स्वाइन फ्लू कैसे व किसे हो सकता है?

By: | Last Updated: Sunday, 15 February 2015 4:45 PM

हरिद्वार: स्वाइन फ्लू एच1 एन1 वायरस के कारण होने वाला एक संक्रमणजन्य रोग है जो किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकता है. यह वायरस दूषित वातावरण, दूषित वायु एवं श्वास-प्रश्वास के माध्यम से संक्रमित होता है.

 

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार ने स्वाइन फ्लू के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए इसके लक्षण और इससे बचाव के कुछ तरीके बताए हैं-

 

स्वाइन फ्लू के लक्षण-

 

संक्रमण होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, ठण्ड लगना, कंपकपी, गले में खरास, छींक आना, नाक से लगातार पानी बहना, सांस लेने में कठिनाई, थकान इत्यादि हैं.

 

बचाव के उपाय/सावधानियां-

 

आयुर्वेद के अनुसार इस ऋतु-सन्धि काल में श्वास, काश एवं कफ व्याधियों की सम्भावना ज्यादा रहती है, इसलिए इसी हिसाब से सावधानी बरतनी होगी.

 

उन व्यक्तियों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है जिन्हें बार-बार सर्दी जुकाम होता है.

 

जिन्हें मौसमी एलर्जी, एलर्जिक अस्थमा या एलर्जिक रिनाइटिस की समस्या हो उन्हें विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है.

 

स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. पीड़ित व्यक्ति के प्रयोग में लाए जाने वाले वस्त्र तौलिया, रूमाल, बर्तन आदि को साफ रखें, उनका उपयोग अन्य लोग न करें. खांसते-छींकते समय मुंह ढके रखें, रूमाल का प्रयोग करें.

 

बचाव हेतु नियमित प्राणायाम करें. सम्भव हो तो नियमित हवन (यज्ञ) भी करें.

 

गन्दगी, संक्रमणयुक्त स्थान एवं पीड़ित व्यक्तियों के घरों के आसपास हवन अवश्य करें. सार्वजनिक, सामूहिक रूप से हवन अवश्य करें.

 

कपूर, लौंग, गुड़ का बूरा, नीमपत्र, जावित्री, तिल, घी का हवन अत्यन्त लाभकारी.

 

तुलसी पत्र एवं आज्ञाघास (जरांकुश) उबालकर पिएं. दालचीनी चूर्ण शहद के साथ अथवा दालचीनी की चाय लाभदायक.

 

तुलसी पत्र, कालीमिर्च उबाल-छानकर पिएं. दिन भर सामान्य जल की जगह तुलसीयुक्त गुनगुने जल का सेवन करें.

 

हल्दी इस रोग में विशेष लाभकारी है. नियमित हल्दी युक्त दूध अथवा हल्दी, सेंधानमक, तुलसी पत्र पानी में उबालकर पीना भी फायदेमन्द है.

 

लेमन टी, प्रज्ञापेय (बिना दूध का) या ब्लैक टी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर पिएं.

 

तरल आहार का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें. ठण्डा, गरम एक साथ न लें, विरुद्ध आहार-विहार से बचें.

 

विटामिन सी से भरपूर आहार लाभदायक है. आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है.

 

आयुर्वेदिक औषधि ‘षडंग पानीय’ उबालकर पिएं. यह बाजार में तैयार भी मिलती है.

 

पसीना आने पर तुरन्त कपड़े न निकालें, न ही तुरन्त पंखे या ठण्डे जल का प्रयोग करें. नमकयुक्त गुनगुने जल से स्नान लाभदायक है.

 

दूषित जल व दूषित अन्न का प्रयोग न करें, बासी और गरिष्ठ भोजनों से बचें.

 

गिलोय, कालमेध, चिरायता, भुईं-आंवला, सरपुंखा, वासा इत्यादि जड़ी-बूटियां लाभदायक हैं.

 

स्वाइन फ्लू में सहायक हो सकती यज्ञोपैथी: डॉ. पण्ड्या

 

स्वाइन फ्लू के उपचार में यज्ञोपैथी सहायक हो सकती है. यज्ञ में चूंकि औषधीय प्रयोग होता है, अत: वातावरण के साथ-साथ यज्ञकर्ताओं को भी लाभ पहुंचता है. यज्ञ से वायु शुद्ध होकर ताजा शुद्ध ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है. यह कहना है हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या का.

 

प्रणव पण्ड्या ने रविवार को यहां विवि के समग्र स्वास्थ्य प्रबन्धन केन्द्र के कर्मियों को संबोधित करते हुए स्वाइन फ्लू मुद्दे पर कहा, “यज्ञ रोगोपचार में एक कारगर उपाय है. यज्ञ से नि:सृत औषधियुक्त धुएं में अद्भुत रोगनाशक शक्ति पाई गई है, जो यज्ञस्थलों के आस-पास के रोगाणुओं को नष्ट कर देती है. इसलिए स्वाइन फ्लू जैसी गम्भीर बीमारी में इस उपचार का सहारा लिया जाना चाहिए.”

