनाई. मैं इसे भूल गई क्योंकि इस मुद्दे को अब और महत्व नहीं दिया जाना चाहिए.

श्वेता बासु प्रसाद

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