महाराष्ट्र की राजनीति में शिवाजी और अफजल खान का किस्सा फिर से जिंदा

By: | Last Updated: Tuesday, 7 October 2014 1:16 PM

नई दिल्ली : महाराष्ट्र की राजनीति में शिवाजी और अफजल खान का किस्सा फिर से जिंदा हो गया है. कल तक बीजेपी की दोस्त रही शिवसेना अब बीजेपी की चुनाव रणनीति को अफजल खान का दर्जा दे रही है. वहीं बीजेपी भी शिवसेना को आड़े हाथों ले रही है.

 

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गठबंधन टूटने के बाद अब शिवसेना के लिए मोदी और उनकी सेनापति अमित शाह की चुनाव रणनीति अफजल खान की तरह हो गई है. महाराष्ट्र की मराठा राजनीति में शिवाजी बड़ा प्रतीक हैं. वहीं अफजल खान सबसे बड़ा खलनायक.

 

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अफजल खान बीजापुर की आदिलशाही हुकूमत का बेहतरीन योद्धा था जो हर तरह की रणनीति अपनाने में माहिर था. बीजापुर और मराठों के बीच में झगड़े में आदिलशाह द्वितीय की मां ने मराठों पर कब्जा पाने के लिए अफजल खान को भेजा. इतिहासकारों के मुताबिक एक दूत के जरिए शिवाजी और अफजल खान की मुलाकात हुई. लेकिन उसके बाद वहां धोखे की कहानी लिखी गई.

 

भारतीय इतिहास में शिवाजी का इस मुलाकात के विजेता की तरह दर्ज है. पर फारसी में लिखी अपनी टिप्पणियों में खाफी खां ने विश्वासघात का आरोप शिवाजी पर लगाया है.

 

भारत में अगर किसी की तुलना अफजल खान से की जाए तो उसका मतलब होता है. वह आदमी कहता कुछ है और दिल में उसके कुछ और होता है. बीजेपी इस आरोप को चुनावी बुखार का नाम दे रही है.

 

बीजेपी भले ही शिवसेना पर खुलकर हमला करने से बच रही हो लेकिन बीजेपी की रणनीति को अफजल खान की तरह बताकर शिवसेना ने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आने वाले दिनों में ये तेवर और तीखे हो सकते हैं.

 

 

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Web Title: udhav comment on modi and amit shah
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