राम मंदिर के लिए हुए शिलापूजन पर अखिलेश सरकार ने मांगी रिपोर्ट

By: | Last Updated: Tuesday, 22 December 2015 10:59 AM
up government asks for report on ram mandir

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर को लेकर हुए शिलापूजन पर एबीपी न्यूज की खबर का असर हुआ है. सोमवार को हमने खुलासा किया था कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए हलचल तेज हो गई है. अयोध्या में तराशे जा रहे पत्थरों का शिला पूजन किया गया है. एबीपी न्यूज के खबर देखने के बाद यूपी सरकार जागी है. सीएम अखिलेश यादव ने इसे लेकर प्रमुख सचिव (गृह) वाशीष पांडा से रिपोर्ट मांगी है. पूछा है कि कहीं कोई सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ तो नहीं रहा है?
फ़ाइल फ़ोटो: यूपी के सीएम अखिलेश यादव
अयोध्या में विवादित जगह पर राम मंदिर निर्माण को लेकर सरगर्मी बढ़ रही है. रविवार को अयोध्या में शिलाओं की पूजा की गई. इसी महीने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर बयान दिया था. सवाल उठता है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है फिर फैसले का इंतजार किये बिना मंदिर की तैयारी क्यों तेज हो गई है?

रविवार को शिलाओं के पूजन-अर्चन के बाद रामजन्म भूमि ट्रस्ट महंत नृत्य गोपालदास ने कहा कि भगवान की कृपा से राम मंदिर निर्माण का वक्त आ गया है. महंत दास ने बताया कि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्णाण के लिए 2.20 लाख क्यूबिक फिट पत्थर की जरूरत पड़ेगी इसमें से करीब 1.2 लाख क्यूबिक फिट पत्थर तराशा जा चुका है और बाकी पत्थरों के आने का काम शुरू हो चुका है.

महंत नृत्य गोपालदास से पूछा गया कि रामजन्म भूमि विवाद जब सुप्रीम कोर्ट में है फिर मंदिर के निर्माण का काम कैसे शुरू किया जा सकता है. इसके जवाब में महंत दास ने कहा कि अभी तक राम मंदिर के लिए कानून बनाने के वास्ते राज्यसभा में बहुमत का इंतजार था पर अब ऐसा नहीं है.

क्या ये अचानक हो रहा है?

अयोध्या में मंदिर निर्माण से जुड़ा सामान सालों से पड़ा था. करीब 8 साल बाद मंदिर निर्माण से जुड़ी हलचल तेज हो गई है? क्या ये सब अचानक हो रहा है?  आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर विरोधियों ने तलवार खींच ली थी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूछा कि तारीख तो बताएं कि मंदिर कब बनेगा? कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी अपने राजनीतिक फायदे के लिए एक बार फिर राम का नाम इस्तेमाल कर रही है.

दरअसल राम मंदिर का मुद्दा संघ के लिए हमेशा से अहम रहा है लेकिन मोहन भागवत के हाल के बयानों ने इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है तो इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं.

पहली बात ये कि भागवत उस राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख हैं जिसका राजनीतिक विंग कही जाने वाली बीजेपी के पास देश की सत्ता है. यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं. ऐसे में आरएसएस के मुखिया की हैसियत से भागवत का बयान बेहद अहम माना गया.

Bhagwat
दूसरी बात ये है कि देश में बीजेपी की सरकार के बनने के बाद पहली बार आरएसएस की ओर से राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान आया और इसके कुछ ही दिनों बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण से जुड़ी हलचल तेज हो गई है.

अगले साल यानी 2016 में पश्चिम बंगाल और साल 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में विरोधी दल मंदिर मुद्दे को बीजेपी की चुनावी चाल बता रहे हैं.

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