'26/11 हमलों से पहले भी की गईं थी दो नाकाम कोशिशें'

By: | Last Updated: Monday, 8 February 2016 8:13 PM
TWO ATTEMPTS FAILED BEFORE 26/11 ATTACKS: HEADLEY

मुंबई: आतंकवादी कृत्य के मामले में किसी विदेशी जमीन से पहली बार गवाही दिए जाने के तहत लश्कर ए तैयबा के पाकिस्तानी-अमेरिकी सदस्य डेविड हेडली ने आज वीडियो लिंक के जरिए एक अदालत को बताया कि पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26/11 हमलों से पहले मुंबई पर दो बार हमला करने की कोशिश की थी लेकिन वे दोनों बार ऐसा करने में नाकाम रहे थे. मुंबई में नवंबर 2008 में हुए इन हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी.

हेडली ने सुबह सात बजे शुरू हुई अपनी गवाही में कहा कि वह ‘‘लश्कर का कट्टर समर्थक’’ था और वह कुल आठ बार भारत आया था. वह 26 नवंबर 2008 को आतंकवादी हमले से पहले सात बार और हमले के बाद एक बार भारत आया था.

26/11 मामले में सरकारी गवाह बनाए गए हेडली ने कहा कि वह लश्कर में मुख्य रूप से साजिद मीर के संपर्क में था. साजिद मीर भी इस मामले में एक आरोपी है.

उसने अदालत को बताया कि लश्कर ने नवंबर 2008 को अंतत: हमला करने के पूर्व भी आतंकवादी हमले करने की दो असफल कोशिशें की थीं. पहली कोशिश सितंबर और दूसरी कोशिश अक्तूबर में की गई थी.

हेडली ने कहा कि वह लश्कर प्रमुख हाफिज सईद से ‘‘प्रभावित’’ होकर इस संगठन में शामिल हुआ था और उसने वर्ष 2002 में मुजफ्फराबाद में उनके साथ पहली बार ‘‘प्रशिक्षण’’ प्राप्त किया था.

आतंकवादी हमलों में शामिल होने के मामले में अमेरिका में 35 वर्ष के कारावास की सजा भुगत रहे हेडली ने यह भी कहा कि उसने 2006 में अपना नाम दाउद गिलानी से बदलकर डेविड हेडली रख लिया था ताकि वह भारत में प्रवेश कर सके और यहां कोई कारोबार स्थापित कर सके. हेडली ने यहां अदालत से कहा, ‘‘मैंने फिलाडेल्फिया में पांच फरवरी 2006 को नाम बदलने के लिए आवेदन दिया था. मैंने नए नाम से पासपोर्ट लेने के लिए अपना नाम बदलकर डेविड हेडली रख लिया. मैं नया पासपोर्ट चाहता था ताकि मैं एक अमेरिकी पहचान के साथ भारत में दाखिल हो सकूं.’’

हेडली ने कहा, ‘‘जब मुझे नया पासपोर्ट मिल गया तो मैंने लश्कर ए तैयबा में अपने साथियों को यह बात बताई. इनमें से एक साथी साजिद मीर था. यही वह व्यक्ति था, जिससे मैं संपर्क में था. भारत में आने का मेरा उद्देश्य एक कार्यालय:कारोबार स्थापित करना था ताकि मैं भारत में रह सकूं. पहली यात्रा से पहले साजिद मीर ने मुझे मुंबई का एक आम वीडियो बनाने के निर्देश दिए थे.’’ हेडली ने यह भी कहा कि भारतीय वीजा आवेदन में उसने अपनी असल पहचान छिपाने के लिए सभी ‘झूठी’ जानकारियां दी.

ऐसा बताया जाता है कि उसने वर्ष 2006 और 2008 के बीच कई बार भारत की यात्रा की, नक्शे खींचे, वीडियो फुटेज ली और हमले के लिए ताज होटल, ओबरॉय होटल और नरीमन हाउस समेत विभिन्न ठिकानों की जासूसी की.

