टीबी के खिलाफ लड़ाई में बुराड़ी इलाके की सफलता

By: | Last Updated: Sunday, 2 November 2014 11:25 AM
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नई दिल्ली: उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी निवासी प्रभा शंकर तीन साल पहले गले में शिकायत को लेकर डॉक्टर को दिखाने गयी थीं. आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक समेत कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद अंतत: प्रभा को इस साल मार्च में टीबी के संक्रमण का पता चला.

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हाल ही में प्रकाशित ग्लोबल ट्यूबरकुलोसिस रिपोर्ट 2014 दिखाती है कि 2013 में 90 लाख लोगों को टीबी हुआ जिनमें से 15 लाख की मौत हो गयी.

 

डब्ल्यूएचओ के बयान के अनुसार टीबी का शिकार होने वाले करीब 30 लाख लोग उपचार नहीं कराते क्योंकि या तो उनमें रोग की पहचान नहीं होती या पहचान होती लेकिन उन्हें बताया नहीं जाता.

 

प्रभा शंकर के अनुसार, ‘‘टीबी का पता लगाने में काफी समय लगता है और इसके साथ सामाजिक कलंक भी लगा है. इस बारे में जागरकता केवल इसके बारे में जानने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि मामूली संदेह होने पर भी इसके बारे में बात करने को लेकर भी माहौल होना चाहिए. हमें इसे परिवारों से परिवारों तक पहुंचाना चाहिए और सामाजिक धब्बा मिटा देना चाहिए.’’

 

टीबी से जुड़ी सामाजिक सोच, दवा में लापरवाही और उपचार में बाधा जैसी कुछ वजहें टीवी के प्रसार के लिए जिम्मेदार हैं जिनसे लड़ने के लिए टीबी अलर्ट के साथ लिली एमडीआर-टीबी साझेदारी भारत के केंद्रीय टीबी विभाग की देखरेख में इस बीमारी के उपचार को सुगम बनाने की दिशा में मदद कर रही है.

 

इस संबंध में ऐसे इलाकों में स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को दुरस्त किया जा रहा है जहां दवाएं और चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. इसी तरह का एक इलाका बुराड़ी है जहां टीबी कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं.

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