संस्कृत के लिए उमा की वकालत

By: | Last Updated: Sunday, 23 November 2014 2:33 AM

नई दिल्ली: केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के रूप में जर्मन को हटाने के मुद्दे पर पैदा हुए विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने शनिवार को कहा कि संस्कृत को एक ‘‘मध्यवर्ती’’ भाषा के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए ताकि देश में अंग्रेजी एवं हिंदी के बीच के ‘‘फर्क’’ को पाटा जा सके.

 

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारती ने कहा, ‘‘भारत में हमें एक तीसरी भाषा को उसकी गरिमा दिलानी होगी. राज्य अपनी भाषा पर जोर देते हैं और फिर देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाई जाने वाली भाषा के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है…’’ भारती ने कहा, ‘‘…..इन दोनों के बीच का फर्क तभी पाटा जा सकता है जब हम संस्कृत को मध्यवर्ती भाषा के तौर पर मान्यता दें.’’ अपने तर्क को सही ठहराते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में अंग्रेजी लिख सकने वाले लोगों की संख्या जितनी है, उससे कहीं ज्यादा लोग संस्कृत जानते हैं.

 

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जल संसाधन मंत्री भारती ने जल संरक्षण के विषय पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हर गांव में आपको कम से कम दो-तीन ऐसे लोग मिल जाएंगे जो संस्कृत जानते हैं पर अंग्रेजी के साथ ऐसा नहीं है.’’

 

बीजेपी नेता ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब केंद्रीय विद्यालयों से जर्मन को तीसरी भाषा के रूप में हटाने के मुद्दे पर विवाद चल रहा है. सरकार की दलील है कि तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन को बनाए रखना संविधान के खिलाफ है.

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Web Title: uam_bharti_on_sanskrit
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