तूफान से निकालने वाले शिक्षक हैं कहां?

By: | Last Updated: Friday, 4 September 2015 4:27 PM
teachers day special

हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकाल के

इस देश को बच्चों मेरे रखना संभाल के.

1954 में आई ‘जागृति’ फिल्म के इस गीत में बच्चों को एक शिक्षक उनकी जिम्मेदारी समझा रहा है. बच्चों में कुछ ऐसी ही समझ विकसित करने की उम्मीद देश को शिक्षकों से भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही बात 4 सितंबर को बच्चों के साथ संवाद में कही.  पीएम मोदी ने कहा कि मां तो सिर्फ जन्म देती है लेकिन शिक्षक जीवन देता है.

 

ये बात सर्वकालिक सत्य है. इसी संवाद के दौरान जम्मू-कश्मीर राज्य से कुलगाम की राबिया ने भी पीएम से सवाल पूछा था. राबिया ने पूछा कि उन्होंने स्कूल में ज्यादा सीखा या क्लास के बाहर. पीएम ने मुस्कुराते हुए बताया कि वो पढ़ाई में ऐसे ही थे लेकिन बाहर से उन्होंने बहुत कुछ सीखा. बच्चों के साथ सुनने वाले भी मुस्कुराए.

 

लेकिन राबिया के स्कूल पहुंच कर कुछ अलग ही महसूस होता है. अमीनु कुलगाम का केंद्रीय विद्याल. पता चला कि ये छोटा सा स्कूल एक प्राइवेट इमारत में चल रहा है यानी किराए की इमारत में है. सिर्फ इतना ही नहीं ये स्कूल में स्टॉफ भी अस्थाई है. बच्चे पीएम से संवाद से खुश हैं बस उनकी इतनी प्रार्थना है कि बिल्डिंग छोड़िए बस उनके टीचर स्थाई हो जाएं ताकि पढ़ाई बेहतर हो सके.

 

शिक्षकों की कमी सरकार भी मानती है

ये सिर्फ राबिया के स्कूल की दिक्कत नहीं है. साल 2010 में सरकार ने राज्यसभा में माना था कि देश में 12 लाख टीचरों की कमी है जिसमें से 5.23 लाख पोस्ट खाली पड़ी हैं. ये आंकड़ा पिछले पांच सालों में ज्यादा बदला नहीं है.

 

शिक्षा के अधिकार के लिए लड़ रही RTE फोरम के अम्ब्ररीश राय ने बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था “ हम करीब 5 लाख टीचरों की कमी महसूस कर रहे है. इसके अलावा 6.6 लाख टीचरों को ट्रेनिंग की जरूरत है. ये सारे आंकड़े निराश करते हैं” 

 

अस्थाई टीचरों से बढ़ेगी शिक्षा?

देश के 11 फीसदी प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ एक ही टीचर है. गया तो क्लास नहीं तो छुट्टी. टीचर ना होने की वजह से अस्थाई टीचर रखे जाते हैं. सिर्फ दिल्ली में ही 20 हजार अस्थाई टीचर मौजूद हैं.

 

दिल्ली में पक्के टीचरों की भर्तियों की बात सरकार कर चुकी है लेकिन देश के बाकी हिस्सों में ये कमी कैसे पूरी होगी ये बड़ा सवाल है.  ऐसे तमाम लोग हैं जो पढ़ाना चाहते हैं पर उनके पास नौकरी नहीं है, ऐसे तमाम शिक्षक भी मौजूद हैं जिन्हें नौकरी मिली है लेकिन पढ़ाने में उनका दिल नहीं लगता.

 

अच्छे टीचर कैसे आएं

शिक्षा राज्य का विषय है. टीचरों की भर्ती करने का जिम्मा राज्य सरकारों पर है. शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी समस्या और है अच्छे टीचरों की. 2011 में शुरू हुआ था टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट सिर्फ 15 फीसदी टीचर इस टेस्ट को पास कर पा रहे हैं. कम से कम चौदह राज्यों ने इस टेस्ट से छूट मांगी है ताकि वो टीचरों की भर्ती कर सकें. हकीकत ये है कि संस्थान तो खुल रहे हैं पर अच्छे टीचर तैयार नहीं हो पा रहे हैं.

 

दबाव में हैं टीचर

काफी सारे टीचरों को नजदीक से जानता हूं. कुछ अस्थाई टीचर ऐसे हैं जिनकी सैलरी पर प्रिसिंपल कुंडली मार कर बैठ गए, कुछ ऐसे हैं जिनका जमकर शोषण होता है. एबीपी संवाददाता पंकज झा ने एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें यूपी में भाड़े के टीचर रखे जाने का चलन का खुलासा किया गया था. जो सरकारी टीचर हैं वो तमाम सरकारी कामों के लिए उनका इस्तेमाल किए जाने से दुखी हैं. जो प्राइवेट टीचर हैं वो इसलिए परेशान हैं कि स्कूल का सारा काम घर तक जाता है.

 

शिक्षकों का गुणगान जरूर है, क्योंकि वो देश के भविष्य का तैयार करते हैं. पर सरकारों को अच्छे टीचरों को दुलारने और तैयार करने पर ही ध्यान देना चाहिए. वर्ना एक शिक्षाकर्मी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को ठेलता रहेगा और उसके अंदर का शिक्षक कभी भविष्य को जीवन नहीं दे पाएगा.

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