READ FULL SPEECH: 'मेरा नाम उमर खालिद है लेकिन आई एम नॉट अ टेररिस्ट'

By: | Last Updated: Monday, 22 February 2016 10:08 AM
umar khalid full speech at jnu after return

नई दिल्ली: जेएनयू कांड के जिस आरोपी उमर खालिद की पुलिस तलाश कर रही थी वो कल शाम खुद ही जेएनयू पहुंच गया. उमर समेत जेएनयू कांड के पांच आरोपी भी जेएनय़ू कैंपस पहुंच गए. शाम करीब 6 बजे से लेकर रात के आठ बजे के बीच ये लोग जेएनयू पहुंचे.

उमर खालिद और बाकी आरोपियों ने जेएनयू में छात्रों को संबोधित भी किया. जेएनयू के बाहर पुलिस वाले मौजूद थे लेकिन फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

उमर खालिद ने जेएनयू में करीब 14 मिनट का भाषण दिया हम आपको उमर यहां उमर खालिद का जेेनयू में वापसी के बाद दिया दिए भाषण का टेक्स्ट

साथियों मेरा नाम उमर खालिद जरूर है लेकिन I am not a terrorist. सबसे पहले आज यहां इस समय और पिछले कई दिनों से जितने छात्र सड़कों पर इस कैंपस के अंदर इस कैंपस के बाहर और जितने कामरेड फैकल्टी में हैं. जो इस लड़ाई में शामिल रहे मैं हर एक का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं.

ये लड़ाई कुछ हम 5-6 लोगों के लिए नहीं थी. आज ये लड़ाई हम सारे लोगों की लड़ाई है. आज ये लड़ाई इस विश्वविद्यालय की लड़ाई है. आज ये लड़ाई इस विश्वविद्यालय की नहीं इस देश के हर विश्वविद्यालय की लड़ाई है. और सिर्फ विश्वविद्यालयों की नहीं इस समाज के लिए लड़ाई है कि आगे आने वाले समय में हमारा कैसा समाज होगा.

साथियों अभी पिछले दस दिनों में मुझे अपने बारे में ऐसी-ऐसी बातें जानने को मिली हैं जो मुझे खुद नहीं पता. मुझे पता चला मैं दो बार पाकिस्तान होकर आया हूं. मेरे पास पासपोर्ट नहीं है फिर भी मैं दो बार पाकिस्तान होकर आया हूं. फिर मुझे पता चला जब गुब्बारा फट गया फिर पता चला मैं मास्टरमाइंड हूं. जेएनयू के छात्रों के पास अच्छा दिमाग है लेकिन वो मुझ पर फोकस कर रहे हैं कि इस कार्यक्रम का मास्टरमाइंड मैं हूं. और मैं इस कार्यक्रम को सत्तर-अस्सी विश्वविद्यालयों में करने की कोशिश कर रहा हूं.

इसके बाद उनका कहना है कि मैं इस मीटिंग की प्लानिंग पिछले दो-तीन महीने से कर रहा था. मतलब अगर जेएनयू में किसी पब्लिक मीटिंग को कराने में दस महीने लगें तो जेएनयू ठप हो जाएगा. जब ये बात भी काउंटर हो गई तो पता चला कि मैंने 800 फोन को फोन किया है पिछले कुछ दिनों में. मतलब कोई सबूत कोई बात बोलने की जरूरत नहीं है मीडिया को बस किया है. और कहां-कहां किया है? गल्फ में किया है. कश्मीर में किया है. अरे एक सबूत तो लाओ. पहली बात तो ये है कि करने से कुछ होता नहीं अगर किया भी होता लेकिन कोई सबूत कोई सुनवाई कुछ नहीं है.

मतलब शर्म उन लोगों को बिल्कुल नहीं आती अगर हम उन लोगों से अपेक्षा करें तो करेंगे तो अपने आप को मूर्ख महसूस ही करेंगे. जिस तरह से वो हमें फ्रेम कर रहे हैं जिस तरह से परिभाषित कर रहे हैं. मतलब आईबी से, सरकार से आ गया कि जैश ए मोहम्मद से कोई संबंध नहीं है उसके बाद भी किसी ने माफी मांगना, डिस्क्लेमर देना कुछ करने की जरूरत नहीं है. जब मैंने पहली बार देखा तो हंसी आई कि यार जैश ए मोहम्मद को पता चला कि एजेंडे वाला प्रदर्शन करने लगे कि मेरा नाम उसके साथ जोड़ा जा रहा है. लेकिन वही बात है कि उनसे अपेक्षा करना वो नहीं है.

जिस किस्म से झूठ बोले गए, जिस किस्म से बातें की गईं. अगर इन मीडिया वालों को लगता है कि वो बच जाएंगे तो ऐसा नहीं होगा. आप लोगों ने इस देश में इस देश के खिलाफ कोई आदिवासी हो तो उसे माओवादी बोलकर, कोई मुसलमान हो तो उसे आतंकवादी बोलकर जिस तरह से एक सिलसिला चला है, और इसी तरह से मीडिया उसके पीछे लगा रहता है. शायद बहुत सारे लोग बेबस होते हैं उनके लिए कोई बोलने वाले बहुत कम लोग होते हैं, लेकिन भाईसाहब आप गलत लोगों से भिड़ गए. जेएनयू के छात्र आपको इसका मजा चखाएंगे.

