लंबे समय तक कप्तानी नहीं मिलना बहुत बड़ी निराशा: तेंदुलकर

By: | Last Updated: Friday, 13 March 2015 9:20 AM
TENDULKAR WAS SAD BECAUSE OF CAPTINSHIP

एक टूर्नामेंट में सबसे अधिक अर्द्धशतकः भारत के सचिन तेंदुलकर ने 2003 विश्व कप में सात अर्द्धशतक लगाए थे.

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने आज खुलासा किया कि भारतीय क्रिकेट कप्तान के रूप में लंबा कार्यकाल नहीं मिलना उनके लिये ‘बहुत बड़ी निराशा थी जिससे उबरना उनके लिये बहुत मुश्किल रहा.’

 

तेंदुलकर को अपने 24 साल के चमकदार करियर के दौरान दो बार भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गयी लेकिन वह इसमें खास सफल नहीं रहे. वह पहली बार 1996 में कप्तान बने लेकिन टीम के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें 1997 में इस पद से हटा दिया गया.

 

तेंदुलकर ने आज कहा कि कप्तान के रूप में लंबा कार्यकाल नहीं मिलना उनके लिये बहुत बड़ी निराशा थी. तेंदुलकर ने एक इवेंट में कहा, ‘‘मेरे लिये क्रिकेट व्यक्तिगत नहीं बल्कि टीम खेल है. ऐसा समय आता है जबकि कप्तान अपनी भूमिका निभाता है. वह मैदान पर महत्वपूर्ण फैसले करता है लेकिन आखिर में बल्लेबाजों को ही रन बनाने होते हैं और गेंदबाजों को ही सही क्षेत्र में गेंद करनी पड़ती है.’’

 

 उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कप्तानी के पहले कार्यकाल में 12 . 13 महीने बाद ही पद से हटा दिया गया. यह निराशाजनक था क्योंकि आपको यह सोचकर कप्तान बनाया गया कि आप टीम को आगे बढ़ाएंगे और यदि आपका कार्यकाल लंबा नहीं रहता है तो सफलता की दर शून्य हो जाती है. यदि आप चार मैच खेलते हो और उनमें से दो में जीत दर्ज करते हो तो आपकी सफलता की दर का 50 प्रतिशत ही रहती है. ’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मेरा कार्यकाल लंबा नहीं था और मेरे लिये इस बड़ी निराशा से उबरना बहुत बड़ी चुनौती थी. ’’

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Web Title: TENDULKAR WAS SAD BECAUSE OF CAPTINSHIP
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