'टीचर्स डे' आज, राष्ट्रपति करेंगे शिक्षकों को सम्मानित

By: | Last Updated: Saturday, 5 September 2015 3:57 AM
Teacher’s day

नई दिल्ली : शिक्षक दिवस पर शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शिक्षकों को पुरस्कृत करेंगे. शिक्षा क्षेत्र में उल्लखनीय कार्य के लिए शिक्षकों को यह सम्मान दिया जाता है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की शिक्षक के रूप में प्रसिद्धि के कारण उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर सन 1888 को दक्षिण भारत में चेन्नई से 40 मील उत्तर-पूर्व में तिरूतनी में हुआ था.

 

इनका बचपन तिरूतनी और तिरूपती जैसे धार्मिक स्थानों पर बीता. वे आर्थिक रूप से बहुत कमजोर परिवार से थे. लेकिन, इसके बावजूद राधाकृष्णन के पिता ने उन्हें पढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किया. राधाकृष्णन की आरंभिक शिक्षा तिरूवल्लुर के गौड़ी स्कूल और तिरूपति मिशन स्कूल में हुई. इसके बाद में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई पूरी की.

उन्होंने कला में स्नातक तथा परास्नातक की उपाधि मद्रास विश्वविद्यालय से प्राप्त की. जब वे एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर रहे थे, तो उसी समय उनकी पहली किताब ‘द एथिक्स ऑफ द वेदांत एंड इट्स मैटीरियल प्रीसपोजिशन’ प्रकाशित हुई. इस किताब के प्रकाशन के बाद ही लोग उनकी प्रतिभा के कायल हो गए.

 

अप्रैल 1909 में राधाकृष्णन की नियुक्ति मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग में हुई. इसके साथ ही साथ इन्होंने भारतीय धर्म तथा दर्शन का गंभीर अध्ययन जारी रखा और दर्शन के एक ख्याति प्राप्त अध्यापक बने. सन् 1918 में डॉ. राधाकृष्णन मैसूर विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर नियुक्त हुए. तीन साल बाद उनकी नियुक्ति किंग जार्ज पंचम मानसिक तथा चारित्रिक विज्ञान कलकत्ता विश्वविद्यालय में हुई.

 

सन 1929 में डॉ. राधाकृष्णन को ऑक्सफोर्ड ने अध्यापन के लिए आमंत्रित किया. सन् 1936 से 1939 तक डॉ. राधाकृष्णन ऑक्सफोर्ड के विश्वविद्यालय में पूर्वी धर्म तथा नीतिशास्त्र संबंधों के प्रोफेसर रहे. सन् 1939 में ये ब्रिटिश एकेडमी के फेलो चुने गए. सन 1939-48 तक ये बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. इसके बाद इन्होंने भारत के राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की.

 

सन 1946-52 तक ये यूनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि दल के नेता रहे. ये सोवियत संघ में 1949-52 तक भारत के राजदूत रहे, 1952-62 तक भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति रहे तथा 1952 से 54 तक यूनेस्को की सामान्य सभा के अध्यक्ष रहे. इसी दौरान सन 1954 में उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया. इन्होंने सन 1953 से 1962 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार भी संभाला. सन 1962 में डॉ. राधाकृष्णन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के पश्चात् राष्ट्रपति बने तथा मई 1962 से मई 1967 तक अपना कार्यकाल पूरा किया.

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