समान नागरिक संहिता देश की एकता के लिए जरूरी: कानून मंत्री

By: | Last Updated: Wednesday, 14 October 2015 3:42 AM
Uniform Civil Code necessary but consensus needed: Gowda

नई दिल्ली: कानून मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए समान नागरिक संहिता जरूरी है लेकिन इसे लाने के लिए कोई भी निर्णय व्यापक विचार विमर्श के बाद ही किया जा सकता है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह एक समान नागरिक संहिता लाने को तैयार है. गौड़ा ने कहा कि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किये जाने से पहले वह प्रधानमंत्री, अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और शीर्ष कानून अधिकारियों से सलाह मशविरा करेंगे.

 

उन्होंने कहा कि आम सहमति बनाने के लिए विभिन्न पर्सनल लॉ बोर्डों और अन्य हितधारकों से ‘‘व्यापक मशविरा’’ किया जाएगा और इस प्रक्रिया में ‘‘कुछ समय’’ लग सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 44 कहता है कि एक समान नागरिक संहिता होनी चाहिए. राष्ट्रीय एकता के हित के लिए, निश्चित तौर पर एक समान नागरिक संहिता जरूरी है. यद्यपि यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है. इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है. यहां तक कि समुदायों में, पार्टी लाइन से उपर, यहां तक कि विभिन्न संगठनों के बीच-एक व्यापक चर्चा जरूरी है.’’

 

उन्होंने कहा कि कोई भी निर्णय ‘‘एक या दो दिन में नहीं किया जा सकता. इसमें समय लगेगा.’’ गौड़ा ने कहा, ‘‘यद्यपि संविधान की प्रस्तावना की अवधारणा और अनुच्छेद 44 और आज राष्ट्रीय हित में निश्चित तौर पर इस दिशा में एक कदम आगे उठाने की जरूरत है.’’ मंत्री ने कहा कि उन्होंने गत अप्रैल में लोकसभा में भी ऐसा ही बयान दिया था जब यह मुद्दा चर्चा के लिए आया था. गौड़ा ने कहा कि केरल और कर्नाटक हाई कोर्ट इस संबंध में पहले ही अपना फैसला दे चुके हैं जब वे किसी विवाह कानून संबंधित मामले पर गौर कर रहे थे. दोनों न्यायालयों का कहना था कि समान नागरिक संहिता ‘‘देश की जरूरत है.’’

 

गौड़ा ने कहा, ‘‘यद्यपि कोई भी निर्णय विभिन्न हितधारकों से उचित चर्चा के बाद ही किया जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि प्रस्तावित हलफनामे की सामग्री को अंतिम रूप उनकी प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल के सहयोगियों, अटॉर्नी जनरल और सालिसिटर जनरल से चर्चा के बाद ही दिया जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि हलफनामे की सामग्री का निर्णय सरकार की आंतरिक चर्चा के बाद ही किया जाएगा. यह पूछे जाने पर कि सरकार इस पर आगे क्यों नहीं बढ़ी जबकि समान नागरिक संहिता भाजपा की मूल विचारधारा का हिस्सा है, गौड़ा ने कहा, ‘‘आज तक हम इसलिए आगे नहीं बढ़ पाये क्योंकि मामला कुछ उच्च न्यायालयों और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन था. हमें मुद्दे पर धीरे धीरे आगे बढ़ना होगा.’’

 

 

अयोध्या में राम मंदिर, अनुच्छेद 370 रद्द करने और समान नागरिक संहिता के भाजपा के घोषणापत्र में शामिल होने संबंधी एक सवाल पर गौड़ा ने कहा कि पार्टी ने कभी यह नहीं कहा कि ‘‘उन्हें तत्काल किया जाएगा.’’ जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के उस फैसले के बारे में पूछे जाने कि अनुच्छेद 370 को जारी रखने की जरूरत है,

 

उन्होंने कहा कि अभी आदेश को पढ़ा नहीं है और संबंधित अतिरिक्त सालिसिटर जनरल को विधि मंत्रालय को उसकी एक प्रति मुहैया कराने को कहा गया है. गौड़ा इस सवाल को टाल गए कि क्या वह इस मुद्दे पर पीडीपी से मशविरा करेंगे और क्या सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी. उन्होंने कहा कि उन्हें अभी आदेश को पढ़ना है.

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Web Title: Uniform Civil Code necessary but consensus needed: Gowda
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