एक-एक मीडिया चैनल को इसकी जवाबदेही करनी पड़ेगी जिन लोगों के खिलाफ इन्होंने किया है. मैंने उस वक्त इसका दर्द महसूस किया जब मैंने अपने पिता और बहन के स्टेटस देखे. जिस तरह से मेरी बहन को मेरी कई बहने हैं और सब लोगों को जब उन लोगों ने आकर सोशल मीडिया पर लिखना शुरू किया. जिस तरह से अलग-अलग किस्म की धमकियां देनी शुरू की, किसी को बोला बलात्कार कर देंगे किसी को बोला एसिड से अटैक करेंगे. किसी को बोला जान से मार देंगे.

मुझे वही समय याद आ रहा था. जब बजरंग दल के लोग कंधमाल में एक क्रिश्चियन नन के साथ रेप कर रहे थे तो भारत माता की जय बोल रहे थे. अगर मैं उस दिन के कामरेड कन्हैया के 11 फरवरी के भाषण को याद करूं तो अगर तुम्हारी भारत माता में ये तुम्हारी भारत माता हैं तो ये हमारी भारत माता नहीं है और हमें इस बात पर कोई शर्म नहीं है. हम लोगों को उसके बाद जब मेरे पिता से आकर बात किया, बात क्या किया पूछताछ की. जिस तरह से उनका कुछ पुराना निकाल कर बोला गया कि यहां से ये निकाला गया है. हर किस्म से आरोप लगा दो. कुछ लोग हैं, कुछ पत्रकार हैं, कुछ जी न्यूज में हैं कुछ टाइम्स नाउ में हैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगा, और उनके ऐसे ही कुछ छोटे-मोटे छुटभैया रिपोर्टर्स भी हैं.

वो सारे लोग मतलब इनको इतनी नफरत कहां से आती है. इतना गुस्सा कहां से आता हैं जेएनयू छात्रों पर मुझे समझ नहीं आता. इतनी नफरत पालते कैसे हैं ये लोग. जिस तरह से मेरा मीडिया ट्रायल हुआ. मैं यहां पर एक बात बोलना चाहूंगा अपने पर फोकस करके. जैसा कि मैंने पहले भी कहा है पिछले छह साल से मैं इस कैंपस में राजनीति कर रहा हूं. मैंने कभी नहीं सोचा कि मैं मुस्लिम हूं, और ना ही मैंने अपने आपको एक मुस्लिम के तौर पर पेश किया है. और ये बात मुझे लगी कि आज जो समाज में दमन है. वो सिर्फ मुसलमानों का नहीं है. हर अलग-अलह तबके का है चाहे वो आदिवासी हो, दलित हो सबका दमन है.

पहली बार लगा मैं मुसलमान हूं पिछले सात साल में… और वो पिछले दस दिन में लगा. जिस तरीके से रोहित का मर्डर किया गया. मैंने तुरंत अपनी पहचान छिपा ली और ये बात बहुत शर्मनाक है. ये बोल रहे हैं पाकिस्तानी एजेंट तो मैं पाकिस्तानी शायर का एक छोटा-सा दो लफ्ज बोलना चाहूंगा. हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है और इन दोनों मुल्कों पर अमेरिका का डेरा है और तुम अमेरिका के दलाल हो. तुम लोगों को दलाली के सिवा कुछ नहीं आता. एक सरकार बैठी है जो अमेरिका के तलवे चाट रही है.

हमारे देश के खनिज संपदा को यहां के रिसोर्सेस को… यहां कि लेबर को बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को बेच रही है. वहां शिक्षा को बेच रही है. हमने देखा किस तरीके से WTO में जाकर घुटने टेक दिए. घुटने क्या टेक दिए पूरा सजदा कर लिया वहां. वो लोग हमको बता रहे हैं कि देशभक्ति क्या होगी. ये लोग नहीं समझ सकते… हमने कहा कि आप लोग देशविरोधी हो. सारे देशविरोधी एक हो गए हैं. हमारा प्यार लोगों के लिए है. हमारी संघर्ष की कोई सीमा नहीं है. पूरी दुनिया में हम लोग एक ही रहेंगे. किसी भी सरकार के खिलाफ हो… किसी भी देश के खिलाफ हो और इस किस्म के घिनौने तरीके से वो हमें दबा नहीं सकते. वो हमको चुप नहीं कर सकते.