 

डॉ. पण्ड्या ने ब्रह्मवर्चस् रिसर्च सेंटर में औषधीय सामग्रियों द्वारा हुए यज्ञीय प्रयोगों के नतीजों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां के शोध से पाया गया है कि औषधीय यज्ञ से वातावरण एवं मानवीय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यज्ञ से वायु शुद्ध होकर ताजा शुद्ध ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है.

 

डॉ. पण्ड्या के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में सतत शोध चलता रहता है कि मानव समाज को समग्र रूप से स्वस्थ, सबल, सुसंस्कृत और समुन्नत कैसे बनाया जाए? फिलहाल यहां स्वाइन फ्लू के आयुर्वेदिक, वैकल्पिक और प्राकृतिक उपचार पर शोध हो रहा है, जिसमें कई बचाव और उपचार के उपाय प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें औषधीय प्रयोग, आहार-विहार, पथ्यापथ्य सावधानी, साफ-सफाई आदि सहित यज्ञीय प्रयोग शामिल हैं.

 

यज्ञ विधा केवल धार्मिक क्रिया भर ही नहीं है बल्कि इससे वातावरण के परिष्कार के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य की भी प्राप्ति होती है. यज्ञ का सम्बन्ध वातावरण और स्वास्थ्य दोनों से होने के कारण ही ऋषियों ने जन सामान्य में इसका प्रचलन किया है.

 

डॉ. पण्डया के अनुसार, “किसी भी संक्रमण, साइड इफेक्ट्स या रोगाणुओं के संघातों से बचना हो तो सबसे पहले अपने स्वास्थ्य, खान-पान तथा दिनचर्या पर ध्यान देना होगा.”

 

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या के निर्देशन में देश के कई प्रभावित राज्यों, जैसे गुजरात, राजस्थान आदि के शक्तिपीठों में गायत्री परिजनों द्वारा स्वाइन फ्लू के दुष्प्रभावों से बचने हेतु प्राथमिक बचाव-उपचार के रूप में नि:शुल्क वनौषधीय क्वाथादि सेवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने इसके लिए विश्वस्तर पर जन जागरूकता की आवश्यकता बताई और विश्व मानस से सहयोग की अपेक्षा की.

 

स्वाइन फ्लू ने अलीगढ़ का वूमेंस कॉलेज बंद कराया

 

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (अमुवि) की एक छात्रा की स्वाइन फ्लू से मौत होने के बाद अमुवि प्रशासन ने अपने वूमेंस कॉलेज में सभी कक्षाएं 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी हैं. आशंका जताई जा रही है कि यह छात्रा दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों के शैक्षणिक टूर के दौरान इस प्राणघातक बीमारी से ग्रस्त हुई होगी.

 

विश्वविद्यालय सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल्लाह हॉल की जिन छात्राओं को खांसी या गले की तकलीफ थी, एकांत वास में और चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है. अमुवि के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह (सेवानिवृत्त) यूनिवर्सिटी हेल्थ सर्विस सेंटर में भर्ती प्रभावित छात्राओं से मिले.

 

कुलपति ने कहा कि इस बीमारी से बचाव के तौर पर वूमेंस कॉलेज में सभी कक्षाएं 18 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि वूमेंस कॉलेज में स्वाइन फ्लू के संक्रमण का खतरा नहीं है, फिर भी एहतियात के तौर पर सभी उपाय किए जा रहे हैं.

 

इस बीच, कुलपति के आदेश से सभी प्रकार के पूर्व निर्धारित शैक्षणिक टूर तथा फील्ड ट्रिप्स को एहतियात के तौर पर तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेश तक स्थगित कर दिया गया है. सभी विभागों के अध्यक्षों एवं संकायों के डीनों से आग्रह किया गया है कि वे किसी प्रकार के शैक्षणिक टूर आदि का नया प्रस्ताव न भेजें.

 

उप्र: स्वाइन फ्लू से निपटने को अस्पतालों में अलग वार्ड बने

 

उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों के मद्देनजर स्थिति पर नियंत्रण के लिए पुख्ता इंतजाम करने का दावा किया गया है. प्रदेश के नवनियुक्त चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी ने बताया कि स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए सूबे के सभी मेडिकल कालेज अस्पतालों में अलग से वार्ड गठित कर दिया गया है. डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही एमबीबीएस की 200 सीटें बढ़ाई जाएंगी. वहीं मेडिकल कालेजों में कर्मचारियों की कमी को भी दूर किया जा रहा है. इसके तहत जल्द ही पैरा मेडिकल स्टाफ व समूह ग के दो हजार कर्मचारियों की तैनाती होगी. इसके लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.

