मीडिया स्वामित्व का मुद्दा: राजनीतिक संगठनों और व्यावसायिक घरानों पर पाबंदी के पक्ष में ट्राई

By: | Last Updated: Tuesday, 12 August 2014 3:08 PM

नई दिल्ली: समाचार और विचार को अनुचित प्रभाव से बचाने के लिए प्रसारण क्षेत्र के नियामक ट्राई ने प्रसारण के क्षेत्र में राजनीतिक दलों के प्रवेश पर रोक लगाने की सिफारिश की है. नियामक ने औद्योगिक घरानों के प्रवेश पर भी कई प्रकार की सीमाएं लगाने का सुझाव दिया है.

 

ट्राई के चेयरमैन राहुल खुल्लर ने मीडिया स्वामित्व संबंधी मुद्दों पर अपनी सिफारिशें जारी करते हुये आज यहां कहा, ‘‘स्वामित्व बड़ी चिंता का विषय है .. आप कैसे समझ पायेंगे कि एक टीवी चैनल जो भोपाल से चलता है और उसका स्वामित्व एक स्थानीय विधायक अथवा सांसद के पास है, वह सच्चाई पेश कर रहा है या सच्चाई को रंग दे रहा है. मीडिया में राजनीतिक स्वामित्व की एक समस्या यह है.’’ व्यावसायिक घरानों के प्रवेश के बारे में ट्राई ने कहा है कि यह देखना होगा कि उनके स्वामित्व वाले मीडिया प्रतिष्ठानों में संपादकीय टीम को कितनी स्वतंत्रता है.

 

खुल्लर ने कहा, ‘‘.. संपादकीय वास्तव में किस सीमा तक स्वतंत्र है और समाचार कक्ष और बोर्ड कक्ष के बीच की दीवार कितनी झीनी है. मीडिया प्रतिष्ठान पर व्यावसायिक घराने के नियंत्रण के दूसरी समस्या एडवरटोरियल (लेख और समाचार के कलेवर में प्रस्तुत विज्ञापन) और ‘‘प्राइवेट समझौतों’’ के आधार पर दिये जाने वाले समाचार .. मुझे यह कहते हुये खेद है कि यह सब बहुत बड़ा गोरखधंधा बन गया है. आप विज्ञापन को समाचार के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते.’’ ट्राई ने कहा है कि यदि इस तरह के किसी संगठन को पहले से मंजूरी दे दी गई है तो उनके लिये बाहर निकलने का विकल्प भी रखा जाना चाहिये.

 

मीडिया क्षेत्र में व्यावसायिक घरानों के बढ़ते प्रवेश पर अपनी सुझाव में ट्राई ने कहा है, ‘‘इसमें निहित हितों के टकराव को ध्यान में रखते हुये ट्राई का मानना है कि सरकार और नियामक को व्यावसायिक घरानों के मीडिया क्षेत्र में प्रवेश पर रोक के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिये.’’ मीडिया नियामक के मामले में ट्राई ने कहा, ‘‘सरकार को मीडिया का नियमन नहीं करना चाहिये. टीवी चैनलों और समाचार पत्रों दोनों के लिये एक ही नियामक प्राधिकरण होना चाहिये जिसमें मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों के जाने माने व्यक्तियों को शामिल किया जाना चाहिये. इसमें ज्यादातर मीडिया से बाहर के लोग होने चाहिये.’’ ट्राई ने यह भी कहा है कि सरकार और प्रसार भारती के बीच दूरी रखने के उपायों को मजबूत बनाना चाहिये और इसकी कामकाजी स्वतंत्रता और स्वायत्ता को बनाये रखने के उपाय किये जाने चाहिये.

 

मीडिया क्षेत्र में स्वामित्व संबंधी अपनी सिफारिशों में ट्राई ने कहा है कि समाचार और समसामयिक विषय अति महत्व के होते हैं तथा विचारों की बहुलता और विविधता से इनका सीधा सरोकार होता है, इसलिये मीडिया क्षेत्र की कंपनियों के बीच पारस्परिक हिस्सेदारी के नियमों को बनाते समय इसे ध्यान में रखकर विचार किया जाना चाहिये.

 

मीडिया के क्षेत्र में व्यावसायिक घरानों के प्रवेश पर पाबंदी के संबंध में टाई ने कहा है ‘इसमें नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के तहत किसी व्यावसायिक कंपनी द्वारा मीडिया कंपनी में शेयर भागीदारी या रिण की मात्रा को सीमित करने की व्यवस्था’’ की जा सकती है.ट्राई ने कहा है कि राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं सहित जिन्हें उसने मीडिया क्षेत्र में आने से रोकने की सिफारिश की है, ऐसी कंपनियों को अयोग्य घोषित करने और प्रसारण क्षेत्र के लिये नया कानून बनने तक उसकी सिफारिशों को कार्यकारी निर्णय के जरिये लागू किया जाना चाहिये.

 

नियामक ने कहा है कि मीडिया क्षेत्र में कार्यरत मौजूदा कंपनियों को नियमों का अनुपालन करने के लिये अधिक से अधिक एक साल का समय दिया जाना चाहिये. ‘पेड न्यूज’ के मामले में ट्राई ने कहा है कि इसके लिए मीडिया कंपनी और अनुकूल समाचार के लिए धन देने वाले व्यक्तियों दोनों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए चाहे वह सांसद अथवा विधायक जो भी हो.

 

ट्राई ने हालांकि, यह भी कहा है कि विज्ञापनों के रप में प्रकाशित लेखों के मामले में स्पष्ट तौर पर बड़े बड़े अक्षरों में यह लिखा जाना चाहिये कि ‘इसके लिये भुगतान किया गया है.’ नियामक ने कहा है कि ऐसा प्रावधान भी होना चाहिए जिसके तहत मीडिया कंपनियों को लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण और प्रस्तावित मीडिया नियामक के पास अपने शेयरधारकों, कंपनी में विदेशी निवेश, निदेशक मंडल की स्थिति और कर्ज आदि के बारे में बराबर पूरी रपट देनी चाहिये और ये सूचनाए सार्वजनिक होनी चाहिए.

 

मीडिया कंपनियों को अपने दस बड़े विज्ञापनदाताओं, ग्राहकों और विज्ञापन दरों तथा कमाई की भी जानकारी देनी चाहिये.

 

उसने कहा है कि क्षेत्र के कानूनों और कानूनी ढांचे का समग्र मूल्यांकन करने की जरूरत है ताकि क्षेत्र में एक दीर्घकालिक संस्थागत प्रणाली स्थापित की जा सके.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: trai_media
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017