आखिर संस्कृत पर विवाद क्यों हो रहा है?

By: | Last Updated: Sunday, 23 November 2014 1:19 PM

नई दिल्ली: केन्द्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाए जाने का मानव संसाधन विकास मंत्री ने एलान क्या किया, देश भर में इसपर विवाद शुरू हो गया है. अभिभावक मामले को लेकर कोर्ट पहुंच चुके है. ये भी सवाल पूछा जा रहा है कि क्या सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले बाकी स्कूलों में भी आने वाले दिनों में यही होगा?

 

इन सवालों के बीच सबसे अहम सवाल ये कि तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत या दूसरी देसी भाषा पढ़ाए जाने के पक्ष और विपक्ष में क्या तर्क है. संस्कृत वेदों की भाषा है, भारत की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है. आज यही भाषा विवादों में है.

 

विवाद की वजह बना मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक फैसला. 27 अक्टूबर को केंद्रीय विद्यालयों की बैठक में मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया. इस आदेश के मुताबिक थ्री लैंग्वेज फार्मूले के तहत केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन की जगह भारतीय संविधान में लिखी गई 22 भाषाओं में से कोई एक पढ़ाई जाएगी. इसके बाद इस पर जोरदार चर्चा शुरू हो गई. 14 नवंबर को पहली बार जब ये मामला उठा तब मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जानबूझकर हंगामा खड़ा किया जा रहा है.

 

स्मृति ईरानी के मुताबिक पिछली सरकार और केंद्रीय विद्यालय के बीच हुए समझौते में जर्मन पढ़ाने की बात तय हुई थी जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के खिलाफ है.

 

उस समझौते के तीन साल पूरे हुए तो अब इसके रिव्यू की जरूरत थी. लेकिन जब स्मृति ईरानी ने समझौते का अध्ययन किया तो कई दिक्कतें थीं.

 

पिछली सरकार के समझौते में दिक्कत क्या?

 

पहली दिक्कत ये कि तीसरी भाषा के तौर पर विदेशी भाषा पढ़ाई जाए ये राष्ट्रीय शिक्षा नीति के खिलाफ था.

 

समझौते के मुताबिक संस्कृत पढ़ा रहे शिक्षकों को ही जर्मन पढ़ाने के लिए ट्रेन किया जाए. एक सवाल ये उठा कि क्या जर्मनी में संस्कृत को अपने देश के भाषा के तौर पर स्वीकार किया जाएगा?

 

मामला कोर्ट में भी गया. संस्कृत शिक्षक संघ ने याचिका दायर कर कहा कि तीसरी भाषा के तौर पर विदेशी भाषा पढ़ाना नीति के खिलाफ है. सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरोध में सरकार कोई कदम नहीं उठाएगी.

 

मामले ने इतना तूल पकड़ा की प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब जी-20 के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे  और वहां भी जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और नरेंद्र मोदी की मुलाकात में ये मामला जर्मनी की तरफ से उठाया गया. इसके बाद यहां भी जर्मन एमबैसडर और संसकृत शिक्षक संघ के अधिकारियों के बीच मुलाकात हुई. लेकिन कोई हल नहीं निकला. अब संस्कृत शिक्षक संघ चाहता है कि बाकी स्कूलों में भी इसे लागू किया जाए.

 

क्या है थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला?

 

छठी से लेकर आठवीं तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ाई जाए. हिंदी, अंग्रेजी और तीसरी कोई भी भाषा जो देश की मान्य 22 भाषाओं की सूची में हो.

 

कक्षा आठवीं तक सभी राज्य पर इसे पूरा करने का दारोमदार होता है.

 

नौवीं में ये जिम्मेदारी CBSE या ICSE पर होती है. CBSE के मुताबिक नौवीं के बच्चे को तीन भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए.

 

विवाद बढ़ा तो स्मृति ईरानी ने सफाई दी. पीटीआई को ईरानी ने कहा कि जो मुझ पर आरएसएस का प्रतिनिधि होने का आरोप लगाते हैं वो शायद हमारे अच्छे कामों से ध्यान भटकाना चाहते हैं. हमारे अच्छे काम से ध्यान भटकाने के लिए ये एजेंडा चलता रहेगा और मुझ पर आरोप लगते रहेंगे. मैं इसके लिए तैयार हूं. मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है.

 

स्मृति ने पाठ्यक्रम में संस्कृत को अनिवार्य बनाए जाने से भी इनकार किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर संस्कृत पर विवाद क्यों हो रहा है?

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Web Title: third language and controversy
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