दिल्ली में भी टेरर-अलर्ट जारी, एयरपोर्ट पर एंटी-टेरेरिस्ट स्क्वॉड के खास कमांडोज़ तैनात

By: | Last Updated: Wednesday, 2 December 2015 5:46 AM
Terror alert in delhi

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: पहले पेरिस और फिर अफ्रीकी देश माली में हुए आतंकी हमलों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में भी टेरर-अलर्ट जारी कर दिया गया है.

 

दिल्ली एयरपोर्ट पर तो बाकयदा एक खास कमांडो दस्ते को तैनात कर दिया गया है. इसी कड़ी में सुबह के वक्त दिल्ली पुलिस के डीसीपी डी के गुप्ता एयरपोर्ट विंग की एंटी-टेरेरिस्ट स्क्वॉअड के कमांडोज़ को खास दिशा-निर्देश दे रहे हैं.

 

डीसीपी डीके गुप्ता के नेतृत्व में ही तैयार हुआ है दिल्ली पुलिस का ये खास कमांडोज का दस्ता जिसकी जिम्मेदारी है एयरपोर्ट पर किसी भी आतंक हमले को समय रहते रोकना और आतंकियों से लोहा लेना.

 

इस स्कावयड में कुल 40 कमांडो हैं जो 12-12 की तीन टुकड़ियों में एयरपोर्ट और उसके आसपास तैनात रहते हैं. इन कमांडो की कड़ी ट्रैनिंग दिल्ली पुलिस के झड़ोदा-कलां ट्रैनिंग कॉलेज और एनएसजी के मानेसर स्थित ऑपरेशनल हेडक्वार्टर में हुई है. इन्हे अत्याधुनिक एक-47 और इजरायल की एमपी-फाइव गन से लैस किया गया है. एक मिनी वैन भी दी गई है ताकि ये मोबाइल कमांडो यूनिट के तौर पर काम कर सकें.

 

दिल्ली एयरपोर्ट हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रहता है और इसीलिए हमेशा से संवेदनशील माना जाता है. साथ ही प्लेन हाई-जैकिंग का खतरा भी हमेशा मंडराता रहता है. ऐसे में दिल्ली पुलिस के इस कमांडो दस्ते की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.

 

लेकिन सवाल खड़ा होता है कि देश में आतंकी हमलों और प्लेन हाईजैकिंग से निपटने के लिए एनएसजी और स्वॉट (SWAT) टीमें पहले से ही हैं तो फिर दिल्ली पुलिस की एयरपोर्ट विंग को एक अलग कमांडो स्क्वॉयड की जरूरत क्यों पड़ी.  दरअसल, एनएसजी या दूसरी स्पेशिलिस्ट टीम को पहुंचने में थोड़ा वक्त लग सकता है ऐसे में दिल्ली पुलिस की ये दस्ता उस वक्त तक आतंकियों को रोक सकता है जबतक की एनएसजी के कमांडो मोर्चा ना संभाल लें.

 

साथ ही एयरपोर्ट पर पहले से तैनात सीआईएसएफ के कमांडोज़ को सप्लीमेंटरी सपोर्ट कर सकें क्योंकि सीआईएसएफ का कमांडो दस्ता सिर्फ एयरपोर्ट टर्मिनल और उसके आसपास ही तैनात रहता है.

 

दिल्ली पुलिस की कमांडो यूनिट मोबाइल है जो एयरपोर्ट के दोनों टर्मिनल और एयरोसिटी के आसपास राउंड द क्लॉक घूमती रहेगी. एनएसजी की स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) का बेस भी दिल्ली एयरपोर्ट के बेहद करीब है (पांच मिनट हे भी कम दूरी पर). लेकिन वो स्टेटिक बेस है. सीआईएसएफ की कमांडो यूनिट ई एयरपोर्प पर हमेशा तैनात रहती है.

 

इस एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड को बनाने की एक वजह ये भी है कि बहुत संभव है कि एयरपोर्ट पर हमला करने के लिए आतंकी सड़क के रास्ते आएं तो ऐसे में ये दस्ता उनसे निपटने के लिए बेहद कारगर साबित होगा. क्योंकि ये कमांडोज़ मोबाइल स्क्वॉयड की तरह काम करते हैं. इन्हे एक मोबाइल-वैन दी गई है जिसपर ये हमेशा दिल्ली एयरपोर्ट को शहर से जोड़ने वाली सभी सातों सड़कों अपने अत्याधुनिक एके-47 और एमपी-फाइव गन जैसे हथियारों से नजर रखते हैं.

 

दिल्ली पुलिस की इस खास स्क्वॉअड को बनाने का एक और कारण ये है कि दिल्ली एयरपोर्ट के दो टर्मिनल-डोमेस्टिक और इंटरनेशनल के साथ-साथ एयरोसिटी भी है. एयरोसिटी पर कई बड़े होटल है.

 

मुंबई का 26/11 हमला हो या फिर हाल ही में अफ्रीकी देश माली का अटैक, आतंकियों के लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट होते हैं होटल. ये दस्ता एयरोसिटी के होटलों की सुरक्षा भी करेगा.

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