swine flu_chicken_mutton

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By: | Updated: 15 Mar 2015 03:31 PM

आजमगढ़: स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप और उससे बचाव को लेकर अब लोगों को जागरूक करने की पहल की जा रही है. चिकित्सक सलाह दे रहे हैं कि लोग पानी को उबालकर पीएं और कुछ दिनों तक चिकन, मटन या मरी हुई मछली न खाएं.

 

आजमगढ़ के माहुल में सेवारत वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने कहा कि इस समय स्वाइन फ्लू एक घातक बीमारी के रूप में फैल रहा है. इसका मुख्य कारण साफ-सफाई का अभाव, प्रदूषित वातावरण, प्रदूषित भोजन एवं संक्रमित पानी है.

 

उन्होंने बताया कि एक हफ्ते से अधिक समय तक सर्दी जुकाम एवं गला का जाम रहना, सांस लेने में परेशानी एवं बदन में दर्द रहने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. साथ ही संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें.

 

डॉ. पांडेय की सलाह है कि सदैव मास्क का प्रयोग करें. आग में कपूर, इलाइची एवं लौंग डालकर उसका धुंआ कुछ देर घरों में रहने दें. पानी को उबालकर पीएं, कुछ दिनों तक चिकन, मटन, मरी हुई मछलियों का सेवन न करें. ताजा पत्तेदार सब्जी व ताजे फल खाएं. साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. तली या भुनी हुई खाद्य सामग्री कम खाएं.

 

उन्होंने बताया कि तुलसी और अदरक डली हुई चाय पीने से स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचा जा सकता है.

 

डॉ. पांडेय ने कहा कि होम्योपैथी में स्वाइन फ्लू का बेहद कारगर इलाज है. होम्योपैथिक चिकित्सक लक्षण के अनुसार क्रोटलेश, हेरायटस, आर्सेनिक एलवा, यूपटेरियम पर्फ, एकोनाइट, सल्फर, जेल सिमिमियम, वैपटिसिया आदि दवाइयां लेने का परामर्श देते हैं.

 

उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक दवाओं के इस्तेमाल से कम पैसे खर्च कर स्वाइन फ्लू जैसी घातक महामारी से बचा जा सकता है.

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