साथियों आप सारे लोगों को मुझे बोलने की जरूरत नहीं है. परेशान करने की जरूरत नहीं है. इनकी बहुमत हो सकती है. इन लोगों की बहुत सारी सीट हो सकती हैं. इनके पास बहुत मीडिया हो सकता है. इनके पास बहुत पुलिस हो सकती है लेकिन ये डरपोक लोग हैं. वो डरते हैं… हम लोगों से… वो डरते हैं हमारे संघर्षों से.. वो डरते हैं क्योंकि हम सोचते हैं और आज इस देश में मेरे साथी ने एक बात बोली थी वो मीडिया में दस फरवरी को…सबसे आसान है देशविरोधी होना… आप सोचना शुरू कर दीजिए- आप फौरन देशविरोधी बोल दिए जाओगे..तो इन सारे लोगों को अगर लगता है कि इस तरह से डरा सकते हैं तो आप बहुत बड़ा सपने में हैं.

जिस तरीके से मैने बोला आप लोगों ने गलत विश्वविद्यालय से पंगा ले लिया है- बहुत सारे विश्वविद्यालयों से पंगा पहले ही ले रहे हैं. लेकिन ये चाहे एफटीआईआई की लड़ाई हो, चाहे एचसीयू में हुआ रोहित वेमुला… उनके साथियों के साथ… जिस तरीके से रोहित वेमुला की हत्या की गई. जो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संदीप पांडे के साथ हुआ हर एक लड़ाई में हम कंधे से कंधा मिलकर लड़े हैं. हर एक लड़ाई को हम सड़कों पर लेकर गए हैं. यहां हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और अगर आपको लगता है कि सबसे बड़ा नाक में दम जेएनयू ने किया है और उसे हम खत्म कर देंगे तो आप जैसे पहले भी बहुत आए थे और उनको ऐसे ही निकाल दिया गया था.

शायद आप इंदिरा गांधी को भूल गए. इमरजेंसी के बाद जब वो यहां आईं थी तो उन्हें घुसने नहीं दिया गया था. शायद आप मनमोहन सिंह को भूल गए जब वो आए थे नेहरू की मूर्ति का अनावरण करने तो इस कैंपस के छात्रों ने उस तरीके से यूपीए सरकार ने जिस तरह से देश को बेचने की साजिश कर रही थी उसके खिलाफ झंडा दिखाया था. पी चिदंबरम जब यहां आए थे तो उनको लगा था कि छात्र उनका स्वागत करेंगे तो छात्रों ने उनको भी उनकी जगह दिखाई थी कि हम किसके साथ हैं. इस देश के शोषित और पीड़ित जनता के साथ हैं और आपके इस तरह के घिनौने तरीकों से कोई प्रभावित नहीं होगा.

ये सिर्फ एक दिमाग का खेल है. वो हमें जांचना चाहते हैं कि हम डर जाएंगे. लेकिन हम उनकी चुनौती को स्वीकार करते हैं कि हम नहीं डरेंगे. हम मजबूती से उनकी हर बात के खिलाफ लड़ेंगे… हर मुद्दे पर. इस विश्वविद्यालय के हर छात्र को ये अधिकार है कि वो बिना डर के अपनी बात को सामने रख सके. साथियों, ये डरपोक लोग हैं. और इनका एक जो छात्र विंग है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद… इस कैंपस की जो वानर सेना है वो लोग… उनको ठेका मिल गया है कि कुछ हो, ऐसी बात हो जहां आपका एजेंडा सामने नहीं आ रहा है..जहां लोग आपके खिलाफ हैं तो आप जाइये आप हुड़दंग कीजिए. हम आपको बचाएंगे…वहां के वाइस चांसलर, वहां का रजिस्ट्रार, पुलिस, एमपी सब आपके साथ आएंगे.

एक-एक चीज, आपने अप्पा राव जगदीश को बदला, आपने दत्तात्रेय को महेश गिरि के साथ बदला. ये स्क्रिप्ट एक ही है लेकिन यहां एक और रोहित नहीं बनेगा. हम अपनी पहचान नहीं छिपाएंगे. हम लड़ाई लड़ेंगे. एक-एक इंच की लड़ाई हम एक-एक इंच खदेड़कर निकालेंगे. साथियों ABVP हर जगह कैसे हुड़दंग करता है. वो एक बात जानते हैं. वो जनता के बीच जाकर जनता को एक नहीं कर सकते. पिछले दस दिनों में…इतना मीडिया में हंगामा करने के बाद इतना मीडिया ट्रायल करने के बाद अंदर से देशभक्ति को जिस तरह से जगाई जाए जो सो गई थी कुछ दिनों पहले तक.

उसके बाद भी सड़कों पर जिस तरह से प्रदर्शन हुए हैं. कुछ तादाद हैं इनकी…जो मुट्ठीभर लोग हैं, और यहां पंद्रह-पंद्रह हजार लोग जगे हैं. मैं मीडिया में कुछ दिनों पहले देख रहा था. जिस दिन यहां राहुल गांधी आए थे तो सुबह में काले झंडे दिखाए गए तो वहीं जी न्यूज वहां रिपोर्ट कर रहे थे कि छात्र बंट चुके हैं. आधे छात्र इधर हैं, आधे छात्र उधर हैं. बाद में पता चला दस-बारह लोग हैं- इधर और इधर तीन हजार छात्र थे. जिस तरह से ध्यान भटकाओ, जिस तरीके से झूठ बोलो और बेशर्मी से झूठ बोलो …इनको बहुत अच्छे से आता है.

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