केंद्रीय कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की

By: | Last Updated: Sunday, 24 January 2016 3:42 PM
Union Cabinet recommends President’s Rule in Arunachal Pradesh

नई दिल्ली : अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने रास्ता साफ हो गया है. आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्ष में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी.

पिछले महीने 16 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश में तब राजनीतिक अस्थिरता शुरू हुई जब कांग्रेस के 21 बागी विधायकों ने बीजेपी के 11 विधायकों से हाथ मिला लिया और अन्य 2 निर्दलीय विधायक भी इस गुट के साथ आ गए.

बाद में कांग्रेस के बागी विधायकों ने मौजूदा मुख्यमंत्री नबाम तुकी की जगह कैलिखो पॉल को नेता चुन लिया. बागी कांग्रेस के विधायकों की जब स्पीकर ने सदस्यता रद्द की तो फिर बागी गुट ने बीजेपी के साथ मिलकर मौजूदा स्पीकर को ही हटा दिया. इस राजनीतिक खींचतान के बीच ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुुंच गया और अब भी ये केस सुप्रीम कोर्ट के अधीन है.

अब जब कैबिनेट अपने फैसले को लागू करने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने जा रही है, तो विवाद का गरमा लाजमी है.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. सिब्बल का कहना है कि जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है और पांच सदस्यों की संविधान पीठ इसकी सुनवाई कर रही है तो फिर कैसे राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की जा सकती है? सिब्बल के मुताबिक कैबिनेट का ये फैसला जानलेवा है.

ये राजनीतिक असहिष्णुता का मामला है?

कपिल सिब्बल ने कहा, “अगर ये खबर सही है कि कैबिनेट ने अरुणाचल में राष्ट्रपति शाषण लगाने की सिफारिश की है, गवर्नर ने पहले ही अपने काम से शर्मिंदा किया है, अब सरकार ऐसी सिफारिश कर गलत कर रही है. ये ग़लत है. उनको मालूम है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. ये भारी पड़ेगा. ये राजनीतिक असहिष्णुता का मामला है. मुझे लगता है राष्ट्रपति अपने पूरे विवेक में फैसला लेंगे.”

आपको बता दें कि जब संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा आया था तब कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था और संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी थी. तब कांग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधित्व मंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी और इस मसले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. तब कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को अस्थिर कर रही है.

आपको बता दें कि 60 सदस्यीय विधानसभा में 47 विधायक कांग्रेस के हैं, लेकिन जब 47 में से 21 कांग्रेसी विधायक ने बग़ावत का झंडा उठाया तो बीजेपी के 11 विधायक भी कांग्रेस के बाग़ी गुट के साथ खड़े हो गए. बाग़ी होने वालों में डिप्टी स्पीकर भी शामिल थे.

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