हेडली की जासूसी ने हमला करने वाले लश्कर के 10 आतंकवादियों और उनके आकाओं को अहम जानकारी उपलब्ध कराई.

हेडली के वकील महेश जेठमलानी ने संवाददाताओं से कहा कि ‘‘ उसने (हेडली ने) इस बात की पुष्टि की है कि वह हाफिज सईद से प्रभावित होकर लश्कर में शामिल हुआ था. उसने अदालत को बताया कि 26/11 से पहले भी आतंकवादी हमले करने की दो असफल कोशिशें की गई थीं. उसने हमलों में लश्कर की भूमिका की विस्तृत जानकारी नहीं दी.’’ फिलहाल अदालत में मुख्य साजिशकर्ता सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल के खिलाफ मुकदमा चल रहा है. उसके खिलाफ इन आतंकवादी हमलों में उसकी कथित भूमिका को लेकर मामला चल रहा है.

हेडली की गवाही से मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के पीछे के षड्यंत्र के बारे में कई अहम खुलासे हो रहे हैं. इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी. अदालत ने 10 दिसंबर 2015 को हेडली को इस मामले में सरकारी गवाह बनाया था और उसे आठ फरवरी को अदालत के समक्ष पेश होने को कहा था.

उस समय हेडली ने विशेष न्यायाधीश जी ए सनप से कहा था कि अगर उसे माफ किया जाता है तो वह ‘‘गवाही देने को तैयार’’ है. न्यायाधीश सनप ने हेडली को कुछ शर्तों के आधार पर सरकारी गवाह बनाया था और उसे माफी दी थी.

मुंबई पुलिस ने पिछले साल आठ अक्तूबर को अदालत के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि हेडली के खिलाफ भी इस मामले में मुंबई हमलों के अहम साजिशकर्ता अबू जंदल के साथ इस अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि दोनों इस कायरतापूर्ण हमले के साजिशकर्ता और इसमें मददगार थे .

मुंबई पुलिस ने याचिका में कहा था कि हेडली के खिलाफ अमेरिकी अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट है कि वह लश्कर का सदस्य था और उसने आतंकवादी हमले में आपराधिक षड्यंत्र रचने में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

विशेष सरकारी अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कल कहा था, ‘‘भारतीय कानून के इतिहास में पहली बार कोई ‘विदेशी आतंकवादी’ किसी भारतीय अदालत में पेश होगा और बयान देगा.’’

 

मुंबई अदालत के समक्ष पेश हुआ हेडली, हमले से पूर्व सात बार भारत आने की बात कही

लश्कर ए तैयबा का पाकिस्तानी-अमेरिकी सदस्य डेविड हेडली 26/11 मामले में सरकारी गवाह बनाए जाने के बाद वीडियो लिंक के जरिए यहां एक अदालत के समझ पेश हुआ और उसने कहा कि वह 2008 में मुंबई में किए गए हमलों से पहले सात बार भारत आया था और लश्कर में उसका मुख्य संपर्क साजिद मीर के साथ था. मीर भी इस मामले में एक आरोपी है. हेडली पहली बार अदालत के समक्ष पेश हुआ है.

हेडली ने वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए कहा कि वह ‘‘लश्कर का कट्टर समर्थक’’ था और वह कुल आठ बार भारत आया था. वह 26 नवंबर 2008 को आतंकवादी हमले से पहले सात बार और हमले के बाद एक बार भारत आया था. वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए यह पेशी सुबह सात बजे से शुरू हुई.

आतंकवादी हमलों में शामिल होने के मामले में अमेरिका में 35 वर्ष के कारावास की सजा भुगत रहे हेडली ने यह भी कहा कि उसने 2006 में अपना नाम दाउद गिलानी से बदलकर डेविड हेडली रख लिया था ताकि वह भारत में प्रवेश कर सके और यहां कुछ कारोबार स्थापित कर सके.

