यूपी में आवाज दबा रही है सरकार, यूपी स्कूलों का पर्दाफाश करने वाला शिक्षक बर्खास्त

By: | Last Updated: Thursday, 20 August 2015 5:41 AM
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नई दिल्लीः जिस शिक्षक की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया है, उसे ही यूपी सरकार ने बर्खास्त कर दिया है. सुल्तानपुर के शिक्षक शिव कुमार पाठक की अपील पर हाई कोर्ट ने सांसदों, विधायकों, कर्मचारियों को अपने बच्चों को सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने का आदेश दिया था.

 

 पाठक को सुल्तानपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने बर्खास्तगी की चिट्ठी भेजी है. उन्हे इस आधार पर बर्खास्त किया गया है कि पाठक बिना छुट्टी के स्कूल से बारह दिनों तक गायब थे.

 

 जबकि पाठक का कहना है की उन्होने लिखित छुट्टी ली थी. शिव कुमार पाठक का आरोप है कि ‘अदालतों में शिक्षा विभाग में चल रही गड़बड़ियों की शिकायत करने की सजा उन्हे मिली है.’

 

क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलावर को ऐसा आदेश सुनाया है जो स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. कोर्ट ने कहा है कि यूपी के सभी एमपी-एमएलए और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ाया जाए. कोर्ट का मानना है कि ऐसा करने से ही सरकारी प्राइमरी स्कूलों की हालत में सुधार आयेगी.

 

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा – एमपी, एमएलए, सरकारी अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और सरकार से सहायता प्राप्त करनेवाले लोगों के बच्चों की प्राइमरी शिक्षा सरकारी स्कूलों में दिलाई जाए. जबतक ऐसे लोगों के बच्चे सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे तब तक सरकारी स्कूलों की हालत नहीं सुधरेगी.

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को आदेश दिया है कि वो इस बारे में 6 महीने में कानून बनाए. कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा – अगले साल शुरू होनेवाले नये सेशन से ये आदेश लागू किया जाए. जो लोग इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो.

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