फर्जी डिग्री विवाद: जीतेंद्र तोमर को नहीं मिली अंतरिम जमानत

By: | Last Updated: Thursday, 11 June 2015 6:27 AM

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र तोमर की मुश्किलें अभी खत्म नहीं होने वाली हैं. दिल्ली की साकेत कोर्ट ने तोमर को अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया है. तोमर कल से दिल्ली पुलिस के साथ फैजाबाद में हैं.

आज  दिल्ली की साकेत कोर्ट ने जीतेंद्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री मामले में जमानत के लिए अपील पर सुनवाई 16 जून तक के लिए टाल दी है. अंतरिम जमानत के लिए तोमर का आग्रह खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इससे मामला और ‘उलझ’ जाएगा.

 

आज पुलिस तोमर को लेकर पुलिस बिहार जा सकती हैं. अवध यूनिवर्सिटी में तो तोमर सच साबित नहीं कर सके. भागलपुर की तिलका मांझी यूनिवर्सिटी में ला की डिग्री की जांच होनी है. दिल्ली पुलिस  की टीम और जितेन्द्र तोमर अभी फैज़ाबाद में ही है.

 

आपको बता दें कि तोमर को ग्रेजुएशन और लॉ की डिग्री एवं माइग्रेशन सर्टिफिकेट में कथित रूप से फर्जीवाड़ा करने को लेकर गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी के मामले दर्ज किए.

जीतेंद्र तोमर को कोर्ट ने नहीं दी जमानत 

तोमर पर आरोप है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में झूठ बोला था कि उनके पास कानून की डिग्री है. पुलिस ने कहा कि वह इस बात की भी जांच करेगी कि क्या फर्जी डिग्री का कोई रैकेट काम कर रहा है, जिसमें तोमर भी शामिल हैं.

 

मंगलवाल को अदालत ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद मंगलवार रात हाजत से ही अपने वकील के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया.

 

कपिल मिश्रा होंगे नए कानून मंत्री

दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा को जितेंद्र सिंह तोमर के स्थान पर आज दिल्ली सरकार का नया कानून मंत्री नामित किया गया. इस साल जब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी. तब भी 34 वर्षीय मिश्रा का नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में था हालांकि उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष बना दिया गया था.

 

आप ने तोमर की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

तोमर की गिरफ्तारी को बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है. तोमर को हिरासत में लेने के लिए पुलिस ने दलील दी कि आम आदमी पार्टी के नेता प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जो कि मुक्त रहने पर दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं.

 

आपको बता दें कि तोमर के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दो मामले लंबित हैं. एक में उनपर विधि में स्नातक की फर्जी डिग्री के आधार पर अपना नाम अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत कराने का आरोप है, जबकि दूसरा मामला उनका निर्वाचन रद्द करने की अपील से संबंधित है.

 

वहीं तोमर का कहना है कि उनकी कानून की डिग्री असली है. तोमर ने पुलिस की मौजूदगी में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह बेकसूर हैं और उनकी कानून की डिग्री असली है. उन्होंने कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं किया. मैं राजनीतिक साजिश का शिकार हूं.”

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