आय से अधिक संपत्ति मामले में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता दोषी करार, तीन बजे कोर्ट सुनाएगी सजा

By: | Last Updated: Saturday, 27 September 2014 3:52 AM

नई दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति मामले में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को बैंगलोर के स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया है. कोर्ट तीन बजे उन्हें सजा सुनाएगी. अब जयललिता को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी साथ ही उनके चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगा. कोर्ट जयललिता को एक से सात साल तक के लिए जेल की भी सजा सुना सकती है.

 

विशेष न्यायाधीश जॉन माइकल कुन्हा ने शहर के दक्षिणी उपनगर के पारापन्ना अग्रहारा में स्थित केंद्रीय कारागार में स्थापित एक विशेष अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच अपना फैसला सुनाया.

 

कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में जयललिता के समर्थक भी मौजूद हैं. कोर्ट का फैसला आने के बाद एआईएडीएमके समर्थक निराश हैं. जयललिता के समर्थकों ने बेंगलुरु और चेन्नई में विरोध शुरू कर दिया है.

 

जयललिता को दोषी करार दिए जाने के बाद चेन्नई में डीएमके के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं. DMK और AIADMK के समर्थकों के बीच डीएमके प्रमुख करुणानिधि के घर के बाहर झड़प हो गई है.

 

एनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा है कि कोर्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. सीपीआई नेता डी राजा ने कहा है कि यह बहुत ही महत्वपुर्ण निर्णय है. इससे तमिलनाडु की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा.

 

इस मामले में 18 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद आज विशेष अदालत जयललिता और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ फैसला सुनाया है.

 

क्या हैं आरोप?

जयललिता पर 1991-96 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से आय के अज्ञात स्रोतों से 66 करोड़ रुपए अधिक संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप है. 1996 में जयललिता के घर में छापे में 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना मिला था.

मामले में कई राजनीतिक और कानूनी उतार-चढ़ाव देखने को मिले. उनकी निकट सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी, उनके भतीजे और जयललिता द्वारा बेदखल किए जा चुके उनके गोद लिए गए बेटे सुधाकरन समेत अन्य को मामले में आरोपी बनाया गया है.

 

बेंगलूर शहर की पुलिस ने सुरक्षात्मक उपायों के तहत अदालत के फैसले से पहले आपराधिक दंड संहिता की धारा 144 के अंतर्गत निषेधाज्ञा के आदेश लागू कर दिया था.

 

तमिलनाडु सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने इसे चेन्नई की विशेष अदालत में 1996 में केस दायर किया था. इस मामले को वर्ष 2003 में उच्चतम न्यायालय ने उस समय बेंगलूर की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया था, जब द्रमुक के नेता के. अन्बझगन ने याचिका दायर करके तमिलनाडु में निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह जाहिर किया था. उस समय राज्य में जयललिता की सरकार थी.