यूपी में दसवीं और बारहवीं के करीब पौने सात लाख छात्रों ने बोर्ड परीक्षा बीच में छोड़ी, बोर्ड का दावा- नकल के खिलाफ सख्ती का असर

By: | Last Updated: Wednesday, 18 March 2015 3:06 AM
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नई दिल्ली: दसवीं और बारहवीं कक्षा के करीब पौने सात लाख छात्रों ने यूपी बोर्ड की परीक्षा बीच में ही छोड़ दी है. इसके बाद बोर्ड के कामकाज पर सवालिया निशान उठने शुरु हो गए हैं. छात्रों के परीक्षा छोड़ने पर यूपी बोर्ड के अधिकारियों सफाई दे रहे हैं कि नकल को सख्ती से रोके जाने के कारण छात्र परीक्षा से भाग रहे हैं.

 

यूपी बोर्ड के परीक्षा ख़त्म होने में अभी करीब हफ्ते भर का वक्त और है, लेकिन दसवीं और बारहवीं क्लास में अब तक पौने सात लाख से ज़्यादा बच्चे परीक्षा छोड़कर भाग खड़े हुए हैं. बीच मझधार में ही पौने सात लाख से ज़्यादा बच्चों के परीक्षा से तौबा करने वाली यह हकीकत जहां बेहद चौकाने वाली है, वहीं इसने बोर्ड के काम-काज पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. बोर्ड के बड़े अफसर जहाँ नक़ल पर सख्ती की वजह से ऐसा होने का दावा करते हुए खुद अपनी पीठ थपथपाने में जुटे हुए हैं, तो वहीं जानकार इसके लिए नक़ल माफियाओं के खेल और बोर्ड की लापरवाही को ज़िम्मेदार मान रहे हैं.

 

इस हकीकत पर आप शायद ही यकीन कर पाएंगे कि CBSE  बोर्ड की दसवीं और बारहवीं क्लास में समूचे यूपी से जितने बच्चे इस बार परीक्षा में शामिल हुए हैं, यूपी बोर्ड में उसके दोगुने से ज़्यादा छात्रों ने परीक्षा ख़त्म होने से पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिए हैं और परीक्षा देने के बजाय घर बैठ गए हैं. पौने सात लाख से ज्यादा बच्चों के परीक्षा छोड़ने का यह चौंकाने वाला आंकड़ा सिर्फ 16 मार्च तक का है, जबकि बारहवीं क्लास के परीक्षा अभी 23 मार्च तक चलने हैं.

 

इस बार 11 मार्च को ख़त्म हुए दसवीं क्लास के परीक्षा में चार लाख अठारह हजार से ज़्यादा ने परीक्षा छोड़ दी है, तो बारहवीं क्लास में सोलह मार्च तक दो लाख सत्तावन हजार ने परीक्षा से तौबा कर ली है. यूपी बोर्ड के इतिहास में इतनी संख्या में छात्रों ने पहले कभी बीच परीक्षा अपने हाथ खड़े नहीं किये. बोर्ड ने इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर नक़ल के फेर में दो- तीन जगह से फ़ार्म भरने का खेल ख़त्म होने का दावा किया था, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक़ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बावजूद इस साल हर बार से ज़्यादा स्टूडेंट्स ने बीच में ही परीक्षा छोड़ दी है. बोर्ड के अफसरों का दावा है कि इस बार नक़ल पर सख्ती की गई, जिसके चलते नक़ल के भरोसे रहने वाले छात्र अपनी मनमानी नहीं कर पाए और उन्होंने मजबूर होकर परीक्षा छोड़ दी.

 

बोर्ड के अफसर भले ही इसे अपनी कामयाबी बताते हुए खुद वाहवाही लूटने में लगे हुए हों लेकिन जानकर इससे कतई इत्तेफाक नहीं रखते. जानकारों के मुताबिक़ लाखों की तादात में परीक्षा छोड़ने वालों के यह आंकड़े नक़ल माफियाओं और बोर्ड की लापरवाही की देन है. इनका दावा है कि माफियाओं ने इस बार भी मामूली फेरबदल कर फर्जी रजिस्ट्रेशन कराये हैं. इतना ही नहीं फर्जी रजिस्ट्रेशन के कई मामले पकड़ने के बावजूद बोर्ड उन्हें रोल लिस्ट से अलग नहीं कर सका. इसके अलावा आख़िरी वक्त में नियमों को ताक पर रखकर तमाम लोगों को परीक्षा में शामिल होने का मौका भी दिया गया. इसके अलावा ठेकेदारों ने प्राइवेट छात्रों को कई-कई जगहों से फ़ार्म भरवाए और बाद में अपनी पसंद या फिर सेटिंग वाले सेंटर पर परीक्षा दिलाकर बाकी जगहों से परीक्षा छुड़वा दी. 

 

जानकारों के मुताबिक़ बोर्ड द्वारा नक़ल रोकने के सारे दावे इस बार पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुए हैं. 16 मार्च तक इस बार सिर्फ दो हजार छात्र नक़ल करते पकड़े गए, जबकि पिछले सालों में यह आंकड़ा कई गुना ज़्यादा होता था. यूपी बोर्ड में इस बार 64 लाख 23 हजार छात्रों ने आवेदन किया था, जबकि पिछली बार यह संख्या 70 लाख के करीब थी. वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय से बोर्ड परीक्षा छोड़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है.

 

नकल रैकेट के खिलाफ आईएएस अधिकारी की मुहिम

उत्तर प्रदेश में तैनात एक आईएएस अधिकारी ने राज्य में नकल रैकेट के खिलाफ एक मुहिम शुरू की है.

 

IAS अधिकारी एस पी सिंह ने नकल विरोधी अभियान ‘सामाजिक परिवर्तन के लिए स्वैच्छिक कार्रवाई’ शुरू करते हुए कहा, ‘‘यह सामूहिक लामबंदी अभियान है.’’ आईएएस अधिकारी ने यहां जिलाधिकारी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में दावा करते हुए कहा, ‘‘राज्य में नकल घोटाला पांच हजार करोड़ रूपये से अधिक का है.’’

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