UP: हाईकोर्ट ने उठाए PWD विभाग पर सवाल, बैंक एकाउंट सीज़ करने की दी चेतावनी

UP: हाईकोर्ट ने उठाए PWD विभाग पर सवाल, बैंक एकाउंट सीज़ करने की दी चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि मनमाने रवैये के चलते क्यों न पीडब्लूडी के बैंक एकाउंट को सीज कर दिया जाए. अदालत ने इस मामले में योगी सरकार से दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है.

By: | Updated: 26 Sep 2017 09:19 PM

इलाहाबाद: यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के विभाग पीडब्लूडी के कामकाज पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त नाराज़गी जताई है. अदालत ने योगी सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि मनमाने रवैये के चलते क्यों न पीडब्लूडी के बैंक एकाउंट को सीज कर दिया जाए.


अदालत ने इस मामले में योगी सरकार से दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है. अदालत ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि क्यों न पीडब्लूडी के बैंक एकाउंट को सीज करने का आदेश जारी कर दिया जाए. अदालत ने इस बारे में योगी सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह अक्टूबर तक का वक्त दिया है.


अदालत इस मामले में छह अक्टूबर को फिर से सुनवाई करेगी. यह आदेश जस्टिस तरुण अग्रवाल और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की डिवीजन बेंच ने आज़मगढ़ के ठेकेदार प्रवीण सिंह की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है.


हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करने वाले प्रवीण सिंह आजमगढ़ में पीडब्लूडी में सी कैटेगरी का ठेकेदार है. साल 2005 में उसे जिले में सरदहा से भीमभर तक सड़क बनाने का ठेका मिला था. उसने निर्धारित समय सीमा में अपना काम भी पूरा कर लिया और बिल भुगतान के लिए लोक निर्माण विभाग में अपनी फ़ाइल पेश की.


विभाग ने काम के आधे पैसों का भुगतान भी कर दिया, लेकिन आधे अमाउंट 45 हजार 273 रुपये का भुगतान रोक दिया गया. लम्बे अरसे की भागदौड़ के बाद भी जब उसके बचे हुए पैसों का भुगतान नहीं हुआ तो ठेकेदार प्रवीण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की और बकाये पैसों के भुगतान की मांग की. दो जजेज की डिवीजन बेंच ने इस बारे में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर को छह हफ्ते में बकाये के भुगतान का आदेश करते हुए अर्जी को निस्तारित कर दिया.


हाईकोर्ट के इस आदेश के पालन में आजमगढ़ के सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर ने आदेश पारित कर कहा कि बिल भुगतान को लेकर याची ठेकेदार का दावा स्वीकार है, लेकिन इसका भुगतान पी.डब्ल्यू.डी. अनुभाग 13 के ज्वाइन्ट सेक्रेटरी के निर्देश के बिना नहीं हो सकता. सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर के इस आदेश को ठेकेदार प्रवीण ने दोबारा नई अर्जी देकर चुनौती दी.


अर्जी में कहा गया कि जब बिल का पैसा व उसका भुगतान होना स्वीकार है तो विभाग के बड़े अधिकारी इस भुगतान को नहीं रोक सकते. याची ने पैसा लगाकर ठेके का काम पूरा किया है, इस नाते उसे उसे पैसों का भुगतान पाने का पूरा अधिकार है.

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