बाघ के बच्चे बनेंगे भारतीय कूटनीति का हिस्सा?

By: | Last Updated: Tuesday, 20 January 2015 4:28 PM
tiger baby

नई दिल्ली: चीन की पांडा कूटनीति की तर्ज पर भारत विभिन्न देशों को बाघ के शावक प्रदान करेगा जिन्हें उन्हें इस प्रजाति के संरक्षण के वैश्विक प्रयास के तहत जरूरत हो है क्योंकि देश (भारत) में हाल के वर्षों में बड़ी तेजी से बाघों की संख्या बढ़ी है.

 

पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बाघ वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव संरक्षकों एवं बाघ संरक्षित क्षेत्रों के क्षेत्रीय निदेशकों की दो दिवसीय बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘ भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शावक बाघ देने और वैश्विक बाघ संरक्षण प्रयास में अहम भूमिका निभाने का इच्छुक है. ’’ यह बयान ऐसे दिन आया जब नवनीतम आंकड़े से पता चला है कि बाघ की संख्या वर्ष 2010 से 30 फीसदी बढ़कर वर्ष 2014 में 2,226 हो गयी है. बाघों की पिछली गणना 2010 में हुई थी.

 

जावडेकर ने कहा, ‘‘कई देशों ने हमसे मदद मांगी है. ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया समझ गयी है कि इस प्रजाति को बचाने की जरूरत है क्योंकि यह विलुप्त हो सकती है … जो भी देश हमसे बाघ मांगेगा या (बाघ संरक्षण में) सहयोग मांगेगा हम दोनों देने को तैयार हैं. ’’ जब जावडेकर से पूछा गया कि क्या शावक बाघ के बदले शुल्क लिया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि ये सारे मुद्दे बाद की बात है.

 

पांडा कूटनीति के तहत चीन अन्य देशों को कूटनीतिक उपहार के रूप में विशाल पांडा भेंट करता है. चीन ने 1950 के दशक में पांडा कूटनीति बहाल की थी और हाल के दशकों में यह परंपरा सुविदित हो गयी है.

 

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अधिकारियों ने कहा कि कंबोडिया और लाओस जैसे देशों ने इस संबंध में अनौपचारिक रूप से भारत से संपर्क किया है लेकिन ‘औपचारिक ‘ तौर पर अभी कुछ नहीं किया गया है. प्राधिकरण के सदस्य सचिव राजेश गोपाल ने बताया कि कंबोडिया जैसे देशों में बाघ विलुप्त हो गए हैं और इन देशों ने स्थिति पलटने के लिए अनौपचारिक रूप से भारत का सहयोग मांगा है.

 

सरकार ने वर्ष 2006 से 10 साल से भी कम समय में बाघों की संख्या में 800 से भी अधिक की वृद्धि को एक सफल कहानी बताया. वर्ष 2006 में देश में 1411 बाघ थे.

 

एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक जैवविविधता वाले पश्चिम घाट क्षेत्र के तीन राज्यों में पारिस्थिति निरंतरता विश्व में इस सबसे अधिक बाघों की संख्या के लिए अहम रहा है.

 

आज जारी नवीनतम बाघ गणना रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र के राज्यों में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी और देश में सबसे अधिक 406 बाघ कर्नाटक में हैं.

 

वर्ष 2014 की बाघ आकलन रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ दुनिया में सबसे अधिक बाघ मुदुललाई-बांदीपुर-नगरहोल-वायनाड परिसर में हैं, वहां 570 से अधिक बाघ हैं.’’ यह क्षेत्र कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में है. रिपोर्ट पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जारी की. केरल और तमिलनाडु में क्रमश: करीब 136 और 229 बाघ हैं.

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