क्या ताजमहल कभी हिंदू मंदिर था? जानें पूरा सच

By: | Last Updated: Tuesday, 1 December 2015 5:03 PM
Taj Mahal: is India monument or Hindu temple

नई दिल्लीः ताज महल एक मुगल बादशाह की मोहब्बत की आलीशान निशानी है या कोई मंदिर. दुनिया का सातवां अजूबा 12 वीं सदी में बनवाया गया था या फिर सत्रहवीं सदी में देश की शान पर उठने वाले ऐसे सवालों पर क्या अब विराम लग जाएगा?  ये उम्मीद इसलिए पैदा हुई है क्योंकि पुरातत्व विभाग के बाद अब देश के केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने देश की संसद के सामने ये मान लिया है कि ताजमहल के हिंदू इमारत होने के कोई सबूत नहीं हैं.  आज आपको बताने जा रहे हैं ताज के विवाद की पूरी कहानी.

 

 

मोहब्बत की निशानी है ताज महल. यहां इश्क ही मजहब है और प्यार सबसे बड़ी पूजा. दिल्ली से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर सांवली यमुना के किनारे सफेद संगमरमर से गढ़ी गई इमारत दुनिया का सातवां अजूबा भी है और एक शहंशाह के प्यार की ऐसी दास्तान है जिसका दीदार आज भी हर दिल को धड़कने पर मजबूर कर देता है. लेकिन ताज महल की खूबसूरती की ये कहानी एक विवाद की वजह भी है. विवाद ये कि ताज महल हिंदू इमारत है या मुगलों का ख्वाब? देश के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने संसद में ताज महल पर  एक बयान दिया और ताज महल को लेकर फिर तूफान खड़ा हो गया है.

 

वीडियो में देखें पूरा सच-

क्या ताजमहल कभी हिंदू मंदिर था…जानें पूरा सच? 

 

सरकार को इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि ताजमहल मूल रूप से हिंदू मंदिर था. महेश शर्मा ने ये बयान संसद में ताजमहल के उस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में देना पड़ा है जो हिंदूवादी संगठनों की ओर से ताजमहल को एक शिव मंदिर साबित करने की कोशिश से जुड़ा हुआ है. जाहिर है बीजेपी के मंत्री महेश शर्मा का ये दो टूक बयान अब हिंदूवादी संगठनों के गले नहीं उतर रहा है.

 

इससे पहले ताज महल को हिंदू मंदिर घोषित करने की इस कानूनी जंग के पन्नें पलटें जानें जिस ताज का दीदार करने हर साल 30 लाख लोग आगरा पहुंचते हैं. जिस ताज को 1983 में युनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिया था और जिस ताज पर नाज करता है भारत  उसी ताज को देश के एक वर्ग ने विवाद का केंद्र कैसे बना दिया?

 

हमारे और आपके दिलों में बरसों से रची बसी ताज की वो कहानी जो 16 वीं सदी में पांचवे मुगल शासक शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल के इश्क से शुरू होती है.

 

इतिहास के पन्नों पर दर्ज ये दास्तान बताती है कि मुमताज महल की मौत के बाद साल 1632 में शाहजहां ने मुमताज महल का ये मकबरा बनवाया और अपनी चाहत को संगमरमर के इस हुस्न में हमेशा के लिए कैद कर दिया. ताज महल को देखने दुनिया भर से जो पर्यटक आते हैं उन्हें यही कहानी जाने कितनी बार सुनाई गई है.

 

ताजमहल के लिए हिंदू संगठनों की ओर से तर्क दिए गए कि संगमरमर की इमारत को साल 1192 में राजा परमार्दिदेव ने बनवाया था. ये इमारत एक मंदिर थी जिसमें अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर शिवलिंग की पूजा होती थी. शाहजहां ने इसे राजपूत राजा मानसिंह के पोते जयसिंह से हासिल किया था.  शाहजहां की बेगम मुमताज महल का असली मकबरा बुरहानपुर में था. शाहजहां ने कब्जे के बाद शिव मंदिर को ही मकबरे में बदल दिया था.

 

हिंदू संगठनों की ओर से तर्क दिए गए कि नदी के किनारे सिर्फ मंदिर होते हैं और दुनिया में किसी मकबरे का नाम महल नहीं रखा गया है. यही नहीं ये भी दावा किया जाने लगा कि आगरा में पांच शिव मंदिरों में से सिर्फ चार बचे हैं क्योंकि पांचवा मंदिर तेजू महल था जिसे मुगल शासकों ने ताजमहल में बदल दिया गया.

 

इन तर्कों को लेकर आगरा के छह वकील निचली अदालत में ये साबित करने की कोशिश में जुटे हैं कि ताज महल शिव मंदिर है. ताजमहल को लेकर याचिका श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान’ की तरफ से लखनऊ के वकील हरिशंकर जैन ने दाखिल की है जिस के मुताबिक खसरा नंबर 12, मौजा बसई, तहसील सिटी, ज़िला आगरा में स्थित संपत्ति तेजो महालय है.

 

ताजमहल को हिंदू इमारत साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर इन तस्वीरों के जरिए प्रचार भी किया जाता रहा है.  मसलन ताज महल में कुएं की मौजूदगी पर तर्क दिया जाता है कि कुएं मकबरे में नहीं बल्कि मंदिर में होते हैं. ताजमहल की मुख्य इमारत का आकार अष्टभुजाकार है. इसे लेकर तर्क ये है कि हिंदू धर्म 10 दिशाएं मानता है आकाश और पाताल मिलाकर आठ कोने दरअसल 10 दिशाओं के प्रतीक हैं.

 

ताजमहल के शिखर की तस्वीरें दिखाकर ये दावा भी किया जाता है कि ये हिंदू पूजा विधि में इस्तेमाल होने वाले नारियल और आम्रपल्लव का प्रतीक है.ताजमहल की मेहराब की तस्वीरों के साथ ये दावा जोड़ा गया है कि नक्काशी में मौजूद कमल का फूल भी इसे हिंदू इमारत साबित करता है.

 

 

ताज महल की दीवारों पर मौजूद नक्काशी में बनी आकृति के धतूरे का फूल होने और इसमें ओम नजर आने का दावा भी किया जाता है. दीवारों पर मौजूद निचले हिस्से के बारे में तर्क दिया जाता है कि यहां हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें बनी थीं जिन्हें मिटा दिया गया.

 

ताजमहल के पिछले हिस्से से नजर आने वाली लाल पत्थर से बनी दो निचली मंजिलों में मौजूद 22 कमरों के बंद होने पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं.

 

ताज महल को हिंदू इमारत साबित करने के लिए पीएन ओक ने ऐसे एक दो नहीं कुल 104 तर्क दिए थे. इंदौर के रहने वाले पीएन ओक ने हिंदुस्तान टाइम्स और स्टेट्समैन अखबार में काम किया और फिर साल 1964 में भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन के लिए एक संस्था बनाकर एक मुहिम छेड़ दी. ताज महल भी उसी मुहिम का हिस्सा था जिसे 2007 में उनकी मौत के बाद हिंदूवादी संगठन अदालत तक ले गए हैं.

 

ताज महल को शिव मंदिर साबित करने वाली याचिका पर अगली सुनवाई फरवरी में होनी है. सबूतों के नाम पर दूसरे मंदिरों की परंपरा के तर्क तो दिए जा रहे हैं लेकिन ना तो अब तक ताजमहल की उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग की गई है और ना ही उस शिवलिंग का कोई सुराग है जिसका जिक्र बार-बार किया जाता है.

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Web Title: Taj Mahal: is India monument or Hindu temple
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