शीना बोरा मर्डर : इन तीन पुलिस थानों ने बढ़ाई मिस्ट्री

By: | Last Updated: Sunday, 30 August 2015 3:48 PM
three police stations and its investigations

मुंबई : तीन पुलिस थानों का गुनाह. जी हां पुलिस थान वो जगह होती है जहां गुनाहों पर से पर्दा हटता है, लेकिन शीना बोरा हत्याकांड में खुद महाराष्ट्र पुलिस के 3 थाने कठघरे में हैं. इन तीनों थानों ने अगर अपनी जिम्मेदार निभाई होती तो शीना की हत्या से पर्दा उठने में 3 साल नहीं लगे. कौन हैं ये 3 थाने और कैसे इन्होंने शीना बोरा मामले में कानून से दगाबाजी की. इस सच से आपको एबीपी न्यूज़ रू-ब-रू करा रहा है.

 

शीना बोरा की हत्या साल 2012 में हुई और उसके 3 साल बाद अब जाकर उसका खुलासा हुआ है. इस मामले की तहकीकात 3 साल पहले ही शुरू हो जाती अगर महाराष्ट्र पुलिस के 3 थानों ने लापरवाही न बरती होती और अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई होती. इस मामले में पहला आरोपी पुलिस थाना है रायगढ जिले का पेण पुलिस थाना जिसकी हद में शीना की लाश बरामद हुई थी.

 

रायगढ़ के जंगल में शीना बोरा की लाश को जलाकर ठिकाने लगाया गया था. बैग में बंद शीना की जली हुई लाश मिली थी और लाश को देखकर पता चल रहा था कि ये किसी महिला की लाश है, लेकिन इस हालत में लाश पाकर भी पेण पुलिस थाने ने वो नहीं किया जो उसे कानूनी तौर पर करना चाहिये था. पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज नहीं किया.

 

मिलिए पास के ही गांव में रहने वाले रूपेश दलवी से, जो 23 मई 2012 को लाश निकाले जाते वक्त पुलिस की मदद के लिये आये थे. इन्होंने जिस हालत में लाश को देखा उससे ये साफ हो रहा था कि किसी महिला को मारकर उसकी लाश जंगल में ठिकाने लगाई गई है, लेकिन पुलिस ने फिर भी हत्या का मामला दर्ज नहीं किया.

 

आपराधिक मामलों के जानकार एडवोकेट अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि जब भी कोई लावारिश लाश बरामद होती है तो पुलिस उसकी शिनाख्त की कोशिश करती है, लेकिन पेण पुलिस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया.

 

23 मई 2012 की दोपहर को लाश बरामद होने के बाद पेण पुलिस ने पंचनामा किया, शव से हड्डियों और बालों के सैंपल लिये और 2 दिनों बाद 25 मई को उन्हें जेजे अस्पताल के एनाटॉमी विभाग जांच के लिये भेज दिया. इसके बाद न तो कोई हत्या का केस दर्ज किया गया और न ही एक्सीडैंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की गई जो कि आमतौर पर पुलिस ऐसे मामले में दर्ज करती है जिनमें मरने वाले शख्स की मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता. जेजे अस्पताल को सौंपे गये सैंपल की रिपोर्ट हासिल करने की जेहमत भी पेण पुलिस ने नहीं उठाई.

 

अब बात करते हैं इस मामले के पुलिस थाना नंबर 2 की. दूसरा पुलिस थाना मुंबई पुलिस का वही खार पुलिस थाना है जो कि फिलहाल शीना बोरा हत्याकांड की जांच कर रहा है. जब राहुल मुखर्जी को अंदेशा हुआ कि शीना बोरा गायब हो गई है और उसके साथ कुछ गलत हुआ है तो वो सबसे पहले इसी पुलिस थाने में शिकायत करने पहुंचा, लेकिन तब खार पुलिस थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उसकी शिकायत नहीं ली.

 

राहुल खार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने इसलिये आया था क्योंकि 24 अप्रैल 2012 को अपनी गर्ल फ्रेंड शीना के गायब होने से पहले उसने शीना को नेशनल कॉलेज के पास इसी जॉकी शोरूम के बाहर अपनी कार से ड्रॉप किया था. ये इलाका खार पुलिस थाने की हद में आता है. राहुल ये जानता था कि शीना अपनी मां इंद्राणी से मिलने गई थी जिसके साथ उसकी अनबन चल रही थी. शीना की इंद्राणी के साथ इसी मुलाकात के बाद राहुल से उसका संपर्क खत्म हो गया था. राहुल ने उसके मोबाइल पर कई फोन किये लेकिन शीना ने नहीं उठाया. बदले में शीना के मोबाइल से एक एसएमएस आया कि वो अब उसके साथ संबंध नहीं रखना चाहती. राहुल को ये बात अटपटी लगी. उसने इंद्राणी से शीना के बारे में पूछा तो इद्राणी ने राहुल को बताया कि शीना अमेरिका चली गई है. राहुल के गले ये बात नहीं उतरी और वो खार पुलिस थाने शिकायत करने गया, लेकिन खार पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया. अगर खार पुलिस ने राहुल की शिकायत दर्ज करके अपनी तहकीकात शुरू कर दी होती तो शायद काफी पहले कानून के हाथ कातिल तक पहुंच गये होते.

 

अब बात करते हैं इस मामले के तीसरे आरोपी पुलिस थाने की. ये पुलिस थाना है मध्य मुंबई का वरली पुलिस थाना. जब खार पुलिस ने राहुल की शिकायत नहीं ली तो वो वरली पुलिस थाने में शिकायत लेकर आया. वरली पुलिस थाने से कुछ ही फासले पर राहुल का घर है. मारलो नाम की इमारत में पीटर मुखर्जी अपने परिवार के साथ रहते हैं. राहुल को लगा कि शायद यहां उसकी फरियाद सुनी जायेगी.

 

लेकिन यहां भी राहुल को निराशा ही हाथ लगी. पुलिस थाने ने ये कहकर शिकायत नहीं ली कि शीना वोरा न तो वर्ली पुलिस थाने की हद में रहती थी और न ही इस थाने की हद से गायब हुई है. इसलिये वरली पुलिस शिकायत नहीं ले सकती. कानूनी जानकारों के मुताबिक वर्ली पुलिस का इस तरह से राहुल मुखर्जी का शिकायत लेने से मना कर देना गलत था. वरली पुलिस जीरो नंबर की एफआईआर लेकर उसे संबंधित पुलिस थाने में भेज सकती थी, लेकिन वरली पुलिस ने ऐसा नहीं किया.

 

शीना हत्याकांड की तहकीकात की शुरुआत 3 साल बाद ही हो सकी. ये मामला तब ही सामने आ पाया जब पुलिस ने 21 अगस्त 2015 को इंद्राणी के ड्राईवर श्याम राय को हथियार के साथ गिरफ्तार किया. पुलिसिया पूछताछ में उसने कबूल किया कि 3 साल पहले उसने शीना बोरा की हत्या में इंद्राणी मुखर्जी और संजीव खन्ना की मदद की थी.

 

इस मामले में भी महाराष्ट्र पुलिस के तीनों थानों ने वही किया जो आमतौर पर देशभर की पुलिस करती है. जब भी कोई शिकायतकर्ता थाने में शिकायत लेकर जाता है तो पुलिस काम बढ जायेगा इस डर से शिकायत न लेने के लिये बहाने बनाती है. यही वजह है कि शीना बोरा की हत्या की तहकीकात शुरू होने में 3 साल लग गये.

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Web Title: three police stations and its investigations
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