सबसे बड़ी दूरबीन के निर्माण के लिए सॉफ्टवेयर और मिरर देगा भारत

By: | Last Updated: Sunday, 14 December 2014 11:20 AM
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नई दिल्ली: भारत अबतक की सबसे बड़ी दूरबीन के निर्माण के लिए सॉफ्टवेयर, महत्वपूर्ण मिरर  और नियामक प्रणाली उपलब्ध कराएगा. इस वैश्विक परियोजना में अमेरिका, कनाडा, चीन और जापान आदि भी शामिल हैं.

 

तीस मीटर की यह दूरबीन हवाई द्वीप में मौना के शिखर से बस थोड़ा सा नीचे माउंट एवरेस्ट से आधी उंचाई पर लगेगी. यह खगोल विज्ञान की दृष्टि से सर्वथा अनुकूल स्थानों में से एक है जहां से कई रातों को स्पष्ट आकाश और स्थिर माहौल दिखाई देता है. यह दुनिया में ऑप्टिकल इंफ्रारेड उन्नत सबसे बड़ी वेधशाला होगी.

 

भारत की भूमिका नियामक प्रणाली और सॉफ्टवेयर तैयार करना होगी जो आंकड़े का संग्रहण करेगा. भारत करीब 92 पॉलिश किए दर्पण प्रदान करेगा.

 

इस परियोजना से जुड़ी भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की वैज्ञानिक जी सी अनुपमा ने कहा, ‘‘दर्पण की मोटाई 44 मिलीमीटर है. जापान उसके लिए शीशे देगा. पॉलिश करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि सटीकता के लिए सतह को चिकना करना होता है और खुरदुरापन मिटाना होता है. उसके लिए होसुर में एक विशेष केंद्र बनाया गया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रारंभ में, हम साल में दो दर्पण बनाएंगे. इसके लिए प्रौद्योगिकी हासिल करने के बाद हर पखवाड़े में एक दर्पण तैयार करेंगे.’’

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