 

उन्होंने बताया कि बदायूं मेडिकल कालेज आगामी जून माह से शुरू कराया जाएगा. वहीं एमसीआई के बांदा व जालौन के मेडिकल कालेजों में होने जा रहे विजिट को लेकर मान्यता दिलाने का पूरा प्रयास होगा. साथ ही बांदा मेडिकल कालेज में मार्च माह से ओपीडी शुरू हो जाएगी. इसके लिए चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है.

 

उन्होंने बताया कि प्रदेशभर के मेडिकल कालेज अस्पतालों में कैंसर व हृदयरोग, किडनी, गुर्दा जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों का उपचार अब मुफ्त किया जाएगा. इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शासनादेश जारी कर दिया है.

 

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सभी मेडिकल कालेजों में मार्च माह के अंत तक आधुनिक सीटी स्कैन, एमआरआई व डिजिटल एक्सरे की मशीनें स्थापित की जाएंगी. इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.

 

उन्होंने बताया कि मेडिकल कालेजों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने एतिहासिक निर्णय लिया है. अब चिकित्सा शिक्षक की भर्ती की सीमा में उम्र आड़े नहीं आएगी. मेडिकल कालेज में तैनात चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की उम्रसीमा 65 वर्ष कर दिए जाने व उनके वेतनमान में वृद्धि किए जाने यह कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी.

 

स्वाइन फ्लू: स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगाएगी सरकार

 

देशभर में स्वाइन फ्लू के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत से चिंतित सरकार ने अब निर्देश जारी किया है कि जो स्वास्थ्यकर्मी इस बीमारी के इलाज से जुड़े हैं उन्हें टीका लगाया जाए. स्वाइन फ्लू को एच1एन1 वायरस के रूप में भी जाना जाता है. आंकड़ों के मुताबिक देश में स्वाइन फ्लू की वजह से 12 फरवरी तक 485 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल फरवरी माह में 279 लोगों ने इस बीमारी की वजह से दम तोड़ दिया.

 

स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त सचिव अंशु प्रकाश ने आईएएनएस से कहा, “समीक्षा बैठक में विशेषज्ञों ने इस बात की पुष्टि की कि इस साल भी जिस ‘स्ट्रेन’ के कारण फ्लू हो रहा है, वह ठीक उसी तरह है जैसा कि 2009 में स्वाइन फ्लू के प्रकोप के दौरान था.”

 

प्रकाश ने कहा, “इन्हीं तथ्यों के आधार पर हमने स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि इस बीमारी के उपचार में लगे कर्मियों को टीके लगाए जाएं.”

 

अंशु प्रकाश ने कहा कि यह उन संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे टीके हासिल करें. टीके बाजार में सहज उपलब्ध हैं. स्वाइन फ्लू का टीका बाजार में 500 रुपये में उपलब्ध है.

 

एच1एन1 वायरस को ही 2009 में स्वाइन फ्लू वायरस कहा जाने लगा, क्योंकि वैश्विक स्तर पर यह लोगों को प्रभावित करने लगा. इसे उसी तरह का पाया गया जैसा कि सुअर की श्वासनली में वायरस पाया जाता है.

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वरिष्ठ चिकित्सक रणदीप गुलेरिया ने आईएएनएस से कहा, “न केवल वैश्विक स्तर पर बल्कि भारत में भी इस तरह के प्रमाण हैं कि इस तरह के फ्लू के प्रसार के दौरान स्वास्थ्यकर्मी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं.”

 

देश में अब तक इस बीमारी से राजस्थान और गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं. राजस्थान में सबसे ज्यादा 130, इसके बाद गुजरात में 117 लोग अब तक जान गंवा चुके हैं. मध्य प्रदेश में 56, महाराष्ट्र में 51 और तेलंगाना में 45 लोगों की मौत हो चुकी है.

 

दिल्ली इस बीमारी से पीड़ितों के मामले में 1189 पीड़ितों के साथ दूसरे नंबर पर है. हालांकि यहां मौत का मामला अपेक्षाकृत कम रहा है.

 

गुलेरिया ने कहा कि ये आंकड़े इस बात के सबूत हैं कि सतर्कता बरतने पर जान बचाई जा सकती है. दिल्ली के लोग संभवत: लक्षणों के प्रति अधिक जागरूक हैं जिसकी वजह से उन्होंने शुरुआती लक्षण के समय ही उपचार शुरू कर दिया.

 

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव वी.एम. कटोच ने कहा कि संभवत: मौतों का मामला ज्यादा इसलिए है, क्योंकि इस बार ज्यादा संख्या में पीड़ित इलाज के लिए आ रहे हैं.

 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि पुणे स्थित जैव आयुर्विज्ञान अनुसंधान और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र इस बार स्वाइन फ्लू के इस फैलाव के कारणों की पड़ताल के लिए संयुक्त अध्ययन कर रहे हैं.

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