असहिष्णुता का विरोध जताने के लिए पुरस्कार लौटाने वालों पर अरुण जेटली का हमला

By: | Last Updated: Friday, 30 October 2015 3:06 AM

पटना: बुद्धिजीवियों के एक वर्ग में, असहिष्णुता को लेकर बढ़ते विरोध और पुरस्कारों को लौटाये जाने को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है जिसमें केन्द्र ने कहा कि यह विरोध ‘‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’’ हैं जबकि प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि मोदी सरकार विचलित हो गयी है.

 

केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने लेखकों, कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और वैज्ञानिकों द्वारा पुरस्कार लौटाने वालों पर अपना हमला तेज करते हुए उन्हें ‘‘कट्टर भाजपा विरोधी तत्व’’ करार दिया और कहा कि वह अपनी इस बात पर कायम हैं कि उनका विरोध ‘बनावटी बगावत’ है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इन विरोधों को राजनीतिक षड्यंत्र बताया और इस बात पर आश्चर्य जताया कि वे तब क्या कर रहे थे जब कांग्रेस के शासन में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे.

 

जेटली ने संवाददताओं से कहा, ‘‘पुरस्कार लौटाने वाले लोग अन्य माध्यमों से राजनीति कर रहे हैं. उनके ट्वीट और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर उनके रूख को देखिये. आप उनमें बहुत से कट्टर भाजपा विरोधी तत्व पाएंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उसे पहले ही बनावटी बगावत कहा था. मैं अपने उस वाक्यांश पर कायम हूं. मुझे लगता हैं कि जिस प्रकार से घटनाएं सामने आ रही है, उससे लगता है कि उस तरह का बनावटी काम तेज गति से चल रहा है.’’ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि जेटली की बनावटी बगावत संबंधी टिप्पणी से आलोचना के प्रति असहिष्णुता झलकती है.

 

जाने-माने वैज्ञानिक पुष्प मित्र भार्गव ने अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा की और इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनका कदम राजनीतिक रूप से प्रेरित है. उन्होंने कहा, ‘‘असहमति असहमति होती है और किसी विशिष्ट बिन्दु पर आप असहमत होते हैं.’ लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सरकार विचलित और घबरायी हुई है क्योंकि इस तरह से भारी जन प्रतिक्रिया मिल रही है. वह इस तरह से व्यवहार कर रही है तथा यह कोई बुद्धिमत्तापूर्ण तरीका नहीं है.’’ जवाहरलाल नेहरू की भांजी नयनतारा सहगल ने दादरी घटना के विरोध में अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था.

 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘असहाय लोगों के साथ जो हो रहा है, देश उससे गुस्से में है. लोगों को मारा जा रहा है, उनके चेहरे पर स्याही फेंकी जा रही है, जिन्हें नृशंस तरीके से धमकाया जा रहा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हिंदुत्व की विचारधारा द्वारा सामंजस्य समाप्त किया जा रहा है. पहले उन्होंने हमें बांटा. अब वे हमें फिर से हिंदुओं और अन्य के रूप में बांट रहे हैं. हम हिंदू या अन्य नहीं हैं. हम भारतीय हैं.’’ गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह इस बात को निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि यह :पुरस्कारों का लौटाना: राजनीतिक कारणों से हो रहा है.

 

केन्द्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं वे भारत की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं ‘‘वे हिन्दुओं की छवि भी धूमिल करना चाहते हैं . प्रतीत हो रहा है कि वे अपने एजेंडे पर चल रहे हैं.’’ भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने कहा कि विरोध करने वालों का एकमात्र एजेंडा है कि भाजपा एवं प्रधानमंत्री की हर समय आलोचना की जाए.

 

उन्होंने भार्गव को ‘‘मोदी को घृणा करने वाली ब्रिगेड’’ का सदस्य और सोनिया गांधी की तारीफ करने वाला करार दिया.

 

प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक जी माधवन नायर ने वैज्ञानिकों एवं लेखकों द्वारा देश में ‘‘बढ़ती असहिष्णुता’’ का आरोप लगाते हुए उनके पुरस्कार लौटाये जाने के कदम को आज खारिज करते हुए इसे महज एक ‘‘दिखावा’’ करार दिया.

 

माकपा भी सांप्रदायिक घटनाओं का विरोध करने वाले वैज्ञानिकों के समर्थन में सामने आयी. पार्टी ने कहा कि वह इस असहिष्णुता के माहौल से बुरी तरह चिंतित वैज्ञानिक समुदाय के साथ एकजुटता दिखाती है जिसमें तीन तर्कवादियों की जान गयी. पार्टी ने फेसबुक की एक पोस्ट के जरिये यह समर्थन जताया.

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Web Title: Those returning awards are rabid anti-BJP elements: Arun Jaitley
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