#ThakurVsMulayam: मुलायम पर आरोप लगाने वाले आईपीएस अमिताभ ठाकुर सस्पेंड

By: | Last Updated: Tuesday, 14 July 2015 1:12 AM

लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकार चला रही समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के साथ टकराव में उलझे और इस लड़ाई को केंद्र तक ले जाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया है.

इससे पहले पुलिस महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी ठाकुर ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क कर अपने खिलाफ दायर रेप के मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की. ठाकुर ने मुलायम द्वारा धमकी दिये जाने की शिकायत पुलिस में दर्ज करायी है.

 

सस्पेंड करने को लेकर सरकार ने दिए कई बहाने

लखनऊ में जारी की गयी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य सरकार ने ठाकुर को दायित्व निर्वहन में कोताही, अनुशासनहीनता, सरकार विरोधी रुख अपनाने और हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना के प्रथम दृष्टया आरोपों को लेकर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. विज्ञप्ति के अनुसार निलंबन की अवधि में ठाकुर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय से संबद्ध रहेंगे और डीजीपी की मंजूरी के बिना राज्य मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे.

 

मुलायम के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे अमिताभ

निलंबन के आदेश को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकुर ने कहा कि वह इसे अदालत में चुनौती देंगे. उन्होंने कहा, “मैं संबंधित अदालत में मामला उठाउंगा.” इससे पहले उन्होंने दिल्ली आकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अनंत कुमार सिंह से मुलाकात की. उन्होंने खुद और अपनी पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के लिए केन्द्रीय बलों की सुरक्षा की मांगी.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मुलायम सिंह यादव ने मुझे नतीजा भुगत लेने की धमकी दी है इसलिए मैं अतिरिक्त सचिव से मिला और खुद के लिए और अपनी पत्नी के लिए केन्द्रीय बलों की सुरक्षा मांगी.’’ ठाकुर ने कहा, ‘‘यदि मेरी मांग नहीं मानी गयी तो मैं हाई कोर्ट जाउंगा और वहां से न्याय मांगूंगा. यह और कुछ नहीं बल्कि मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश और उत्पीड़न है.’’ उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी नूतन ने उत्तर प्रदेश के मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज करायी थी, जिसके बाद मुलायम ने उन्हें कथित धमकी दी.

 

बदले की भावना से मुलायम ने लगवाए रेप के आरोप?

ठाकुर ने साथ ही कहा कि मुलायम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें इस तरह की कार्रवाई की आशंका थी. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आशंका थी कि मेरे खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा या विभागीय कार्रवाई की जाएगी. मेरे खिलाफ जो (रेप का) फर्जी मामला दायर किया गया उसके सामने विभागीय कार्रवाई कुछ नहीं है.’’

 

ठाकुर ने कहा, ‘‘मैं इस सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्रतिवेदन दूंगा और जरूरत पड़ी तो अदालत भी जाउंगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सरकार के खिलाफ बात नहीं की थी बल्कि एक व्यक्ति के बारे में बात की थी.’’ विज्ञप्ति में कहा गया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनउ पीठ ने ठाकुर को राज्य प्रशासन की मंजूरी के बिना आरटीआई आवेदन दायर ना करने का निर्देश दिया था ‘लेकिन उन्होंने ना केवल अदालत के आदेश की अवहेलना की बल्कि सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए मीडिया में बयान दिए.’

 

इसमें कहा गया, ‘‘ठाकुर के व्यवहार ने पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता को बढ़ावा दिया है और जनता में प्रशासन एवं पुलिस की छवि खराब की है.’’ ठाकुर पर बिना मंजूरी के विभिन्न संगठनों की बैठक में शामिल होने, सरकारी धन के दुरूपयोग, लोगों को गुमराह करने, मनमानी, महात्मा गांधी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने, राज्य पुलिस मुख्यालय के सामने धरने पर बैठने के भी आरोप लगाए गए हैं.

 

मुलायमVsअमिताभ: स्टिंग के पीछे की कहानी 

 

कौन हैं अमिताभ ठाकुर

उत्तर प्रदेश में अमिताभ ठाकुर की दो बड़ी पहचान हैं. एक तो वो पुलिस महकमें के आईजी जैसे बड़े पद पर हैं तो दूसरी तरफ वो आरटीआई कार्यकर्ता भी हैं. डबल रोल वाला ये आईपीएस अधिकारी 23 साल के करियर में 30 तबादले भी देख चुका है.

 

अमिताभ ठाकुर को ये भी पसंद नहीं है कि पुलिस वाले मंत्रियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर दें. उन्होंने यूपी के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर ये कहा था कि पुलिस वालों को क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले मंत्रियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर देने की प्रथा बंद कर दी जाए.

 

ऐसे ही दिलचस्प किस्सों से बनती है इन दिनों यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की कहानी. अमिताभ ठाकुर को अपने आस पास होने वाली किसी भी गलत बात पर गुस्सा आता है और इस गुस्से को वो अदालती और सामाजिक लड़ाई में बदल देते हैं. आई हेट गांधी नाम के फेसबुक पेज पर गांधी जी के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों के बाद अगर फेसबुक ने हटा दिया तो इसके पीछे भी अमिताभ ठाकुर ही थे.

 

47 साल के अमिताभ का जन्म बोकारो में हुआ था जो उस वक्त बिहार का हिस्सा था. केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई पुरी करने के बाद अमिताभ ने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद वो 1992 में आईपीएस में चुने गए.

 

आईपीएस बनने के बाद उन्हें कप्तान के तौर पर यूपी के 7 जिलों में काम करने का मौका मिला. वो बस्ती, देवरिया, बलिया, महाराजगंज, गोंडा, ललितपुर और फिरोजाबाद में तैनात रहे.

 

अमिताभ नेशनल आरटीआई फोरम नाम से एक संस्था चलाते हैं जिसमें देश भर के करीब 150 आरटीआई कार्यकर्ता शामिल हैं. अपनी इस संस्था की ओर से वो करीब 500 आरटीआई आवेदन और 150 जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं. इसके अलावा अमिताभ मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं. ये काम वो आईआरडीएस यानी इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डाक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज के जरिए कर रहे हैं.
 

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Web Title: UP IPS officer Amitabh Thakur suspended after calsh with mulayam singh
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