भूमि अध्यादेश किसानों और गरीबों का समर्थक: बीजेपी

By: | Last Updated: Monday, 20 April 2015 4:09 PM

नई दिल्ली: सरकार ने आज कहा कि काफी चर्चा और विचार विमर्श के बाद भूमि अध्यादेश को पुन: जारी किया गया, साथ ही सरकार ने ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से हुए नुकसान से किसानों को राहत प्रदान करने के लिए उठाये गए कदमों को भी रेखांकित किया.

 

कृषि की स्थिति पर लोकसभा में हुई चर्चा मे हस्तक्षेप करते हुए संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर दस साल के अपने कार्यकाल के दौरान 460 अध्यादेश जारी करने के लिए निशाना साधा.

 

उन्होंने कहा कि काफी चर्चा और विचार विमर्श के बाद भूमि अध्यादेश को पुन: जारी किया गया है. पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने अपने कार्यकाल में 462 अध्यादेश जारी किये जबकि हमारी सरकार मुश्किल से अध्यादेश 10 लाई है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्रतिबद्धता किसानों, गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के कल्याण के लिए है. आप पांच साल संयम बरतें.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमें किसानों के विषय पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है. सभी लोगों को किसानों की समस्या का निपटारा करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए.’’

 

वेंकैया ने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है. नायडू ने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा ‘‘आप केवल एक को देखते हैं, हम सभी को देखते हैं. आप संयम रखे, तथ्यों से क्यों घबड़ाते हैं.’’ उन्होंने कहा कि राहुल बाबू आप सत्ता में 50 साल थे, हम केवल 9.10 महीने से हैं.

 

भूमि अध्यादेश किसान, गरीब समर्थक: भाजपा

 

भूमि अध्यादेश को ‘गरीब समर्थक और किसान हितैषी’ बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को दिल्ली में रैली आयोजित करने के लिए कांग्रेस पर हमला बोला.

 

उन्होंने कहा कि यह रैली सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने के लिए आयोजित की गई थी और इस रैली में किसान से संबंधित किसी भी मुद्दे को नहीं उठाया गया.

 

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री एम. वेंकेया नायडू ने कहा, “भूमि अध्यादेश लोकहितकारी, गरीब और किसान समर्थक है. किसान खुश हैं. कोई किसान आंदोलन नहीं हो रहा.”

 

नायडू ने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए विपक्ष की इस धारणा को खारिज किया कि किसान भूमि अध्यादेश से खुश नहीं है.

 

नायडू ने कहा कि रविवार को कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार के भूमि अध्यादेश के विरोध में ‘किसान खेत मजदूर रैली’ आयोजित की. इसे सिर्फ प्रधानमंत्री की आलोचना करने के लिए आयोजित किया गया था.

 

उन्होंने कहा, “इस समय कांग्रेस कुछ अधिक करने में सक्षम नहीं है. उनके नेता राहुल गांधी अभी वापस आए हैं. इसलिए उन्होंने यह रैली आयोजित की, जिसमें किसानों के हित में कुछ भी चर्चा नहीं हुई. रैली में सिर्फ प्रधानमंत्री की आलोचना की गई.”नायडू ने लोगों से भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर प्रबुद्ध बहस का आग्रह किया.

 

भूमि अधिग्रहण विधेयक वापस ले सरकार: कांग्रेस

 

कांग्रेस ने सरकार पर भूमि अधिग्रहण विधेयक को पिछले दरवाजे से पेश करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को इसे वापस लेने की मांग की और संप्रग सरकार द्वारा 2013 में लाए गए भूमि विधेयक को जारी रखने पर जोर दिया.

 

लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “आप लोकसभा में भूमि अधिग्रहण विधेयक के रूप में अध्यादेश को लेकर आए. जोरदार विरोध के बावजूद, विधेयक को पारित कर दिया गया और उसे बाद में राज्यसभा भी भेज दिया गया, जहां वह पारित नहीं हो सका.”

 

खड़गे ने लगभग महीने भर के अंतराल के बाद बजट सत्र के दूसरे चरण के तहत सोमवार से शुरू हुए लोकसभा सत्र में यह बात कही.

 

उन्होंने कहा, “लेकिन इस अध्यादेश को लोगों की इच्छा के बावजूद वापस लाया गया. आप इसे पिछले दरवाजे से लेकर आए. इसकी कोई जरूरत ही नहीं है. सरकार इसे लोगों के ऊपर थोपने का प्रयास कर रही है.”

 

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना (संशोधन) अध्यादेश में उचित मुआवजे और पारदर्शिता का अधिकार सर्वप्रथम 31 दिसंबर 2014 को लाया गया. राज्यसभा में विपक्ष के भारी विरोध की वजह से संसद के बजट सत्र की शुरुआत में यह कानून नहीं बन सका. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के निरस्त होने से एक दिन पहले तीन अप्रैल को दोबारा इसे लागू कर दिया गया.

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