पंजाब के तीन प्रख्यात लेखकों ने अकादमी पुरस्कार लौटाए

By: | Last Updated: Monday, 12 October 2015 3:23 AM

नयी दिल्ली : देश में कथित तौर पर सांप्रदायिक माहौल की लगातार खराब होती स्थिति के खिलाफ साहित्यकारों का बढ़ता विरोध पंजाब पहुंच गया है. पंजाब से तीन प्रख्यात लेखकों गुरबचन भुल्लर, अजमेर सिंह औलख और आत्मजीत सिंह अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर दी है.

 

भुल्लर ने कहा कि हाल के समय में देश के सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने की कोशिश करते हुए एक कार्य योजना के तहत साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र को खासतौर पर निशाना बनाया गया है. यह मुझे चिंतित कर रहा है. पंजाब के बठिंडा में जन्में 78 वर्षीय भुल्लर को उनकी लघु कथा पुस्तक ‘अग्नि कलश’ को लेकर 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था. प्रख्यात पंजाबी लेखक औलख ने कहा कि प्रगतिशील लेखकों, तर्कवादी लेखकों पर हमले और शिक्षा एवं संस्कृति के जबरन भगवाकरण से वह बहुत आहत हैं.

 

उन्होंने कहा कि वह देश में बनाए जा रहे सांप्रदायिक माहौल से परेशान हैं और केंद्र सरकार धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक देश के प्रतिनिधि के तौर पर अपना कर्तव्य नहीं निभा रही है. जाने माने पंजाबी थियेटर शख्सियत आत्मजीत सिंह ने आज कहा कि वह अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा रहे हैं. क्योंकि, पिछले कुछ महीनों से देश में साम्प्रदायिक वैमनस्य की घटनाओं से वह बहुत आहत हैं.

 

इस बीच, कवि एवं आलोचक आदिल जुस्सावाला ने आज साहित्य अकादमी से लेखकों की अस्वीकार्य सेंसरिंग की निंदा करने की अपील की. उन्हें 2014 में अकादमी ने सम्मानित किया था. उन्होंने अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को पत्र लिखा है. उन्होंने कलबुर्गी और अन्य तर्कवादियों नरेन्द्र दाभोलकर तथा गोविंद पानसरे की हाल में हुई हत्या का जिक्र करते हुए अकादमी से इन चीजों पर बोलने और इसकी निंदा करते हुए एक बयान जारी करने का अनुरोध किया.

 

सिंह ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘मैं मानता हूं कि अकादमी के नियम कायदे हैं लेकिन मुझे यह भी लगता है कि लेखक समुदाय के साथ जो कुछ हो रहा है उसकी उसे निंदा नहीं करनी चाहिए. दिसंबर में होने वाली अपनी कार्यकारिणी की बैठक का इंतजार करने के बजाय इसे फौरन ही इस विषय पर विचार करना चाहिए.’

 

उत्तर कश्मीर के 25 साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों की संस्था अदबी मारकाज कामराज (एएमके) के अध्यक्ष सुजात बुखारी ने यहां एक बयान में कहा, ‘वे अंतरआत्मा वाले लोग हैं और उन्होंने दिल की जुबान में बोला है.’ उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते साम्प्रदायीकरण और अपराधीकरण का विरोध करते हुए अपना पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों का अवश्य ही सभी को समर्थन करना चाहिए.

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Web Title: Three eminent writers from Punjab return Sahitya Akademi awards
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