नवेद के पिता ने कहा- मैं ही अभागा उसका पिता हूं: हिन्दुस्तान टाइम्स

By: | Last Updated: Thursday, 6 August 2015 11:31 AM

नई दिल्ली: जिंदा पकड़े गए आतंकी नवेद के पाकिस्तानी होने का एक और सबूत सामने आया. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में नवेद के पिता ने कबूल किया है कि नवेद उसका ही बेटा है.

 

अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने दावा किया है कि उसने गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे के करीब पाकिस्तान में मौजूद मोहम्मद याकूब से फोन पर बात की जो उधमपुर में पकड़े गए आतंकी नवेद का पिता है. अखबार के मुताबिक एक मिनट 20 सेकेंड की बातचीत में मोहम्मद याकूब ने कहा कि मैं मारा जाऊंगा. लश्कर और फौज हमारे पीछे पड़े हैं. आप भारत से कॉल कर रहे हैं. हम मारे जाएंगे. मैं अभागा पिता हूं. लश्कर हमारे पीछे पड़ा है. लश्कर चाहता था कि नवेद मारा जाए, जिंदा ना पकड़ा जाए. कृपया उसे छोड़ दीजिए.

पाकिस्तान में आतंकी नवेद के पिता सामने आए 

हिंदुस्तान टाइम्स का दावा है कि नवेद ने पूछताछ के दौरान अपने पिता का फोन नंबर बताया था लेकिन गुरुवार को हुई बातचीत के बाद से उनका फोन नंबर स्विच ऑफ आ रहा है.

 

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में जिंदा पकड़ा गया पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नवेद उर्फ उस्मान कई राज खोल रहा है. नवेद जम्मू में ही है और एनआईए उससे पूछताछ कर रही है. नवेद ने ये खुलासा किया है कि उसने पाकिस्तान में 21 दिन तक ट्रेनिंग ली थी. नवेद ने ये भी बताया है कि वह एक चरवाहे की मदद से भारत में घुसा था.

जिंदा आतंकी नवेद खोल रहा है राज  

 

नवेद ने कहां ली ट्रेनिंग ?

नवेद को किसने दी ट्रेनिंग ?

कहां से हुआ भारत में दाखिल ?

कैसे हुआ भारत में दाखिल ?

किसकी मदद से हुआ दाखिल ?

 

आतंकी नवेद सीमा पार रची गई साजिशों के खुलासे कर रहा है

 

कहां ली आतंकी नवेद ने ट्रेनिंग ?

 

आतंकी नवेद ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उसने मुजफ्फराबाद के गाड़ी-हबीबुल्लाह के ट्रेनिंग कैंप में 21 दिन की ट्रेनिंग ली थी और पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर मानशेरा के पास शिवाइनाला में भी 21 दिन ट्रेनिंग ली थी. सीमा पार पाकिस्तान के गाड़ी-हबीबुल्लाह में आतंकी नवेद के साथ 200 और आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही थी. और भारत में घुसपैठ से पहले इसकी मुलाकात लश्कर के ऑपरेशनल कमांडर और हाफ़िज़ सईद के बेटे तल्ला सईद से भी हुई थी.

 

नवेद को लश्कर ने करीब 45 दिन पहले गाड़ी हबीबुल्लाह में अपने कैंप से कश्मीर के टंगमर्ग-गुलमर्ग सेक्टर से घुसपैठ करवाई थी. और उसे भारत एक चरवाहा लेकर आया था. नवेद ने पूछताछ में ये भी बताया कि उसके साथ नोमान समेत तीन और आतंकियों से सीमा से घुसपैठ की जिनमें से नोमान उसके साथ रहा जबकि दो अन्य आतंकी कहां गए इसकी जानकारी नवेद को नहीं है. नोमान बुधवार को बीएसएफ के काफिले पर हमले के बाद मारा गया था और वहीं से नवेद फरार होकर एक गांव में छिपा था जहां से उसे पकड़ लिया गया.

 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नोमान ने किसी और ट्रेनिंग कैंप में ट्रेनिंग ली थी. ट्रेनिंग में AK47, AK56, ग्रेनेड और आईईडी चलाना सिखाया गया था. कश्मीर में 45 दिन रहने के दौरान नवेद ने अपना अधिकतर समय लश्कर के आतंकियों के साथ और जंगलो में बिताया. कश्मीर में उसकी मुलाकात लश्कर के कमांडर अबु कासिम से भी हुई थी.

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भारत में कैसे दाखिल हुआ नवेद ?

 

लश्कर ने नवेद को मंगलवार को कश्मीर से एक आटे से भरे ट्रक में जम्मू के लिए रवाना किया. मंगलवार शाम को नावेद और नोमान जम्मू के पटनीटॉप और कुद के बीच किसी होटल में रुके और वहां खाना भी खाया. बुधवार सुबह से वो होटल की खिड़की से ही जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही देखता रहा. जैसे ही उन्हें बीएसएफ का काफिला दिखा दोनों ने उसे ही अपना निशाना बनाने की साजिश रची.

 

सूत्रों के मुताबिक नावेद ने बताया है कि जैसे ही नोमान ने इस हमले को अंजाम दिया और वो सुरक्षाबलों की फायरिंग में मारा गया – वो काफी डर गया था ओर वहां से भागना चाहता था.

 

नावेद ने पूछताछ के दौरान कहा है कि उसे मारने से या पकड़ने से आतंकवाद काबू नहीं होगा, आतंकवाद को मिटाना है तो सीमा पार बैठे कमांडरों को काबू करना चाहिए.

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