संस्कृत अनिवार्य बनाने का फैसला यूपीए का था: शिक्षा मंत्रालय

By: | Last Updated: Thursday, 4 December 2014 3:13 AM

नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा मंत्रालय) ने आज कहा कि उन स्कूलों में जहां संस्कृत विभाग नहीं है, वहां उसे खोलने की संभावना तलाशने को कहने और सीबीएसई से इस भाषा की पढ़ाई 10 वीं कक्षा तक अनिवार्य बनाने को कहने का फैसला पिछली यूपीए सरकार के दौरान का था.

 

मंत्रालय के अधिकारियों ने लखनउ में पिछले साल सितंबर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद जारी किए गए परिपत्रों का हवाला दिया, जहां इसने संस्कृत को सभी माध्यमिक स्कूलों में अनिवार्य बनाने का संकल्प लिया था. यह परिपत्र सीबीएसई अध्यक्ष और एनसीईआरटी निदेशक को भेजा गया था.

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Web Title: upa 2 wanted sanskrit compulsory to be compulsory
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