हेडली ने यहां अदालत से कहा, ‘‘मैंने फिलाडेल्फिया में पांच फरवरी 2006 को नाम बदलने के लिए आवेदन किया था. मैंने नए नाम से पासपोर्ट लेने के लिए अपना नाम बदलकर डेविड हेडली रख लिया. मैं नया पासपोर्ट चाहता था ताकि मैं एक अमेरिकी पहचान के साथ भारत में दाखिल हो सकूं.’’

हेडली ने कहा, ‘‘जब मुझे नया पासपोर्ट मिल गया तो मैंने लश्कर ए तैयबा में अपने साथियों को यह बात बताई. इनमें से एक साथी साजिद मीर था. यही वह व्यक्ति था, जिससे मैं संपर्क में था. भारत में आने का उद्देश्य एक दफ्तर:कारोबार स्थापित करना था ताकि मैं भारत में रह सकूं. पहली यात्रा से पहले साजिद मीर ने मुझे मुंबई का एक आम वीडियो बनाने के निर्देश दिए थे.’’ हेडली ने यह भी कहा कि भारतीय वीजा आवेदन में उसने अपनी असल पहचान छिपाने के लिए सभी ‘झूठी’ जानकारी दी.

वर्ष 2006 और 2008 के बीच उसने कई बार भारत की यात्रा की, नक्शे खींचे, वीडियो फुटेज ली और हमले के लिए ताज होटल, ओबरॉय होटल और नरीमन हाउस समेत विभिन्न ठिकानों की जासूसी की.

हेडली की जासूसी ने हमला करने वाले लश्कर के 10 आतंकवादियों और उनके आकाओं को अहम जानकारी उपलब्ध कराई. फिलहाल अदालत में मुख्य साजिशकर्ता सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जंदल के खिलाफ मुकदमा चल रहा है. उसके खिलाफ इन आतंकवादी हमलों में उसकी कथित भूमिका को लेकर मामला चल रहा है.

हेडली की गवाही से मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के पीछे के षड्यंत्र के बारे में कई अहम खुलासे हो रहे हंै. इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी.

अदालत ने 10 दिसंबर 2015 को हेडली को इस मामले में सरकारी गवाह बनाया था और उसे आठ फरवरी को अदालत के समक्ष पेश होने को कहा था. उस समय हेडली ने विशेष न्यायाधीश जी ए सनप से कहा था कि अगर उसे माफ किया जाता है तो वह गवाही देने को तैयार है. न्यायाधीश सनप ने हेडली को कुछ शर्तों के आधार पर सरकारी गवाह बनाया था और उसे माफी दी थी.

मुंबई पुलिस ने पिछले साल आठ अक्तूबर को अदालत के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि हेडली के खिलाफ भी इस अदालत में इस मामले में मुंबई हमलों के अहम साजिशकर्ता अबू जंदल के साथ मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि दोनों इस कायरतापूर्ण हमले के साजिशकर्ता और इसमें मददगार थे .

मुंबई पुलिस ने याचिका में कहा था कि हेडली के खिलाफ अमेरिकी अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट है कि वह लश्कर का सदस्य था और उसने आतंकवादी हमले में आपराधिक षड्यंत्र रचने में सक्रिय भूमिका निभाई थी. विशेष सरकारी अभियोजक उज्ज्वल निकम ने कल कहा था, ‘‘भारतीय कानून के इतिहास में पहली बार कोई ‘विदेशी आतंकवादी’ किसी भारतीय अदालत में पेश होगा और बयान देगा.’’ निकम ने कहा था कि 26-11 के हमले के पीछे के कई तथ्यों को सामने लाने के लिए हेडली की गवाही महत्वपूर्ण है.

इस बीच मुंबई के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हेडली आपराधिक षड्यंत्र का व्यापक पहलू बता सकता है और हमलों में शामिल सभी लोगों की जानकारी दे सकता है. अधिकारी ने कहा, ‘‘वह मामले में पाकिस्तान की भूमिका को भी उजागर कर सकता है.’’

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